सच किए बचपन के अरमान, मुट्ठी में कर दिखाया आसमान

सच किए बचपन के अरमान, मुट्ठी में कर दिखाया आसमान

Nitin Bhal | Updated: 13 Aug 2019, 12:04:50 AM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

Tripura: एक छोटे से गांव की लडक़ी ने बचपन में एक टीवी कार्यक्रम देख सपना संजोया। हौसलों को उड़ान मिली और मेहनत के बल पर सपना सच कर दिखाया। हम बात...

अगरतला. एक छोटे से गांव की लडक़ी ने बचपन में एक टीवी कार्यक्रम देख सपना संजोया। हौसलों को उड़ान मिली और मेहनत के बल पर सपना सच कर दिखाया। हम बात कर रहे हैं बिपाशा ( Bipasha Hrangkhawl ) की जो त्रिपुरा ( tripura ) की पहली महिला एयर ट्रेफिक कंट्रोलर ( ATC ) है। बिपाशा के लिए, एक छोटे से गांव से त्रिपुरा की पहली महिला एयर ट्रैफिक कंट्रोलर बनने तक का सफर किसी सपने के सच होने से कम नहीं था। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर बनने की उसकी महत्वाकांक्षा 10 साल की उम्र में शुरू हुई। बचपन में वे अपने पिता के साथ टेलीविजन पर नेट जियो डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला एयर क्रैश इनवेस्टीगेशन देखती थी। 26 साल की बिपाशा अगरतला से 50 किलोमीटर दूर रंगमुरा गांव की रहने वाली हैं। यह खोवाई जिले में सुदूर आदिवासी गांव है। बिपाशा भले ही छोटे से गांव की रहने वाली थीं, लेकिन उसके परिवार ने उसकी शिक्षा को गंभीरता से लिया और उन्हें त्रिपुरा के सबसे अच्छे स्कूलों में भर्ती कराया। बिपाशा के पिता बिजॉय कुमार राज्य बिजली विभाग के कर्मचारी थे। ऐसे में उनका स्थानांतरण एक स्थान से दूसरे स्थान होता रहा। बिपाशा को खोवाई, धलाई और पश्चिम त्रिपुरा जिलों के कई मिशनरी स्कूलों में अध्ययन करने का अवसर मिला। उन्होंने महाराष्ट्र के कोंकण ज्ञानपीठ कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। जहां उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

परदे के पीछे निभाते हैं सुरक्षा का दायित्व

Bipasha is firsrt woman ATC at Agartala Airport

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर हमेशा पर्दे के पीछे काम करते हैं। हजारों लोगों की सुरक्षा उनके द्वारा सुनिश्चित होती है। बिपाशा ने कहा कि मुझे नहीं पता कि था कि एटीसी क्या होता है। मैंने इसके बारे में अपने पिता के साथ टीवी शो में जाना। उन्होंने मुझे हमेशा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ( AAI ) के साथ एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की नौकरी करने के लिए प्रेरित किया। स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद बिपाशा ने अपनी पहली नौकरी के लिए संघर्ष किया। शुरुआत में उन्होंने वह एक विपणन कार्यकारी के रूप में नौकरी की। हालांकि एक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर बनने के उसके सपने उनकी आंखों में थे। 10 महीने की संक्षिप्त अवधि के बाद, अगस्त 2016 में बिपाशा ने नौकरी छोड़ दी। बिपाशा ने एयर ट्रैफिक क्षेत्र में एक ब्रेक के लिए प्रयास किया। वह 2015 में अपने पहले प्रयास में एटीसी परीक्षा को पास करने में विफल रही। बड़ी सफलता दिसंबर 2017 में ही मिली, जब वह अपने दूसरे प्रयास में परीक्षा में सफल रही। वह मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक सहायक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर या अल्फा कंट्रोलर के रूप में शामिल हुईं और वहां उन्होंने सात महीने तक सेवा की।

लौटना पड़ा त्रिपुरा

Bipasha is firsrt woman ATC at Agartala Airport

बिपाशा के पिता को जून 2018 में मस्तिष्क आघात हुआ और परिवार को संकट का सामना करना पड़ा क्योंकि परिवार में एकमात्र कमाने वाले वही थे। ऐसे में दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिपाशा की छोटी बहन रिमी को पढ़ाई छोडऩी पड़ी। परिवार की सबसे बड़ी संतान होने के कारण बिपाशा ने त्रिपुरा में शिफ्ट होने का फैसला किया। उसकी दिनचर्या सुबह साढ़े सात बजे ड्यूटी में शामिल होने और शाम को 8:15 बजे तक काम करने की होती है। घर वापस आने पर, वह परिवार की दैनिक जरूरतों को भी पूरा करती हैं।

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