बीयर सस्ती, शराब की क्वालिटी सुधारने पर जोर, सरकार ने बनाए नए नियम

मौजूदा वित्त वर्ष में 7500 करोड़ रुपए राजस्व आने की उम्मीद थी लेकिन अनुमानित 6600-6700 करोड़ रुपए ही इकट्ठा (Beer Rate In Haryana) होने की उम्मीद (Haryana New Excise Policy) है (Wine Rate In Haryana)...

(चंडीगढ़,गुरुग्राम): हरियाणा में एक अप्रैल से बीयर जहां सस्ती होगी वहीं सरकार ने अंग्रेजी व देसी शराब का कोटा घटा दिया है। अंग्रेजी व देसी शराब के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। प्रदेश में यह पहला मौका होगा जब सात सौ गावों में शराब की बिक्री नहीं हो सकेगी।


हरियाणा के उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी एवं कराधान मंत्री दुष्यंत चौटाला ने गुरुवार शाम चंडीगढ़ में नई आबकारी नीति का ऐलान करते हुए बताया कि इस बार की नीति में सरकार ने शराब की क्वालिटी सुधार पर जोर दिया है। सस्ते दामों वाली अंग्रेजी शराब की पेटी का डिस्टलरी रेट अब किसी भी सूरत में 900 रुपए से कम नहीं होगा। इससे कम का रेट अगर तय किया जाता है तो ऐसी सरकार को आबकारी विभाग द्वारा मंजूरी नहीं दी जाएगी। प्रदेश में अंग्रेजी के कई ऐसे ब्रांड हैं, जिनका एक्स-डिस्टलरी प्राइज 450 (एक पेटी का भाव) रुपए तक है। यानी डिस्टलरी से एक बोतल करीब 12 रुपए में बाहर आती है। विभाग ने स्पष्ट कहना है कि सस्ती शराब के चक्कर में क्वालिटी से समझौता होता है। इसी वजह से इस बार 900 रुपए ईबीपी तय किया गया है।


सरकार ने नई शराब नीति के टैक्सों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। अंग्रेजी शराब की प्रति बोतल पर दो से तीन रुपए का अंतर पड़ेगा लेकिन इससे बहुत अधिक बोझ नहीं पडऩे वाला। अंग्रेजी शराब का कोटा 1 करोड़ प्रूफ लीटर कम किया गया है। लगभग 16 लाख केस कम होंगे। पिछले वर्ष 96 लाख केस का कोटा तय था, जो अब 80 लाख रहेगा। उन्होंने बताया कि अवैध शराब की बिक्री को रोकने के लिए ठेकों पर बिल देना अनिवार्य कर दिया गया है। बिल नहीं देने वाले को पांच हजार रुपए का जुर्माना किया जाएगा। जिसके चलते आदेश जारी किए गए हैं कि सभी शराब ठेकों पर पीओएस मशीनें लगाई जाएंगी।

यहां रात एक बजे तक खुलेंगे ठेके...

उन्होंने बताया कि राजधानी दिल्ली की तर्ज पर अब गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला में रात एक बजे तक बार खोले जा सकेंगे। इसी तरह से प्रदेश के शॉपिंग मॉल्स में अब भी शराब की बिक्री हो सकेगी। हालांकि 2019-20 की शराब नीति से राजस्व जुटाने के लिए तय किए गए टारगेट को सरकार पूरा नहीं कर सकी है। ऐसे में 2020-21 के दौरान लगभग 7000 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।


मौजूदा वित्त वर्ष में 7500 करोड़ रुपए राजस्व आने की उम्मीद थी लेकिन अनुमानित 6600-6700 करोड़ रुपए ही इकट्ठा होने की उम्मीद है। प्रदेश में बनने वाली अंग्रेजी शराब के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शराब कंपनियों को विदेश जाने वाली शराब के निर्यात शुल्क को खत्म कर दिया है। दूसरे राज्यों में जाने वाली शराब पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी 4 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी की गई है। उन्होंने कहा कि अब छह जोन की जगह दो ठेकेदारों का जोन बनेगा। प्रदेश में यह पहला मौका होगा जब राज्य के 700 गांवों में शराब नहीं बिकेगी। तय समय के भीतर सरकार के पास कुल 872 ग्राम सभाओं के प्रस्ताव पहुंचे। इनमें से कुछ ऐसे प्रस्ताव थे, जिन पर एक व्यक्ति के ही हस्ताक्षर थे। ऐसे में 700 गांवों में शराब के ठेके नहीं खोलने का निर्णय लिया है।

Prateek Desk
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