बर्मा में गांधी प्रेम, 50 हजार डाक टिकट हाथों-हाथ बिके

सीमावर्ती देश बर्मा में महात्मा गांधी के प्रति प्रेम का अनोखा जज्बा देखने को मिला है। महात्मा गांधी के 150 वें जन्मदिवस पर म्यांमार सरकार द्वारा जारी 50 हजार टिकट कुछ ही घंटों में बिक गए।

 

आइज़ोल ( सुआलाल जांगू ): सीमावर्ती देश बर्मा में महात्मा गांधी के प्रति प्रेम का अनोखा जज्बा देखने को मिला है। महात्मा गांधी के 150 वें जन्मदिवस पर म्यांमार सरकार द्वारा जारी 50 हजार टिकट कुछ ही घंटों में बिक गए। जिन्हें गांधी जी का टिकट नहीं मिला उन्हें इसका अफसोस रहा। गांधीजी के प्रति अगाध श्रृद्धा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 13 साल की उम्र से गांधीजी के डाक टिकटों का संग्रहण कर रहे 68 वर्षीय यू सोए म्यिंत थेइन के पास टिकिटों बड़ा खजाना है।

अफसोस दोस्तों के लिए नहीं खरीद पाया
गांधीजी के 150 वें जन्मदिन के मौके पर जारी कुछ टिकट भी थेइन ने खरीद लिए किन्तु उसे अफसोस इस बात का रहा कि वह अपने दोस्तों के लिए डाक टिकट नहीं खरीद पाया। गौरतलब है कि मांडले पोस्ट ऑफिस ने गांधीजी की स्मृति में 50 हजार डाक टिकट जारी किए थे। ये टिकट कुछ घंटों में ही बिक गए।

गांधी जी 3 बार बर्मा गए थे
मांडले पोस्ट ऑफिस के एक अधिकारी दाव नेव नी औंग ने बताया कि सभी डाक टिकिट बिक गये थे। भारत के कोन्सुल जनरल नंदन सिंह भैसोरा ने कहा कि अंतराष्ट्रीय शांति और अहिंसा के आइकॉन के तौर पर प्रसिद्ध महात्मा गांधी के आदर्शों के सम्मान में मांडले पोस्ट ऑफिस ने स्मरणीय डाक टिकिट जारी किये थे। नय प्यी ताव पोस्ट ऑफिस के उपप्रबंधक दाव नू नू थान ने कहा कि स्मरणीय डाक टिकिट महात्मा गांधी कि बुद्धिमता को अभिव्यक्त करते हैं। थान ने बताया कि महात्मा गांधी तीन बार 1902, 1915 और 1929 में म्यांमार आये थे। गांधी के म्यांमार की आजादी के नेता बोगयोके औंग सान के साथ काफी नजदीक संबंध थे। औंग सान वर्तमान में म्यांमार की राज्य कौंसेलर दाव औंग सान सू क्यी के पिता हैं।

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Yogendra Yogi
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