भारत-बांग्लादेश सीमा पर भगवान भरोसे हैं 3 हजार भारतीय

( Tripura News ) देश में लॉकडाउन ( Lock down ) की स्थिति के चलते दानदाता, स्वयंसेवी संगठन और सरकारें जरुरतमंदों के खाने-पीने का इंतजाम कर रही हैं, ऐसे में करीब तीन हजार भारतीय (3 thousand indians stuck) भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से बांग्लादेश सरकार ( Bangladesh government ) के रहमोकरम पर जिंदा हैं। इनके पास बचे हुए रुपए खत्म हो गए और राशन भी एक-दो दिन का ही बचा है।

By: Yogendra Yogi

Published: 15 Apr 2020, 03:12 PM IST

अगरतला (राजीव कुमार) त्रिपुरा: ( Tripura News ) देश लॉकडाउन ( Lock down ) की स्थिति के चलते दानदाता, स्वयंसेवी संगठन और सरकारें जरुरतमंदों के खाने-पीने का इंतजाम कर रही हैं, ऐसे में करीब तीन हजार भारतीय (3 thousand indians stuck) भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से बांग्लादेश सरकार ( Bangladesh government ) के रहमोकरम पर जिंदा हैं। इनके पास बचे हुए रुपए खत्म हो गए और राशन भी एक-दो दिन का ही बचा है।

लॉकडाउन कहर बना
सीमा पर रहने वाले इन नागरिकों पर लॉक डाउन कहर बन कर टूटा है। तीन हजार भारतीय त्रिपुरा से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा के पास अब जिंदगी इस जंग में भगवान भरोसे हैं। काली कृष्ण नगर के गांववाले सीमा पर लगी कंटीली बाड़ के उस पार सीमित संसाधनों से एक जीवन संग्राम की एक कठिन लडाई लड़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील कर दिया गया है। देशव्यापी लॉकडाउन के बाद कंटीली बाड़ से लगी गेटों को बंद कर दिया गया है। पहले दिन में दो बार गेटें भारत के लोगों को इस पार आने के लिए खोली जाती थी। पर अब इन्हें न खोलने से तीन हजार लोग वहां पूरी तरह फंस गए हैं।

बीएसएफ ने कर दिए द्वार बंद
त्रिपुरा के सेपाहीजाला जिले के सोनामुरा महकमें की जीरो लाइन पर ये लोग रहते हैं। गेटें न खुलने से इनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंटीली बाड़ के उस पार स्थित नवदीप चंद्र नगर गांव के सलीम खान कहते हैं कि देशभर के लॉकडाउन के चलते 25 मार्च से गेटें पूरी तरह बंद हैं। हमें भारतीय साइड में इन दिनों जाने नहीं दिया जा रहा है। लॉकडाउन के बाद सीमा सुरक्षा बल ने सभी गेटें बंद कर रखी हैं। खान जैसे अन्य अनेक लोग पिछले पंद्रह सालों से कंटीली बाड़ और जीरो लाइन के बीच में रह रहे हैं। यह सिस्टम इंदिरा-मुजीब के 1971 के समझौते के तहत सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश राइफल्स के बीत सहमति से बना है। कंटीली बाड़ के उस पार रहनेवाले भारतीय गांववाले भूखमरी और मौत के डर से अकसर बांग्लादेश के बाजारों में जाने को विवश हो जाते हैं। वहां यहां अपनी सब्जियों को बेचते हैं।कुछ पैसे कमाते हैं।

नाममात्र का बचा है राशन
इन दिनों अत्यावश्यकीय सामान और दवाओं के लिए वे बांग्लादेश के बाजारों पर निर्भर रहने को विवश हो गए हैं। इन लोगों को बांग्लादेश की ओर जाने के लिए कोई पाबंदी नहीं है। त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किमी की सीमा लगी है। सीमा सुरक्षा बल के जनसंपर्क अधिकारी सी एल बेलवा का कहना है कि लॉकडाउन के चलते सीमा की सभी गेटे बंद हैं। फिर भी हमारी संबंधित चौकियां उन परिवारों को राशन मुहैया करा रही है। उस ओर रहनेवाले ज्यादातर परिवार किसान और मजदूर हैं। एक स्थानीय नेता जयदेव सरकार का कहना है कि इन्हें कंटीली बाड़ के इस पार लाने के लिए कहा गया, लेकिन प्रशासन इनके लिए जमीन का इंतजाम नहीं कर पाया। ग्रामीण ए बेगम का कहना है कि कंटीली बाड़ के इस ओर भी हमारी जमीन है। लेकिन सीमा सुरक्षा बल ने इन दिनों हमें यहां प्रवेश के लिए अनुमति नहीं दी है। हमारे पास अनाज और चावल थोड़े ही बच गए हैं। हम और हमारे बच्चे यदि बीमार पड़ें तो इस दौरान हमें मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होंगी।

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