असम के सिलसिलेवार बम धमाकों का दस साल बाद आया फैसला,एनडीएफबी के प्रमुख रंजन दैमारी समेत 15 को दोषी माना

सजा का एलान बुधवार को होगा...

 

राजीव कुमार की रिपोर्ट...

(गुवाहाटी): आखिरकार 10 साल तीन महीने बाद असम में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के लिए सोमवार को अदालत का फैसला आया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने 30 अक्टूबर, 2008 को असम में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के प्रमुख रंजन दैमारी सहित 15 लोगों को दोषी ठहराया है। दोषी ठहराए अन्य में जार्ज बोड़ो,राजू सरकार,प्रभात बोड़ो उर्फ टेपा,अजय बसुमतारी,राहुल ब्रह्म,इंद्र ब्रह्म,लोख्रा बसुमतारी,अंचाई बसुमतारी,राजेन ग्यारी,नीलिम दैमारी,मृदुल ग्यारी,जयंती ब्रह्म,बी थेराई उर्फ बैशागी बसुमतारी और मथुराम ब्रह्म शामिल हैं। दोषियों को बुधवार को सजा सुनाई जाएगी। दैमारी इस सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में मुख्य आरोपी था, जिसमें 88 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 540 अन्य घायल हुए थे।

 

यहां—यहां हुआ था विस्फोट

मालूम हो कि 30 अक्टूबर 2008 को गुवाहाटी के गणेशगुड़ी, पानबाजार और सीजेएम क्षेत्र में और बरपेटा, कोकराझाड़ और बंगाईगांव में करीब-करीब एक साथ बम धमाके हुए थे। सीबीआई ने 2009 में एनडीएफबी प्रमुख और 22 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। आरोप-पत्र में 650 प्रत्यक्षदर्शियों के नाम थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स, पकड़े गए लोगों के कबूलनामे, कुछ आरोपियों द्वारा कॉल की जानकारी समेत 682 दस्तावेज शामिल थे।


बागलादेश से मुख्य आरोपी हुआ था गिरफ्तार

अभियोजन के अनुसार, कुल मिलाकर नौ विस्फोट किए गए थे, जिसमें से गुवाहाटी में हुए तीन विस्फोटों में 53 लोग मारे गए थे। कोकराझाड़ में हुए तीन विस्फोट में 20 लोग और बरपेटा में हुए विस्फोट में 15 लोग मारे गए थे। बंगाईगांव में हुए विस्फोट में कोई हताहत नहीं हुआ था। मुख्य आरोपी दैमारी को बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था और मई 2010 में उसे भारतीय अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया था। डी.आर. नाबला के रूप में भी पहचाने जाने वाले दैमारी ने 3 अक्टूबर, 1986 को बोडो सुरक्षा बल का गठन किया था और बाद में इसका नाम बदलकर एनडीएफबी कर दिया था।

 

किया था संघर्ष विराम का उल्लंघन

हालांकि, इस संगठन ने 2005 में भारत सरकार के साथ संघर्ष विराम का समझौता किया था लेकिन उसने प्राय: समझौते का उल्लंघन किया। जांच एजेंसी द्वारा 2008 में सिलसिलेवार बम विस्फोट में दैमारी को नामजद करने के बाद संगठन दो भागों में बंट गया था। संगठन ने इसके साथ ही दैमारी को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उसने एनडीएफबी (रंजन) नामक गुट बना लिया। सिलसिलेवार विस्फोट में दैमारी के खिलाफ कुल 14 मामले दर्ज किए गए। सीबीआई ने यह देखते हुए कि वह सरकार के साथ शांति वार्ता में भाग ले रहा है, उसकी सशर्त जमानत पर कोई आपत्ति नहीं की थी, जिसके बाद उसे 2013 में जमानत दे दी गई। अदालत के फैसले के तुरंत बाद दैमारी की जमानत रद्द हुई। अदालत परिसर में ही उसे गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2003 से वह अंतरिम जमानत पर था।

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Prateek Desk
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