जो 20 भुजाएं गिन ले, उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं

नवरात्रि विशेष : देवी की महिमा
- जो 20 भुजाएं गिन ले, उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं
- जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है बीस भुजा देवी का दरबार
- पुजारी बोले, आज तक कोई नहीं गिन सका 20 भुजाएं

By: Narendra Kushwah

Published: 08 Oct 2021, 12:25 PM IST

गुना. आपने अभी तक देवी मां के कई रूपों के बारे में सुना होगा। कई मंदिरों में अलग-अलग रूपों के दर्शन भी किए होंगे लेकिन क्या आपने एक ही प्रतिमा में मां को रूप बदलते देखा हैं। जीं हां, ऐसा ही चमत्कारित मंदिर है बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर बीस भुजादेवी का। जहां दिन के तीन पहर में मां तीन रूपों में दर्शन देती हैं। यहां गुरुवार से नौ दिन तक विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। साथ ही दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर बीस भुजा देवी का दरबार है। जिसके बारे में कहा जाता है कि मां बीसभुजा भक्तों को तीन रूप में दर्शन देती हैं। सुबह कन्या, दोपहर में युवा और संध्या के समय प्रौढ़ (वृद्धा) के रूप में नजर आती हैं। ऐसी मान्यता है कि माँ की बीस भुजा हैं। मां बीसभुजा की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा की आज तक कोई पूरी 20 भुजा नहीं गिन सका है।
जिस भक्त पर माँ की कृपा होती है, उसी को बीसों भुजा गिनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र में पडऩे वाले दुर्गा अष्टमी के दौरान इस मंदिर में परंपरागत धार्मिक संस्कार और मेले का आयोजन किया जाता है। लेकिन बीते बीते दो साल से कोविड संकट के चलते ऐसा नहीं हो सका है। मंदिर परिसर में लगने वाला यह मेला 9 दिन तक चलता है। इतना ही नहीं, साल के इस समय में यहां विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन भी किया जाता है। दुर्गा अष्टमी के मौके पर आयोजित होने वाले इस मेले के दौरान यहां आने वालों की संख्या में काफी इजाफा हो जाता है।
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इतिहास : मां बीसभुजा देवी मंदिर अति प्राचीन हैं। बताते हैं कि मंदिर की किसी ने स्थापना नहीं की, बल्कि सैकड़ों वर्ष पहले बांस के वृक्षों से देवी की प्रतिमा प्रकट हुई। मंदिर में दुर्गा की 20 हाथों वाली प्रतिमा स्थापित है। यहां तीन विशाल दीप स्तंभ है, जिन पर नवरात्रियों के समय सैकड़ों दीपक जलाए जाते हैं। दूर से यह 'दीप स्तंभÓ बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं। मंदिर के चारो ओर छोटी-छोटी और भी पहाडिय़ा है जिससे यह स्थान बारिश के मौसम में बेहद खूबसूरत लगने लगता है, मंदिर के थोड़ी ही दूर से गुजरती हुई नदी इस स्थल को और भी सुन्दर बना देती है। पहले माँ बीस भुजा देवी एक छोटे से मंदिर में स्थापित थी। धीरे-धीरे जीर्णोद्वार करते हुए भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।
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प्रसिद्घि : मंदिर पर सिर्फ नवदुर्गा के समय ही नहीं, बल्कि अन्य दिनों में भी भक्तों की भीड़ रहती है। शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र में पडऩे वाले दुर्गा अष्टमी के दौरान इस मंदिर में परंपरागत धार्मिक संस्कार और मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।
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मान्यता : ऐसी मान्यता है कि मां बीसभुजा की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा की हर कोई भुजाएं नहीं गिन पाता है। जिस भक्त पर माँ की कृपा होती है, उसे ही बीस भुजाएं गिनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि मां बीसभुजा भक्तों को तीन रूप में दर्शन देती हैं।
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खास बात : मंदिर के आसपास कुछ साल पहले तक घनघोर जंगल था। ऐसे में यहां माता के नियमित दर्शन के लिए शेर भी आते थे। मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों ने कुछ साल पहले तक भी परिसर में शेर के पंजे देखे हैं।

Narendra Kushwah Reporting
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