क्या किला ढहा पाएगी भाजपा

क्या किला ढहा पाएगी भाजपा

chandan singh rajput | Publish: Sep, 06 2018 11:44:01 PM (IST) Guna, Madhya Pradesh, India

राघौगढ़. प्रदेश की राघौगढ़ विस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह परिवार का वर्चस्व रहा है और वे खुद ४ बार विधायक रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी हराया।

गुना/राघौगढ़. प्रदेश की राघौगढ़ विस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह परिवार का वर्चस्व रहा है और वे खुद ४ बार विधायक रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी हराया। कांग्रेस की सबसे मजबूत सीट पर वर्ष २०१३ में उनके पुत्र जयवर्धन रिकार्ड मतों से विजयी हुए और वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसके चलते कांग्रेस की ओर से उनकी दावेदारी सबसे मजबूत है। उनके अलावा भी कांग्रेस के दूसरे नेता भी सक्रिय हैं।
बीजेपी की ओर से राधेश्याम धाकड़ क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके अलावा भाजपा नेता संजीव सोनी और हल्के रघुवंशी भी दावेदारी जता रहे हैं। वर्ष 2013 के चुनाव में कई कांग्रेस के गढ़ ढह गए, लेकिन पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने भाजपा उम्मीदवार राधेश्याम धाकड़ को 58204 मतों के अंतर से हराया था। इसके पूर्व 1990 और 1993 के चुनाव में दिग्विजय सिंह के अग्रज लक्ष्मण सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार रणछोडदास कासट और रामप्रसाद शिवहरे को पराजित किया।

1985 के चुनाव में मूल सिंह ने भाजपा उम्मीदवार चंचल कुमार जैन एवं 2008 के चुनाव में भूपेंद्र सिंह रघुवंशी को हराया। राघौगढ़ विधान सभा ऐसी सीट बताई जाती है जो आजादी के बाद से किले की बिना मर्जी के कोई भी प्रत्याशी नहीं जीत पाया। 1977 में जेपी आंदोलन की लहर में दिग्विजय सिंह ने दिनेशचंद्र शर्मा को 2500 मतों से हराया था।

किस-किस की दावेदारी
दावेदार पार्टी इस आधार पर दावेदारी
राघेश्याम धाकड़ भाजपा पूर्व प्रत्याशी, क्षेत्र से परिचित, देवेंद्र सिंह रघुवंशी भाजपा किसान नेता, आरोन में पकड़, संजीव सोनी भाजपा पूर्व नप अध्यक्ष के पति, जयवर्धन सिंह कांग्रेस विधायक, युवाओं व क्षेत्र में लोकप्रिय, बृजेंद्र सिकरवार कांग्रेस युवा नेता, वर्तमान में पार्षद
मिंटूलाल जैन कांग्रेस व्यापारी वर्ग एवं जैन समाज में पकड़, एड. राजेश धाकड़ बसपा वकील एवं ग्रामीण क्षेत्र में पकड़, रूप सिंह धाकड़ आप किसानों और श्रमिकों के बीच सक्रिय

 

मुद्दे जो चर्चा मेंं हैं

पगारा के पास टोल नाका बना है, नपा क्षेत्र में जाने पर राघौगढ़ के लोगों को टोल देना पड़ता।, नपा क्षेत्र में जो गांव शामिल हैं, उनका विकास नहीं हो पाया है, इससे ग्रामीण परेशान हैं।
किसानों को गन्ना का बकाया का भुगतान नहीं हो पाया।
रोजगार के लिए कोई संसाधन न होना, फैक्ट्री की मांग कर रहे हैं।

बदलते समीकरण
विधायक जयवर्धन ने पहली बार खुद के बूते पर राघौगढ़ नपा चुनाव संभाला और परिषद पर कब्जा किया। जिससे उनका कद और बढ़ गया है।
नपा में कांग्रेस का कब्जा होने के बावजूद विकास में पिछडऩे से लोगों में नाराजगी दिख रही है। इसका लाभ भाजपाई उठा सकते हैं। पार्टी को यहां कद्दावर नेता चाहिए।

चुनौतियां बड़ी पार्टियों की
भाजपा के लिए सबसी बड़ी चुनौती जीत के अंतर को पाटना और अपनी जीत सुनिश्चित करने क्षेत्र में पकड़ मजबूत बनाना। उधर, कांग्रेस को जीत बरकरार रखना, किसानों को गन्ना भुगतान न हो पाने से उनकी नाराजगी को संभालना।

पिछले चुनाव में कितने थे दावेदार
पिछले चुनावों में दावेदारी करने वाले इस बार सक्रिय कम नजर आ रहे
&लोगों को एक वार्ड से दूसरे में जाने पर टोल देना पड़ता है, इसका निराकरण नहीं हो पाया।- सत्यनारायण, किसान
&सड़कों का निर्माण नहीं हुआ, चोरी की वारदातें लगातार हो रही है, इस पर अंकुश लगे।- अंकित जैन, व्यापारी
&धरनावदा क्षेत्र में विधायक की सक्रियता कम है, क्षेत्र विकास से पिछड़ रहा है, रोजगार नहीं है।- नरेंद्र जैन, व्यापारी
&नपा क्षेत्र में सफाई और विकास का टोटा है, कांग्रेस का विधायक और नपा होने पर भी विकास नहीं हुआ। - बंकेश धाकड़, युवा

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