कोरोना इफेक्ट: पीजीआई रोहतक में 5000 सर्जरी रद्द, मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

कोविड अस्पताल के चलते इलेक्टिव सर्जरी पर लगाई थी रोक
मुख्य सचिव और निदेशक से तलब किया जवाब

By: Devkumar Singodiya

Published: 29 May 2020, 08:48 PM IST

रोहतक (गणेश सिंह चौहान). कोविड-19 महामारी के कारण रोहतक के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पांच हजार सर्जरी रद्द करने के संबंध में समाचार पत्रों की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए, मानवाधिकार आयोग हरियाणा ने पीजीआइएमएस रोहतक और स्वास्थ्य विभाग हरियाणा से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल, सदस्य केसी पुरी व सदस्य दीप भाटिया की बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व पीजीआइ रोहतक के निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से लोगों के इलाज के बारे स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम, छोटी-बड़ी सर्जरी व ओपीडी पर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

हर माह होती है 15000 सर्जरी
पीजीआई रोहतक में हर महीने छोटी बड़ी कुल मिलाकर 15384 सर्जरी होती है। साल 2019 में पीजीआई में 184617 व 2018 में 183478 सर्जरी हुई थी। लगभग इतनी ही सर्जरी राज्य के अन्य अस्पतालों में होती है। समाचार के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में सर्जरी टालने से गरीब व असहाय कष्ट से गुजर रहे हैं, क्योंकि सक्षम मरीज तो निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैंं, लेकिन वो गरीबी के चलते केवल पीजीआइ या सरकारी अस्पताल के भरोसे है और उनके पास कोई विकल्प नहीं है। पीजीआइ ने कोविड अस्पताल के चलते सरकार की गाइडलाइन के अनुसार इलेक्टिव सर्जरी को रोक दिया है और अब सिर्फ आपात सर्जरी ही की जा रही है। इसके चलते मरीजों को समस्या हो रही है और आगे भी सर्जरी शुरू होने की उम्मीद कम ही है।


17 जून तक पेश करना होगा जवाब

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्वास्थ्य विभाग को कोविड-19 के डर से सर्जरी को रद्द नहीं करना चाहिए। उन्हेंं उन लोगों का इलाज भी करना होगा जो अन्य बीमारी से पीडि़त हैं। उन व्यक्तियों की सर्जरी और उपचार न करना जो विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीडि़त हैं, यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 महामारी की आड़ में अन्य बीमारी के इलाज से इनकार नहीं कर सकता। आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव व पीजीआइ रोहतक के निदेशक को 17 जून तक इस बाबत विस्तृत जवाब देने को कहा हैं।


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