जून से लेकर दिसम्बर तक इस साल विवाह के कुल 27 ही शुभ मुहूर्त बचे

जून और जुलाई में शादी के 12 मुुहूर्त
18 जुलाई को शादियां ही शादियां, बीस से चार महीनों के लिए शुभ कार्यों पर

By: praveen mishra

Published: 27 Jun 2021, 11:09 AM IST

गुना। कोरोना कफ्र्यू खत्म हो गया है। शादियों का सीजन चल रहा है। जून और जुलाई में शादी के 12 मुुहूर्त हैं, बीस जुलाई से भगवन विष्णु निद्रा योग में चले जाएंगे, जिससे शुभ कार्य 14 नवम्बर तक के लिए रुक जाएंगे। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरूआत हो जाएगी। चातुर्मास की वजह से जून और जुलाई में कुछ मुहुर्त बचे हैं।वहीं भड़ली नवमी पर अबुझ मुहूर्त होने के लिए चार शुभ मुहूर्त हैं। वहीं बीस जुलाई से अगले चार महीने तक विवाह के मुहूर्त नहीं रहेंगे। फिर नवम्बर तक शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी।
शादियों का अप्रैल, मई, जून में कई मुहूर्त थे, इन दिनों कोरोना कफ्र्यू लागू होने से शादियों पर बंदिशें लगी रहीं। शादियों पर से अभी भी पूरी तरह बेन नहीं हटाया है। भड़ली नवमी 18 जुलाई को है। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को अबूझ मुहूर्त मानकर इस तिथि पर अधिक से अधिक शादियां की जाती हैं। अप्रैल,मई में कैंसिल हुई शादियां इस दिन बड़े स्तर पर होने की तैयारियां चल रही हैं। इसके बाद अगला अबूझ मुहूर्त देवउठनी एकादशी पर रहेगा। देव उठनी एकादशी 14 नवम्बर को है। यानि 4 महीने के बाद इसी दिन से शुभ कार्य प्रारंभ होंगे। इस तरह 27 जून से लेकर दिसम्बर तक इस साल विवाह के कुल 27 ही शुभ मुहूर्त बचे हैं।
श्री हरि बीस जुलाई से योग निद्रा में चले जाएंगे, जिससे देव शयन शुरू हो जाएगा जो कि 14 नवम्बर तक रहेगा। इन चार महीनों के दौरान सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। इसके बाद 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच में सूर्य दव के धनु राशि में आने के कारण धनु मास का प्रारंभ होगा। इस 1 महीने में भी कोई शुभ काम नहीं होंगे। इस तरह जून से दिसंबर तक इस साल विवाह के कुल 27 ही शुभ मुहूर्त शेष हैं।
शुरू होगा देवशयन
ज्योतिषाचार्य के अनुसार बीस जुलाई से श्री हरि योग निद्रा में चले जाएंगे, जिससे देव शयन शुरू हो जाएगा जो कि 14 नवम्बर तक रहेगा। इन चार महीनों के दौरान सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इसके बाद 15 दिसंबर से 15 जनवरी 2022 के बीच में सूर्य देव के धनु राशि में आने के कारण धनु मास का प्रारंभ होगा।इस एक महीने में भी कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। इस तरह जून से लेकर दिसम्बर तक इस साल विवाह के कुल 27 ही शुभ मुहूर्त बचे हैं।
विवाह की शुभता के लिए ये है आवश्यक
विवाह के शुभ योग के लिए गुरु, शुक्र, और सूर्य ग्रह का शुभ होना आवश्यक है। वहीं बृहस्पति और सूर्य का या रवि गुरु योग कहलाता है, जो विवाह के लिए शुभ माना जाता है। विवाह के लिए माघ, फाल्गुन, बैशाख, जेठ, आषाढ़, और अगहन मास को शुभ माना जाता है। इसी तरह विवाह के लग्न और मुहूर्त के लिए वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, धनु, और मीन, लग्न में से किसी एक लग्न का होना भी आवश्यक है। विवाह की शुभता के लिए अश्वनी, रेवती, रोहणी, मृगशिरा, मूल, माघा, चित्रा, स्वाति आदि में से कोई भी एक नक्षत्र होना चाहिए।
शुभ मुहूर्त के लिए ग्रह दशा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार शुभ मुहूर्त के लिए ग्रह दशाओं का ठीक होना जरूरी है। अगर ग्रह दशा ठीक ना हो तो भूलकर भी मांगलिक कार्य नहीं कराना चाहिए। देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी के बीच के दिनो में सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माने गए हैं। यदि इस अवधि के दौरान कोई मांगलिक कार्य करने की विवशता हो तो किसी वैदिक विद्धान के परामर्श के दौरान यज्ञ, हवन, पूजा, पाठ, मंत्र, जाप, दान आदि करवाकर ग्रहों की स्थिति को दूर करवाना चाहिए।

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