गुना में यह कैसा विकास, 2015 में मंजूर हुई सड़क आज तक नहीं बन पाई

यह कैसा शहर विकास
श्रमिक और बीपीएल कार्ड न बनने से सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित
नागरिक बोलें, आखिर कब तक करते रहें शिकायत
12 कालोनियों वाले शहर के सबसे बड़े वार्ड में सफाई के लिए मात्र 6 कर्मचारी

By: Narendra Kushwah

Published: 30 Jan 2021, 09:14 PM IST

गुना. सरकार शहर के संपूर्ण विकास के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवा रही है। लेकिन नगर पालिका परिषद् इस बजट का उपयोग निष्पक्ष रूप से नहीं कर रही है। यही बजह है कि नगर के वार्ड विकास में भेदभाव नजर आ रहा है। जिन कामों की मंजूरी परिषद् में सालों पहले मिल चुकी है वे आज तक शुरू तक नहीं हो पाए हैं। जिनके अभाव में वार्डवासी हर दिन समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन उनकी सुनवाई आज तक न तो जनप्रतिनिधियों ने की है और न ही अधिकारियों ने। हम बात कर रहे हैं शहर के सबसे बड़े वार्ड क्रमांक एक की। यहां के निवासी न सिर्फ मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित बने हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक क्षेत्रफल व जनसंख्या के हिसाब से वार्ड क्रमांक एक अन्य वार्डों की तुलना में काफी बड़ा वार्ड है। यहां की कुल आबादी 15 हजार के करीब है। जो 12 कॉलोनियों में निवास करती है। इस वार्ड में सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। लेकिन उनके पास न तो मजदूरी कार्ड है और न ही बीपीएल। जिसके कारण वह चाहकर भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन सब परेशानियों के बीच वार्ड में सड़क व नाली न बनने से लोगों की समस्याएं और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि वार्ड क्रमांक एक में 12 कालोनियां हैं, जिनमें सबसे ज्यादा समस्याग्रस्त हाउसिंग बोर्ड कालोनी है। जिसे खुद नगर पालिका ने ही बसाया था। तत्समय प्रशासन ने सस्ती दर पर प्लाट तो बेच दिए लेकिन नागरिकों को जरूरी सुविधाएं देना भूल गया। वर्ष 2015 में इसी कालोनी में सड़क व नाली निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की मंजूरी परिषद् में मिली लेकिन टैंडर प्रक्रिया राजनीति में उलझ गई। नतीजतन आज भी यहां के लोग सड़क, नाली से वंचित बने हुए हैं।
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कॉलोनी 12, सफाईकर्मी मात्र 6
क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े वार्ड क्रमांक एक में सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका ने मात्र 6 कर्मचारी ही उपलब्ध कराए हैैं। जबकि इससे पहले यहां 3 ही सफाईकर्मी थे। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि इस वार्ड में सफाई के क्या हालात होते होंगे। वार्ड वासियों ने बताया कि महीने में एक दो बार ही यहां सफाईकर्मी आते हैं। जो मुख्य मार्ग पर झाडू लगाकर कचरा एकत्रित कर आग लगाकर नष्ट कर देते हैं। सफाई की मॉनीटरिंग करने भी कोई नहीं आता, जिससे वह शिकायत कर सकें। चिंताजनक बात तो यह है कि यहां रहने वाले कई लोगों के पास तो शौचालय तक नहीं है। जो रात के अंधेरे में खुले में शौच जाते हैं। जिसके कारण आसपास रहने वाले अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस इलाके में ज्यादातर लोग मजदूर वर्ग के निवास करते हैं इसलिए उनकी समस्याओं को अधिकारी गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही बजह है कि बीते दो साल के दौरान नागरिकों ने कई जनप्रतिनिधियों से लेकर आला अधिकारियों को लिखित शिकायत की लेकिन आज तक समस्या का निराकरण नहीं हो सका है।
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अधिकारी कर रहे भेदभाव
ऐसी कोई समस्या नहीं है जो वार्ड क्रमांक एक में न हो। वार्ड की सभी गलियों में न तो सड़क है और नालियां। जिससे आम रास्ते में गंदा पानी भर जाता है। सफाई के हालात भी बेहद खराब हैं। कई बार वे वार्डवासियों को लेकर जनसुनवाई में शिकायत कर चुके हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सुधीर, वार्डवासी
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जल निकासी न होने से वार्ड के हालात बहुत खराब हैैं। आवासीय कालोनी में तो यह स्थिति है कि लोगों के घरों के सामने गंदा पानी जमा हो रहा है। जिससे एक दूसरे के बीच आए दिन विवाद हो रहे हैं। कई नागरिक तो समस्याओं से परेशान होकर मकान बेचने तक को विवश हो रहे हैं।
अशोक, वार्डवासी
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इनका कहना
वार्ड एक क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से काफी बड़ा वार्ड है। यहां सफाई के लिए मात्र 6 ही कर्मचारी दिए गए हैं। जिससे सफाई ठीक से नहीं हो पाती। हाउससिंग बोर्ड कालोनी में सड़क, नाली की समस्या है। जिसके निर्माण की मंजूरी 2015 में परिषद् में मिल गई थी लेकिन टैंडर न होने से निर्माण शुरू नहीं हो सका। वार्डवासियों की समस्याओं को लेकर वह अधिकारियों को कई बार अवगत करा चुकी हैं।
प्रसन्ना यादव, निवर्तमान पार्षद
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फैक्ट फाइल
कुल आबादी : 15 हजार
कुल कालोनी : 12
कुल सफाईकर्मी : 06

Narendra Kushwah Reporting
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