45 हजार को मिले सिलेंडर, फिर भी धुएं से नहीं राहत

45 हजार को मिले सिलेंडर, फिर भी धुएं से नहीं राहत
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उज्ज्वला योजना: 20 फीसदी हितग्राही भी दोबारा रिफिल कराने नहीं पहुंचे।

गुना  प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का लाभ जिले के 45,600 जरूरतमंद महिलाओं ने लिया है। इसके बाद भी गांव में महिलाएं खाना पकाने के लिए लकड़ी और कंडे उपयोग कर रही हैं। इससे उनको धुएं से राहत नहीं मिल सकी है। 

इतना ही नहीं मिट्टी तेल से लेकर सिगड़ी, स्टोव का भी उपयोग करने मजबूर हैं।ग्रामीण क्षेत्र में यह स्थिति है कि वहां सहरिया और आदिवासी जाति की महिलाएं जंगल में लकड़ी काटने को मजबूर हैं। हालात ये हो गए हैं हितग्राहियों के घरों में गैस सिलेंडर और चूल्हे कोने में पड़े हैं। 3500 से ज्यादा महिलाएं अभी भी कनेक्शन के लिए चक्कर काट रही हैं।



गु ना जिले में जून 2017 तक 48 हजार महिलाओं को उज्ज्वला का लाभ देना है, अब तक 45600 को बांट चुके हैं। 3500 से ज्यादा आवेदक योजना में पात्र हैं, लेकिन उनको गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। इस कारण अभी भी गांवों में महिलाएं धुएं में खाना पकाने मजबूर हैं।

पैसे नहीं कैसे भराएं गैस के सिलेंडर
जिन हितग्राहियों को योजना का लाभ मिला, उनको केरोसिन मिलना बंद हो गया और गैस सिलेंडर भराने में 840 रुपए लग रहे हैं। इस कारण कई लोग सिलेंडर भराने गैस एजेंसियों पर नहीं पहुंच रहे हैं। उधर, मिट्टी तेल बंद होने से उनकी दिक्कतें शुरू हो गई। डेढ़ माह बाद बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा, गीले कंडा और लकड़ी को जलाने में फिर से धुएं से सामना करना पड़ सकता है। 



कनेक्शन ने दिलाई धुआं से राहत
प्रधानमंत्री की उज्जवला योजना की तारीफ करते जामनेर की मनकुंवर बाई नहीं थकती हैं। वे कहती हैं कि गैस से पहले जिन्हें जलाऊ लकड़ी नहीं मिल पाती थी। आज उनके यहां गैस कनेक्शन है तो धुएं की घुटन और बारिश में चूल्हा जलाने की दिक्कत से मुक्ति मिल गई है। आरोन की कलावती बताती हैं कि शासन की इस योजना से हमें  काफी मदद मिली। कनेक्शन मिल जाने से मेरी कई परेशानियां खत्म हो गईं।

2016 में शुरू हुई थी योजना
जिले में उज्जवला योजना 2016 में शुरू हुई थी। दिसंबर 2016 तक 30 हजार का टारगेट आसानी से पूरा कर लिया था। इसके लिए एक लाख 17 हजार परिवारों की सूची गैस एजेंसियों के पास पहुंची थी।

 अब तक 45600 हितग्राहियों को सिलेंडर दे चुके हैं। 48 हजार जून तक देना है। 49 हजार आवेदन आए हैं। 3500 आवेदकों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनके नाम पहले से कनेक्शन है, इस कारण उनको नहीं मिल पा रहा है। जिले में एक लाख 17 हजार परिवारों को गैस कनेक्शन देना है।
- सीएस जादौन,  जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी गुना

सिलेंडर लिया, रिफिल कराने में नहीं रुचि
गुना जिले में दिसंबर 16 तक 30 हजार से ज्यादा परिवारों को मुफ्त में गैस कनेक्शन दे दिया, लेकिन उनमें से 20 फीसदी लोग भी रिफिल कराने नहीं पहुंचे। गांवों में महिलाओं को अभी भी धुएं से राहत नहीं मिल सकी है। कोई आंसू बहाकर खाना पकाने मजबूर है तो कोई मिट्टी तेल से चूल्हा सुलगाती है। 



चक्कर लगाते-लगाते थक गई
उज्जवला योजना गुना में फैल होने का नमूना ये है कि 3500 से अधिक ऐसे लोग हैं, जिनको पात्र होने के बाद भी गैस का लाभ नहीं मिल पा रहा है। झागर में रहने वाली रचना बताती है कि उसके पास खेती की जमीन तक नहीं है, कच्चे मकान में रह रही है। इसके बाद भी उसको गैस कनेक्शन तक नहीं मिला। वह कहती है कि अभी भी उसे चूल्हे में लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है। धुएं से वह परेशान है, मगर उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसी रामकली नहीं बजरंग गढ़ की पार्वती भी शामिल है। वह भी गैस कनेक्शन के लिए कई चक्कर लगा चुकी हंै।


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