मिज़ोरम में जन संगठनों ने लोकसभा मतदान के बहिष्कार और राज्यव्यापी बंद के निर्णय को वापिस लिया

मिज़ोरम में जन संगठनों ने लोकसभा मतदान के बहिष्कार और राज्यव्यापी बंद के निर्णय को वापिस लिया

Prateek Saini | Publish: Apr, 05 2019 08:43:58 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

ब्रू-शरणार्थियों के लिए मतदाता केंद्र की स्थापना के विरोध में ही 1 अप्रैल को जन संगठनों की समनव्य समिति ने 11 अप्रैल को होने वाले एकमात्र लोक सभा सीट के लिए मतदान का बहिष्कार करने और 8 अप्रैल से राज्यव्यापी अनिश्चित बंद करने की घोषणा की थी...

(आइज़ोल,सुवालाल जांगु): राज्य के 6 बड़े नागरिक समाज और छात्र संगठनों की समनव्य समिति ने 04 अप्रैल को राज्य सरकार के साथ बातचीत में ब्रू-शरणार्थियों के मुद्दे पर सहमति बनने के बाद 11 अप्रैल को हो रहे लोकसभा मतदान का बहिष्कार करने और 8 अप्रैल से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी बंद करने की घोषणा को वापिस ले लिया हैं।


दरअसल 1997 में ब्रू और मिज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के चलते हजारों ब्रू लोग पड़ौसी राज्य त्रिपुरा में चले गए। जो पिछले 22 वर्षों से कंचनपुर और पानीसागर उपखंडों के 6 राहत शिविरों में रह रहे हैं। जिनमें लगभग 35 हज़ार ब्रू शरणार्थी लोग रहते हैं। इनमें लगभग 12 हज़ार पंजीकृत मतदाता हैं। यह मतदाता आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य की एकमात्र सीट पर हो रहे चुनाव में भाग ले सके इसके लिए चुनाव आयोग की ओर से विशेष मतदान केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। चुनाव आयोग हजारों ब्रू-शरणार्थी मतदाताओं के लिए मिज़ोरम में त्रिपुरा सीमा के पास कनमुन गाँव में 15 विशेष मतदान केंद्र स्थापित करने वाला है। ब्रू-शरणार्थियों के लिए मतदाता केंद्र की स्थापना के विरोध में ही 1 अप्रैल को जन संगठनों की समनव्य समिति ने 11 अप्रैल को होने वाले एकमात्र लोक सभा सीट के लिए मतदान का बहिष्कार करने और 8 अप्रैल से राज्यव्यापी अनिश्चित बंद करने की घोषणा की थी। एनजीओ समनव्य समिति (एनजीओसीसी) प्रमुख वनललरुआता ने मीडिया को बताया कि “हमने अपने निर्णय को सरकार से हमारी मांग पर पुख्ता आश्वासन मिलने के बाद बदला हैं।

 

पहली बार नवंबर में किया मतदान के लिए विशेष कैंप का उपयोग

नवंबर 2018 के मिज़ोरम विधानसभा चुनाव में पहली बार त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों से लगभग 6 हज़ार ब्रू मतदातों नें त्रिपुरा सरकार के द्वारा उपलब्ध कराये गये वाहनों से 35 किलोमीटर की यात्रा करके मिज़ोरम-त्रिपुरा के कनमुन गाँव में बनाए गये करीब एक दर्जन विशेष मतदान केन्द्रों पर आकर अपने मताधिकार कर उपयोग किये थे।

 

मिजो समुदाय और ब्रू समुदाय के बीच अनबन

राज्य में अल्पसंख्यक ब्रू समुदाय के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वन सम्पदा पर बहुसंख्यक मिज़ो समुदाय ने सामाजिक और राजनीतिक कब्जा करने की राजनीति ने राज्य में ब्रू और मिज़ो समुदायों के बीच जनजातीय हिंसा का रूप ले लिया। ब्रू लोग मिज़ोरम में रेआंग के नाम से जाने जाते हैं जो धार्मिक रूप से न तो ईसाई है और न ही हिन्दू हैं। 1997 में ब्रू और मिज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के चलते हजारों ब्रू लोग पड़ौसी राज्य त्रिपुरा में चले गए। जो पिछले 22 वर्षों से कंचनपुर और पानीसागर उपखंडों के 6 राहत शिविरों में रह रहे हैं। जिनमें लगभग 35 हज़ार ब्रू शरणार्थी लोग रहते हैं। अगस्त 2018 में ब्रू-शरणार्थियों, मिज़ोरम सरकार, त्रिपुरा सरकार और केंद्र सरकार के बीच ब्रू-शरणार्थियों के पूर्णस्थापन को लेकर एक बहुपक्षीय समझौता हुया था। इसके अंतर्गत ब्रू-शरणार्थियों को 31 दिसम्बर 2018 तक वापिस मिज़ोरम में चले जाना होगा और 01 अक्टूबर 2018 से राहत शिविरों में केन्द्रीय गृहमंत्रालय से की जा रही राहत सामग्री की आपूर्ति को बंद कर दिया जाएगा। लेकिन राज्य में नवम्बर 2018 में विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनावों को देखते हुए इस आपूर्ति को तीन बार बढ़ा दिया गया है। अब इसे आखरी बार के लिए 01 नवम्बर 2019 तक बढ़ा दिया गया हैं।

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