हरियाणा में अवैध खनन के एक लाख से अधिक मामले

हरियाणा में अवैध खनन बड़े स्तर पर हो रहा है। खनन ठेकेदार दोगुने या इससे अधिक खनन क्षेत्र में खनिजों का दोहन करते पाए गए हैं। यहां तक कि गैरकानूनी खनन के चलते नदी के बहाव का मुंह तक मोड़ दिया गया है। बांध की सीमा बदल दी गई है और गैरकानूनी पुल बनाए गए हैं।

By: Devkumar Singodiya

Published: 03 Dec 2019, 05:22 PM IST

चंडीगढ़. हरियाणा में अवैध खनन को लेकर कैग की जारी रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा ने यह मुद्दा राज्यसभा में उठाया। राज्यसभा में शैलजा ने कहा कि पूरे देश में अवैध खनन हो रहा है। 2018-19 में एक लाख 15 हजार 492 मामले अवैध खनन के पाए गए और यह बढ़ते ही जा रहे हैं।
उन्होंने हरियाणा विधानसभा में खनन को लेकर रखी गई कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कैग रिपोर्ट में पाया गया है कि हरियाणा में अवैध खनन बड़े स्तर पर हो रहा है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि खनन ठेकेदार दोगुने या इससे अधिक खनन क्षेत्र में खनिजों का दोहन करते पाए गए हैं। यहां तक कि गैरकानूनी खनन के चलते नदी के बहाव का मुंह तक मोड़ दिया गया है।
बांध की सीमा बदल दी गई है और गैरकानूनी पुल बनाए गए हैं। कैग की रिपोर्ट में पाया गया है कि खनन ठेकेदार दोगुने क्षेत्र में खनिजों का दोहन कर राजस्व को चूना लगा रहे हैं। यदि यह सभी 95 खनन क्षेत्रों में लागू किया जाए तो यह माना जाए कि तीन चौथाई खनन क्षेत्रों में दोगुने या उससे अधिक क्षेत्रफल में खनन हो रहा है और सालाना पांच हजार करोड़ का चूना लगाया जा रहा है।
कुमारी शैलजा ने कहा कि यह घोटाला प्रशासन और सरकार की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता है। जब सरकार के पास सैटेलाइटइमेजरी है तो यह हजारों करोड़ों का घोटाला कैसे हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के इस अवैध खनन घोटाले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की।

हरियाणा सरकार करवाएगी जांच : मूलचंद शर्मा

एक तरफ जहां कुमारी शैलजा ने यह मुद्दा राज्यसभा में उठाया है वहीं हरियाणा के खनन एवं इस्पात मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि कैग की रिपोर्ट सबके सामने है। कांग्रेस जो आरोप लगा रही है वह सेल्फ कैलकुलेशन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संज्ञान में आ चुका है।
सरकार ने इस मामले में जांच करवाने का फैसला किया है। जांच में पता चलेगा कि किस क्षेत्र में माइनिंग कम या ज्यादा हुई है। खनन की लंबित वसूली जल्द से जल्द शुरू होगी। खनन ठेकेदारों को सरकार की देनदारी चुकता करनी होगी। अन्यथा उनकी संपत्ति भी अटैच की जा सकती है।

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