लॉक डाउन के बाद मजदूरी न मिलने से लौटने लगे मजदूर वापस अपने गांव

गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से लौटने वाले बोले बाबूजी कब तक मरते भूखे

By: praveen mishra

Published: 12 Apr 2021, 12:22 AM IST

गुना। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से गुना वासी ही नहीं प्रदेश व देश के लोग चिंतित हैं। कोरोना से लगे लॉक डाउन से उन परिवारों को संकट में डाल दिया है, जो प्रतिदिन मजदूरी करके अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। ऐसे परिवार लॉक डाउन लगने से मजदूरी न मिलने पर कहीं भूखमरी के शिकार न हो जाएं, इसको देखते हुए वे वापस अपने गांव वापस लौटने लगे हैं। इनके चेहरों पर तनाव की लकीरें दिखाई दे रही थीं। ऐसे लोग साबरमती एक्सप्रेस, राजस्थान से आने वाली बसों के जरिए और हाईवे से टैक्सी और अपने निजी वाहनों से वापस अपने घर को लौट रहे हैं। उनमें से मांगीलाल का कहना था कि मजदूरी नहीं मिल रही कब तक वहां रहते। अब अपने गांव में ही कर लेंगे मजदूरी, मगर वापस नहीं जाएंगे अहमदाबाद।


पत्रिका टीम ने रविवार को रेलवे स्टेशन, आरोन और धरनावदा बस स्टैण्ड व हाईवे पर जाकर अलग-अलग समय पर भ्रमण जाकर वस्तु स्थिति देखी जो बयां की।
स्थान: रेलवे स्टेशन गुना
समय: दोपहर 12.45 बजे
दृश्य- गुजरात प्रांत के अहमदाबाद से बनारस चलने वाली साबरमती एक्सप्रेस जैसे ही गुना रेलवे स्टेशन पर रुकती है। इस ट्रेन का हर कोच पूरी तरह भरा हुआ था। यहां तक कि गेट पर भी यात्री बैठे हुए थे। कई यात्री पानी के लिए रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नम्बर एक पर उतरे, यहां पुलिस दिखाई नहीं दी। जब हमने इस ट्रेन में सवार बीस से अधिक लोगों से बातचीत की, तो उन्होंने अपनी पीड़ा यूं बताई। बिहार जा रहे अवधलाल, मंशा, जूली, रमना जैसे कई लोगों ने बताया कि वे अहमदाबाद में मजदूरी करते हैं। हम दीपावली पर अपने गांव आ गए थे, जनवरी माह में हम मजदूरी करने पुन: गए थे, एक महीने से कोरोना वहां ऐसा फैला कि लॉक डाउन होने लगा। हमें अहमदाबाद में मजदूरी मिलना बंद हो गई, लॉक डाउन खुलता और बंद होता रहा। जब हमारे सामने आर्थिक संकट छाया तो हमने अपने गांव वापस लौटने का फैसला किया और परिवार सहित वापस अपने गांव जा रहे हैं।उन्होंने अपने आपको समस्तीपुर, दरभंगा, सिवान के गांव में रहने वाले बताए। उनका कहना था कि इस साबरमती एक्सप्रेस में पांच सौ लोग हैं जो अहमदाबाद से मजदूरी छोड़कर अपने गांव जा रहे हैं। मंशा के अपनी पीड़ा सुनाते हुए आंसू निकल आए और बोला कि बाबूजी अब हम कभी नहीं जाएंगे अहमदाबाद मजदूरी करने, अपने ही गांव में करेंगे छोटो-मोटो काम।


स्थान: गुना हाईवे
समय: दोपहर डेढ़ बजे
दृश्य- गुना हाईवे पर जब पत्रिका टीम पहुंची तो वहां दोपहर के समय ट्रकों के अलावा निजी वाहन वाले वाहन भी काफी संख्या में चलते हुए दिखाई दिए। अपने निजी वाहन से पुणे महाराष्ट्र से लौटने वाले ग्वालियर के एक पचौरी परिवार ने बताया कि कोरोना की वजह से महाराष्ट्र में तो बहुत खराब स्थिति है। वहां तो हजारों की संख्या में कोरोना के मरीज निकल रहे हैं। लॉक डाउन लगने से काम सारा ठप हो गया है, स्कूल-कॉलेज बंद हो गए हैं। मजदूर भी वापस लौट रहे हैं।काम बंद होने से हम भी वापस अपने घर ग्वालियर जा रहे हैं। इसी बीच एक ऑटो में बैठा परिवार जो महाराष्ट्र से चलकर झांसी जा रहा था, उसको रोककर पूछा तो उसने बताया कि महाराष्ट्र में हम मजदूरी करते हैं, मजदूरी न मिलने से हमारी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी, दुगुने किराए पर ऑटो करके अपने गांव लौट रहे हैं। ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं मिल रहा था। गुना हाईवे पर खाने का होटल चलाने वाले ने बताया कि दिन में तो लोग कम निकलते हैं, रात के समय ऑटो, अपने निजी वाहनों व टैक्सियों से लोग वापस लौटते समय यहां खाना खाने या चाय पीने के लिए रुकते हैं। महाराष्ट्र से लौटने वाले कहते हैं कि कोरोना का महाराष्ट्र में इलाज भी सही नहीं हो रहा है। एक घंटे में लगभग पन्द्रह से बीस वाहन महाराष्ट्र से लौटकर ग्वालियर की और जाते हुए दिखाई दिए।
स्थान: पार्वती नदी धरनावदा
समय: दोपहर साढ़े तीन बजे
दृश्य- मप्र और राजस्थान सीमा पर पार्वती नदी है, इस नदी के एक तरफ राजस्थान का छबड़ा जिले का बापचा पुलिस थाना है तो दूसरी तरफ धरनावदा थाना जिला गुना है।पत्रिका टीम जब पार्वती नदी पर पहुंची तो वहां पूर्व में रहे कोरोना संक्रमण काल में यहां अस्थाई चेक पोस्ट बनाया गया था, वो नजर नहीं आया, जबकि दूसरी तरफ राजस्थान की सीमा पर चेक पोस्ट बनाया गया था, जहां राजस्थान के बापचा पुलिस थाने के पुलिस कर्मी मौजूद थे, जो वहां से निकलने वाले वाहनों और लोगों से पूछताछ कर रहे थे। इससे पहले पडऩे वाले रेलवे के पार्वती पुल से लोग राजस्थान से मप्र की सीमा में बेधड़क जाते हुए दिखाई दिए। उनसे जब पूछा गया तो उनका कहना था कि आज के दिन मोतीपुरा में बड़ी हाट लगती है, वहां खरीदारी करने जा रहे हैं। जब हमने मोतीपुरा जाकर देखा तो हाट में काफी संख्या में लोग नजर आए। मप्र से राजस्थान और राजस्थान से मप्र आने वालों से धरनावदा पुलिस थाने में कोई पूछताछ करने वाला तक नहीं था। कुछ ही देर में राजस्थान के कोटा की ओर से आने वाली बस देखी तो वह खचाखच भरी हुई थी, जिसमें सबसे अधिक मजदूर वर्ग था। जब दो-तीन बस यात्रियों से पूछा गया तो उनका कहना था कि राजस्थान में भी लॉक डाउन लग गया है हम अपने घर आरोन में पड़ता है, वहां वापस लौट रहे हैं। अपने ही घर पर खेती-बाड़ी करके बच्चों का पेट भरेंगे।
ऐसा ही हाल आरोन का
राजस्थान में लॉक डाउन लग जाने के बाद काम-धंधे बंद हो गए, जिससे गुना के लोग जो मजदूरी करने वहां गए थे, वहां से वापस लौटने लगे हैं। ऐसे ही लोग रविवार को भी बसों के जरिए आरोन आते हुए दिखाई दिए। वहीं आरोन के अलावा म्याना, कुंभराज में भी राजस्थान से लोग लौटकर अपने घर आने की खबर मिली।

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