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रेडिएशन का खतरा- मोबाइल टावर नजदीक होने से होती है ये बीमारियां

शहर की हर गली मोहल्ले से लेकर घनी बस्तियों में बहुमंजिला इमारतों से लेकर स्कूल की छतों पर भी मोबाइल टावर लग चुके हैं। इन मोबाइल टॉवरों को लेकर लोगों को डर है.

गुना

Updated: May 11, 2022 10:26:03 pm

गुना. सरकार ने भले ही मोबाइल टावर लगाने के लिए नियम कानून बना दिए हैं, लेकिन इसका पालन कराने के प्रति प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। नतीजतन शहर की हर गली मोहल्ले से लेकर घनी बस्तियों में बहुमंजिला इमारतों से लेकर स्कूल की छतों पर भी मोबाइल टावर लग चुके हैं। इन मोबाइल टॉवरों को लेकर लोगों को डर है कि कहीं बीमारी के शिकार न हो जाएं, इससे डर कर लोग शिकायत भी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन के अधिकारी लोगों की शिकायत सुनने को तैयार नहीं हैं। इससे लगता है कि प्रशासन को मोबाइल टॉवर से होने वाली बीमारियों के लोगों को शिकायत होने का बेसब्री से इंतजार है।
रेडिएशन का खतरा- मोबाइल टावर नजदीक होने से होती है ये बीमारियां
रेडिएशन का खतरा- मोबाइल टावर नजदीक होने से होती है ये बीमारियां
टॉवर लगाने के लिए घनी आबादी को भी नहीं छोड़ा: मोबाइल टावर लगाने के लिए निर्धारित गाइड लाइन की सबसे पहली शर्त है कि किसी भी घनी बस्ती में मोबाइल टावर नहीं लगाया जा सकता। क्योंकि इससे न सिर्फ लोगों को रेडियशन का खतरा है बल्कि आंधी तूफान के दौरान टावर गिरने से ज्यादा क्षति होगी। लेकिन इस नियम को दरकिनार कर नगरीय इलाके करीब आधा सैकड़ा टावर लगे हुए हैं।
इन क्षेत्रों में लगे हैं टावर: श्रीराम कालोनी, सिसोदिया, दुर्गा कॉलोनी, कर्नलगंज, लूशन का बगीचा, कैंट क्षेत्र, गुलाबगंज, नानाखेड़ी, राधा कालोनी, मु य बाजार, रसीद कॉलोनी सहित कई घनी बस्तियों में नियम विरुद्ध टावर लगे हुए हैं। जबकि इन इलाकों में कई स्कूल भी मौजूद हैं। गौर करने वाली बात है कि रेडिशन का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों को रहता है।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स हैं खतरनाक: मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती हैं। इस रेडिएशन से इंसान ही नहीं जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की सं या अधिक होती है, वहां पक्षियों की सं या कम हो जाती है। ग्रामीण अंचल में इसी वजह से मधुमक्खियों की सं या कम हो गई हैं।
किस एरिया में नुकसान सबसे ज्यादा: एक्सपर्ट की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटीना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि घर, टावर पर लगे एंटीना के सामने है या पीछे। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा एंटीना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।
इन बीमारियों का जनक है रेडिएशन: थकान, अनिद्रा, डिप्रेशन, ध्यान भंग, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, याद्दाश्त कमजोर होना, सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ता, पाचन क्रिया पर असर, कैंसर का खतरा बढऩा, ब्रेन ट्यूमर आदि।

मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन से पांच मीटर की ऊंचाईं तक बेस का निर्माण करना जरूरी है। आबादी वाले इलाके से टावर की दूरी कम से कम 35 मीटर अनिवार्य है। एंटीना की सं या के आधार पर दूरी का निर्धारण किया गया है।
यह बोले जिम्मेदार

नगरपालिका के एक जिम्मेदार अफसर का इस पूरे मामले में कहना था कि नगरीय इलाके में मोबाइल टावर लगाने की परमिशन नपा ही देती है। हम शासन से निर्धारित गाइड लाइन का भौतिक सत्यापन करते हैं। जहां तक रिहायशी इलाकों में नियम विरुद्ध टावर लगाने का सवाल है तो शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई कर रहे हैं। हाल ही में हमने रसीद कालोनी में टावर निर्माण रुकवाया है।
● छतों पर सिर्फ एक एंटीना वाला टावर ही लग सकता है।

● पांच मीटर से कम चौड़ी गलियों में टावर नहीं लगेगा।

● टावर पर लगे एंटीना के सामने 20 मीटर तक कोई घर नहीं होगा।
● टावर घनी आबादी से दूर होना चाहिए।

● जिस जगह पर टावर लगाया जाता है, वह प्लाट खाली होना चाहिए। उससे निकलने वाली रेडिएशन की रेंज कम होनी चाहिए।

●कम आबादी में जिस बिल्डिंग पर टावर लगाया जाता है, वह कम से कम पांच-छह मंजिला होनी चाहिए।
● टावर के लिए रखा गया जेनरेटर बंद बॉडी का होना चाहिए, जिससे कि शोर न हो।

● जिस बिल्डिंग की छत पर टावर लगाया जाता है, वह कंडम नहीं होनी चाहिए।

● दो एंटीना वाले टावर के सामने घर की दूरी 35 और बारह एंटीना वाले की 75 मीटर जरूरी है।

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