scriptThis is the development of Guna: The people of four villages are cravi | ये है गुना का विकास:आजादी के बाद से अभी तक विकास को तरस रही चार गांव की जनता | Patrika News

ये है गुना का विकास:आजादी के बाद से अभी तक विकास को तरस रही चार गांव की जनता

आदिवासियों के उत्थान के यहां झूठलाते हैं दावे
-नाले के पानी पीकर बुझाते हैं अपनी प्यास, गांव में न सड़क है और न स्कूल,मधुसूदनगढ़ के चार गांव के हाल

गुना

Published: November 08, 2021 01:37:14 pm

गुना। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि हर गांव में स्कूल हो, सड़क हो, लेकिन आदिवासियों के विकास के दावे गुना जिले की नवगठित तहसील मधुसूदनगढ़ के भील-आदिवासी बाहुल्य चार गांवों के लोग झुठलाते हैं। आजादी के बाद से अभी तक न तो इन चार गांवों में आने-जाने के लिए सड़क बन पाई और न ही पीने के पानी का समुचित इंतजाम हो पाया। आज भी वहां के लोग ऊबड़-खाबड़ रास्ते से निकलने और नाले के पानी पीने को मजबूर है। इन गांवों में स्कूल न होने से यहां के बच्चे पढ़ नहीं पाए। खास बात ये है कि इन गांवों की और न तो अभी तक भाजपा सरकार के किसी जनप्रतिनिधि की नजर गई और न ही किसी अधिकारी की।
मधुसूदनगढ़ से २३ किलोमीटर दूर सागौड़ी गांव, पीपल पानी मजरा, रामटेक गांव, रामटेक कोटरा गांव हैं, इन गांवों में लगभग दो हजार मतदाताओं की संख्या है। इन गांवों में अधिकतर भील-आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं। जिनके उत्थान के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं के नाम पर गुना में संबंधित विभाग हर वर्ष लाखों रुपए के बारे-न्यारे कर रहा है। जबकि इन गांवों में विकास की तस्वीर कहीं भी नजर आती है। विकास का ढिंढोरा पीटकर वाहवाही लूटने वाले अधिकारियों की पोल यहां के लोग यह खोलकर खोलते हैं कि यहां के लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ तक नहीं मिलता है।
ये हाल है गांवों के
पत्रिका टीम ने जब इन गांवों की वस्तु स्थिति जानी तो यहां के लोग नरकीय जीवन व्यतीत करते नजर आए।यहां के लोगों ने बताया कि गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसको अस्पताल पहुंचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। सड़क तो दूर गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। पथरीली-ऊबड़-खाबड़ रास्ते से मोटर साइकिल के जरिए जामनेर ओर लटेरी केे अस्पताल जाना पड़ता है। बारिश में तो बीमार व्यक्ति को अस्पताल नहीं ले जा पाते, इलाज के अभाव में कई लोगों की जानें चली जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इन चार गांवों का दुर्भाग्य है कि इनमें से एक में भी सरकारी स्कूल तक नहीं हैं। प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए शिक्षा और स्वास्थ्य पर हर वर्ष खर्च कर रही है। इस सबके बाद भी यहां के बच्चे शिक्षा तक से वंचित हैं।
पानी का ये हाल
ग्रामीणों के अनुसार इन चार गांवों की जनता के लिए एक मात्र हैण्डपम्प है। रामटेकरी गांव के लोग बताते हैं यहां से एक नाला निकला हुआ है, उसको रोका हुआ है, उस नाले का पानी आधे से एक किलोमीटर दूर पैदल चलकर महिलाएं भरकर ले जाती हैं, जिसको पीकर यहां के लोग अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
आंगनबाड़ी तक का अभाव
मधुसूदनगढ़ तहसील के इन चारों गांवों में विकास का हाल ये है कि यहां स्कूलों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केेन्द्र तक नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का तो लंबे समय से टोटा बना हुआ है। आंगनबाड़ी केन्द्र न होने यहां के बच्चों का जीवन बर्बाद हो रहा है।
न मिलते मोबाइल नेटवर्क
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के बारे में बताया कि चुनाव के समय केवल हम लोगों की याद आती है, बाकी दिनों तो यहां न कोई जनप्रतिनिधि हमारी सुध लेने आता है और न ही कोई अधिकारी। यहां के लोगों ने बताया कि इन चार गांवों में कहीं भी मोबाइल नेटवर्क तक नहीं हैं, जिससे हम अपने ही लोगों से बात तक नहीं कर पाते हैं। इस संबंध में जब एसडीएम से मोबाइल पर सम्पर्क साधा गया तो उनका मोबाइल आउट ऑफ कवरेज एरिया आता रहा।
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