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पत्रिका अलर्ट : इस बार समय पर नहीं जागे तो पिछले साल की तरह करना पड़ सकता है भीषण बाढ़ का सामना

  • नदी, नालों की सफाई पर हर साल खर्च होते हैं लाखों रुपए, समस्या की मूल जड़ पर ध्यान नहीं
  • शहर से गुजरी गुनिया और पनरिया नदी की सफाई का काम अब तक शुरू नहीं
  • नालियां और नाले कचरे से पटे, रिहायशी इलाकों में नहीं लगाई गईं जालियां
  • नदी के दोनों ओर न अतिक्रमण हट सका और न कचरा रोकने के इंतजाम-
  • नदी-नाले किनारे बढ़ता अतिक्रमण बना था बाढ़ की वजह

गुना

Published: April 11, 2022 01:13:22 am

गुना. शहर से गुजरी नदी, तालाब और नालों की सफाई पर नगर पालिका हर साल लाखों रुपए का बजट खर्च करती आ रही है। इसके बावजूद ऐसा कोई साल नहीं गया जब शहरवासियों को बारिश केे मौसम में जल भराव की गंभीर समस्या सहित कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालातों का सामना न करना पड़ता हो। क्योंकि प्रशासन अब तक समस्या की मूल जड़ का इलाज नहीं कर पाया है। नतीजतन जनता से टैक्स के रूप में नपा के खजाने में जमा कोष हर साल नालों की सफाई के नाम पर खर्च किया जा रहा है।
पत्रिका अलर्ट : इस बार समय पर नहीं जागे तो पिछले साल की तरह करना पड़ सकता है भीषण बाढ़ का सामना
पत्रिका अलर्ट : इस बार समय पर नहीं जागे तो पिछले साल की तरह करना पड़ सकता है भीषण बाढ़ का सामना,पत्रिका अलर्ट : इस बार समय पर नहीं जागे तो पिछले साल की तरह करना पड़ सकता है भीषण बाढ़ का सामना,पत्रिका अलर्ट : इस बार समय पर नहीं जागे तो पिछले साल की तरह करना पड़ सकता है भीषण बाढ़ का सामना
उल्लेखनीय है कि बीते साल इस तरह की लापरवाही की वजह से ही शहर के रिहायशी और घनी आबादी वाले क्षेत्र में भीषण बाढ़ के हालात निर्मित हुए थे। जिसमें जानमाल सहित लाखों रुपए की आर्थिक हानि भी हुई थी। सरकार को पीड़ित लोगों को मुआवजा तक देना पड़ा था।जानकारी के मुताबिक गुना शहर के बीचों बीच से निकली गुनिया और पनरिया नदी शहरवासियों के लिए वरदान हैं। जिससे शहर का जल स्तर बनाए रखने में अहम मदद मिलती है। लेकिन कुछ नागरिकों के अति स्वार्थपूर्ण रवैए और प्रशासनिक उदासीनता ने इन नदियों को परेशानी का सबब बना दिया है। जिसका उदाहरण बीते साल गुनावासी देख भी चुके हैं और नतीजा भी भुगत चुके हैं।
गौरतलब है कि बाढ़ के समय यह मांग बहुत उठी थी कि गुनिया नदी के उद्गम स्थल से लेकर शहर के आखिरी छोर तक दोनों ओर का अवैध अतिक्रमण हटाया जाए ताकि ऐसी नौबत फिर दुबारा न आए। यह सब बातें समय के साथ प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भूल चुके हैं। यही कारण है कि अब तक नगर पालिका की ओर से नदी, नाले, तालाबों की सफाई के कार्य की कोई कार्ययोजना सामने नहीं आ सकी है।
यह है समस्या की असली जड़

गुनिया नदी का उद्गम स्थल सिंगवासा तालाब है। जो ओवर फ्लो होते ही गुनिया नदी का बहाव तेज कर देता है। मूसलाधार बारिश होने पर गुनिया नदी इतनी तेज गति से बहती है कि बाढ़ जैसे हालात निर्मित हो जाते हैं। इसकी वजह नदी के रास्ते में आने वाला अवैध अतिक्रमण है। नागरिकोंं ने नदी के दोनों ओर पक्के मकान बना लिए है जिससे नदी का बहाव परिवर्तित हो गया है। साथ ही नदी का मार्ग भी बेहद संकरा हो गया है। यही दो कारण शहर मेें बाढ़ के हालात निर्मित कर रहे हैं। इसी तरह की स्थिति पनरिया नदी की है। कई जगह तो इतने ज्यादा कब्जे हो चुके हैं कि नदी का अस्तित्व ही नहीं बचा है।
बारिश के दौरान इन इलाकों में होता है जल भराव शहर में बारिश के दौरान जल भराव होना आम बात है लेकिन यह स्थिति जब जानलेवा साबित हो जाए तो गंभीर चिंता का विषय है। जिसे बीते साल बारिश के दौरान आई बाढ़ में सभी देख चुके हैं। शहर की नानाखेड़ी मंडी के पास स्थित रिलायंस पेट्रोल पर बाढ़ के हालात ऐसे निर्मित हुए थे कि बाइक सवार लोगों की आंखों के सामने ही बह गए थे। अगले दिन जाकर एक युवक की लाश मिली थी। इस इलाके में कई पुल-पुलिया हैं। जो कचरे से इतनी ज्यादा पट चुकी थीं कि बारिश के पानी को निकलने जगह नहीं मिली तो पानी सड़क के ऊपर से बहने लगा। पानी की गहराई इतनी अधिक थी सड़क पर चल रहे व्यक्ति तक पानी में बह रहे थे।
इसके अलावा अत्याधिक जल भराव के हालात न्यू टेकरी रोड की पुलिया, रघुवंशी कालोनी, घोसीपुरा, दुर्गा कॉलोनी, भगत सिंह कालोनी, पनरिया नदी में आए उफान से बूढ़ेबालाजी मार्ग की पुलिया, गुनिया नदी क्षेत्र में पटेल नगर, कालापाठा, घोसीपुरा, बांसखेड़ी, आजाद कालोनी, खैजरा मार्ग, श्रीराम कालोनी आदि क्षेत्र में हर साल बनते हैं।
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इनका कहना

शहर से गुजरी नदी और नालों की सफाई जल्द ही शुरू होगी। फिलहाल टैंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। सफाई के दौरान अतिक्रमण पर भी ध्यान दिया जाएगा ताकि बारिश में पहले जैसी दिक्कत न आए।
बृजभूषण गुप्ता, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी

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