नगा समस्या के समाधान की राह हुई आसान, केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम

Nagaland News: 2015 से ही नगा शांति समझौते को लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, पिछले साल 31 अक्टूबर को इस शांति समझौते को लागू करने की समय सीमा निर्धारित की थी...

(कोहिमा,सुवालाल जांगु): पूर्वोत्तर भारत में सबसे पुरानी और जटिल नगा समस्या का समाधान होता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अरुणाचल और मणिपुर के नगा बहुल क्षेत्रों में एक–एक नगा स्वायत्ता जिला परिषद गठित करने का फैसला किया है। 2019 के मध्य से नगा समझौते को लागू करने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।

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नगा समझौते को लागू करने की दिशा में नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स–एनएनपीजी और एनएससीएन-आईएम की 3 में से 2 मांगों को पहले ही मान लिया गया हैं। जिनमें– दूसरे राज्यों जैसे अरुणाचल, मणिपुर और असम में नागा समुदाय की विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं को संवैधानिक सरंक्षण देना और समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाना देना है। हालांकि केंद्र सरकार ने एनएससीएन-आईएम और एनएनपीजी की नगा झंडे और नगा संविधान को मान्यता देना की मांग को नहीं माना है।


मीडिया रिपोर्टस के अनुसार नगा समझौते के अंतर्गत अरुणाचल और मणिपुर के नगा बहुल क्षेत्रों में संविधान की 6वीं अनुसूची के अंतर्गत एक–एक नगा स्वायत्त जिला परिषद–एनएडीसी का गठन किया जाएगा। इसके लिए दोनों सीमावर्ती राज्यों की सरकारों की सहमति ले ली गई हैं। इस महत्वपूर्ण कदम के लिए केंद्र सरकार के साथ एनएससीएन-आईएम और एनएनपीजी भी राजी हो गई हैं। इसके अलावा नगा समझौते को लागू करने के लिए केंद्र सरकार नगालैंड को एक और लोकसभा सीट देने के लिए भी सहमत हो गई हैं।

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समझौते के अनुसार नगा विद्रोही गुटों के विभिन्न विद्रोही लड़ाकुओं के पुनः स्थापन के लिए प्रभावशाली कदम लेने के लिए केंद्र सरकार राजी हो गई हैं। रिपोर्टस का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार और एनएससीएन और एनएनपीजी के बीच अब कोई विवादित मुद्दा नही बचा हैं और केवल नगा समझौते पर विभिन्न पक्षों के द्वारा अंतिम हस्ताक्षर करना बाकी हैं। केंद्र के वार्ताकार और नगालेंड के राज्यपाल आरएन रवि ने कहा कि नगा समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए एक समावेशी समझौता जो नगा समुदाय के सामाजिक और राजनीतिक समूहों को मंजूर हो के लिए सभी पक्षों के साथ विस्तार से बातचीत कर ली गई हैं। अब नगा समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करने के लिए केंद्र सरकार एनएससीएन-आईएम और एनएनपीजी के साथ अलग–अलग बात कर रही हैं।

 

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बता दें कि 1997 में केंद्र सरकार और नागा विद्रोही गुटों में सबसे प्रभावशाली– एनएससीएन (आईएम) के बीच बातचीत के लिए एक शांति समझौता हुआ था लेकिन 18 साल तक बातचीत किसी नतीजे पर नही पहुंची। 2015 में केंद्र सरकार ने एक बार फिर नगा विद्रोही गुटों खासकर एनएससीएन-आईएम के साथ नए सिरे से बातचीत करने के लिए नगा शांति समझौता किया था। हालांकि इस नए समझौते में एनएससीएन– खाफलांग गुट शामिल नहीं हुआ। 2015 से केंद्र सरकार ने नगा शांति समझौते को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आरएन रवि को वार्ताकार बनाया। 2015 से ही नगा शांति समझौते को लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले साल 31 अक्टूबर को इस शांति समझौते को लागू करने की समय सीमा निर्धारित की थी। बीते 4 सालों से केंद्र सरकार पर 2015 के नगा समझौते को किसी अंजाम पर लाने के लिए नगा विद्रोही गुटों के अलावा नगा समुदाय के राजनीतिक दलों का भी दबाव रहा। 2019 में केंद्र सरकार ने आरएन रवि के नगा समझौते को अंजाम तक लाने में किए गए प्रयासों को देखकर उन्हें नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। राज्यपाल के पद पर रहते हुए भी उन्होंने पिछले 6 महीनों में नगा गुटों में समझौते के प्रति विश्वास बनाए रखा।

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Prateek Desk
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