Assam CM सोनोवाल ने लिया नीति आयोग की बैठक में हिस्सा, नदी के कटाव को प्राकृतिक आपदा के रुप में शामिल करने का किया अनुरोध

Assam CM सोनोवाल ने लिया नीति आयोग की बैठक में हिस्सा, नदी के कटाव को प्राकृतिक आपदा के रुप में शामिल करने का किया अनुरोध

Prateek Saini | Publish: Jun, 15 2019 08:45:31 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उज्जवला, स्वच्छ भारत जैसी केंद्र सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना पर आधारित है। इसलिए इनके तथ्यों का अद्यतन करना जरूरी है, ताकि नये लोगों को इसमें शामिल कर उन्हें इसका लाभ दिया जा सके...

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में प्रधानमंत्री तथा नीति आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुई आयोग की पांचवीं संचालन परिषद की बैठक में हिस्सा लेकर नदी के कटाव की समस्या को एसडीआरएफ की नियमावली में प्राकृतिक आपदा के रूप में शामिल करने में नीति आयोग के हस्तक्षेप की कामना की।


मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि असम बाढ़ प्रभावित राज्य है, इसलिए बाढ़ की रोकथाम, पुनर्निर्माण, बाढ़ सहायता और पुनर्वास के लिए अधिक धनराशि आवंटित की जाए। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बाढ़ के अलावा नदी के कटाव की समस्या से राज्य बेहाल है। नदी के कटाव से हर साल लगभग 8 हजार हेक्टेयर जमीन काल के गर्त में समा जाती है। राज्य में 1950 से 1.25 लाख किसान परिवार की लगभग 4.27 लाख हेक्टेयर जमीन खत्म हो गयी है। इसलिए नदी के कटाव की समस्या को एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ नियमों में प्राकृतिक आपदा के तहत शामिल करना बेहद जरूरी है।

 

assam cm

मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर के जल संसाधन प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री द्वारा नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि कमेटी ने जो सुझाव दिये हैं, उसको लागू कर बाढ़ व कटाव की समस्या का सकारात्मक हल निकाला जाए।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि असम के जिन सात जिलों को एस्पाइरेशनल जिले में शामिल किया गया है उन जिलों के विशेष विकास की जरूरत को पूरा करने में राज्य ने काफी सफलता पायी है। इनमें हैलाकांदी जिले में पूरे भारत में एस्पाइरेशनल जिलों में पहला स्थान पाया है। उसी तरह ग्वालपाड़ा-धुबड़ी जिले की भी स्थिति संतोषजनक है। राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में इन जिलों के लिए नयी योजना के तहत 28 करोड़ उपलब्ध कराये हैं। सोनोवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का जो लक्ष्य रखा है, उसे पाने के लिए राज्य सरकार ने 2017 में 30 हजार करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना शुरू की थी। राज्य के अनेक किसानों के पास भूमि अधिकार का प्रमाण पत्र न रहने के चलते उन्हें अनेक योजनाओं से वंचित होना पड़ता था। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के 1 लाख किसान परिवार को जमीन का पट्टा देने का कदम उठाया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति का भी उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उज्जवला, स्वच्छ भारत जैसी केंद्र सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना पर आधारित है। इसलिए इनके तथ्यों का अद्यतन करना जरूरी है, ताकि नये लोगों को इसमें शामिल कर उन्हें इसका लाभ दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि आंचलिक पंचायत और जिला परिषदों के पूर्ण विकास के लिए जरूरी राशि 15वें वित्त आयोग के तहत मिले, इसके लिए कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही छठे अनुसूचि परिषदों के लिए भी वित्त आयोग अनुदान दे, इस पर भी आशा जतायी।

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