असम सरकार इस बीमारी के इलाज के लिए देगी एक लाख रुपए

असम सरकार इस बीमारी के इलाज के लिए देगी एक लाख रुपए
Japanese Encephalitis

Yogendra Yogi | Publish: Jul, 23 2019 07:42:21 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

Assam: असम के प्राइवेट अस्पतालों में जापानी एंसेफ्लिटिस जापानी इंसेफ्लाइटिस
( Japanese Encephalitis ) से पीडि़त व्यक्ति का इलाज कराने पर सरकार की ओर से 1 लाख की राशि की सहायता दी जाएगी। इससे अब तक 110 लोगों की हुई मौत।

गुवहाटी: असम ( Assam ) के प्राइवेट अस्पतालों में जापानी एंसेफ्लिटिस ( Japanese Encephalitis ) से पीडि़त व्यक्ति का इलाज कराने पर सरकार की ओर से 1 लाख की राशि की सहायता ( One Lakh Assitance ) दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ( Health Minister ) हिमंता बिस्व सरमा ने यह घोषणा की है। राज्य में हाल ही में तीन और मौतें ( More Deaths ) हो चुकी है और इसी के साथ यह आकड़ा 110 तक पहुंच चुका है। वहीं इस बीमारी से पीडि़त लोगों की संख्या 477 तक पहुंच चुकी है।

अब तक 110 लोगों की हुई मौत
बाढ़ ( Flood ) की त्रासदी झेल रहे पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य पर अब जापानी एंसेफ्लिटिस भी कहर बनकर टूट रहा है। जापानी एंसेफ्लिटिस की वजह से राज्य के गोलपाड़ा में हाल ही में एक और मौत हो गई। दूसरी मौत धुबरी तथा तीसरी मौत बरपेटा में हुई है। इन तीनों लोगों की मौत जापानी एंसेफ्लिटिस का अलग—अलग अस्पतालों में इलाज करवाने के दौरान हुई है। इससे पहले 21 जुलाई को गोलपाड़ा और बोंगइगांव में दो मौतें हुई थी।

अवकाश ( Leave Cancel ) लेने पर होगी कार्रवाई
असम में इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप के चलते स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने सभी डॉक्टरों, आशा वर्करों तथा नर्सिंग स्टाफ की छुट्टियों पर सितंबर माह तक रोक लगा दी है। इसके अलावा ये सभी लोग इस दौरान 15 दिन की केजुअल लीव भी नहीं ले सकेंगे। यदि किसी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ ने इस दौरान जबरदस्ती छुट्टी ली तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। हालांकि इमरजेंसी हालातों में छुट्टी की आवश्यकता हो तो उसके लिए जिले के डिप्टी कमिश्नर से अनुमति लेनी होगी।

ऐसे फैलता है यह रोग
गौरतलब है कि चावलों के खेतों में पनपने वाले मच्छरों से जापानी एनसिफेलिटिस रोग होता है। जापानी एनसेफेलाइटिस वायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से और जंगली पक्षियों में वायरस चला जाता है। इसके बाद संक्रांत मच्छर के काटने पर मानव और जानवरों में यह वायरस फैल जाता है। जापानी एनसेफेलिटिस वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। केवल पालतू और जंगली पक्षी ही जापानी एनसेफेलिटिस वायरस फैला सकते हैं।

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