एनएससीएन-के म्यांमार सेना के साथ राष्ट्रीय संघर्ष-विराम समझौता पर नहीं करेगा हस्ताक्षर

एनएससीएन-के म्यांमार सेना के साथ राष्ट्रीय संघर्ष-विराम समझौता पर नहीं करेगा हस्ताक्षर

Prateek Saini | Publish: Jun, 04 2019 09:51:28 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

भारत विरोधी म्यांमार में पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों के खिलाफ कार्रवाई से और म्यांमार सेना और सरकार की सकारात्मक सहयोग और प्रतिबद्धता की भारतीय सेना ने प्रशंसा की हैं और आभार व्यक्त किया हैं...

(कोहिमा,सुवालाल जांगु): म्यांमार सेना की तरफ से बार-बार कार्रवाई का सामना करने के बावजूद नेशनलिस्ट सोश्ल काउंसिल ऑफ नागा (एनएससीएन) का खफ्लांग गुट (एनएससीएन-के) म्यांमार आर्मी (तातमदो) के साथ राष्ट्रीय संघर्ष-विराम समझौता (एनसीए) पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। एनएससीएन-के के प्रवक्ता और समूह के प्रचार-प्रसार मंत्री जोसेफ लमकंग ने बताया कि “उनका गुट नागा लोगों के संप्रभुता के अधिकार के लिए लड़ाई जारी रखेगा। म्यांमार सरकार और सेना नागा लोगों की महत्वाकांक्षा की परवाह सच्चे अर्थों में नहीं करती हैं।


एनएससीएन ने यह महसूस करना शुरू कर दिया हैं कि हम म्यांमार सेना की सैनिक कार्रवाई का आखिरी निशाने पर हैं।” बीते तीन साल से म्यांमार आर्मी और नागरिक सरकार म्यांमार में स्थित भारत विरोधी पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों खासकर नागा गुट पर एनसीए पर हस्ताक्षर करने के लिए बलपूर्वक दबाव डाल रही हैं। हालांकि म्यांमार में अभी 8 विद्रोही गुट हैं जिन्होने राष्ट्रीय संघर्ष-विराम समझौता (एनसीए) पर हस्ताक्षर नही किये हैं, उनमें से एनएससीएन-के और अराकान आर्मी प्रमुख हैं। भारत विरोधी एनएससीएन-के जो म्यांमार से भारत और म्यांमार के नागा लोगों के संप्रभुता अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा हैं। हालांकि भारत विरोधी अन्य गुटों ने एनसीए पर हस्ताक्षर कर दिये हैं लेकिन एनएससीएन-के ऐसा नहीं किया। एनएससीएन-के के प्रवक्ता ने बताया, “शांतिवार्ता टेबल पर हमारे प्रतिनिधियों के साथ म्यांमार सेना और सरकार के प्रतिनिधियों ने बहुत आक्रामक बर्ताव किया हैं। सेना ने हमारे आपूर्ति मार्गों को बंद कर दिया। सेना ने अपनी लोकप्रिय “फौर कट” नीति को लागू किया।” म्यांमार नागा मुद्दे को लेकर अच्छे अनुभव नहीं रखता हैं। म्यांमार सरकार यह बात अच्छी तरह से जानती हैं कि नागा मुद्दा दूसरे जातीय मुद्दों से बिलकुल अलग हैं।

 

 

एनएससीएन-के प्रवक्ता का कहना हैं कि म्यांमार सरकार को नागा लोगों पर एनसीए को ज़बरदस्ती थोपने की बजाय कोई दूसरा मार्ग अपनाना चाहिए। म्यांमार सेना (तातमदो) ने इसी साल फ़रवरी में सेगाइंग क्षेत्र में एनएससीएन-के अड्डों पर हमला करके नष्ट कर दिया गया। और एनएससीएन-के गुट कई विद्रोही नेताओं को गिरफ्तार किया गया। अभी उनमें से अधिकतर सेना की कैद में हैं। हालांकि म्यांमार सेना इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि नागा गुट को देशव्यापी संघर्ष-विराम समझौता की शर्तों को स्वीकार कर लेना चाहिए और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के किसी भी विद्रोही गुट के लोगों को म्यांमार में पनाह नहीं दे।


भारत विरोधी म्यांमार में पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों के खिलाफ कार्रवाई से और म्यांमार सेना और सरकार की सकारात्मक सहयोग और प्रतिबद्धता की भारतीय सेना ने प्रशंसा की हैं और आभार व्यक्त किया हैं। पिछले 2 साल में म्यांमार सेना ने भारत से लगी सीमा पर भारत विरोधी पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों के खिलाफ कार्रवाही की हैं। दक्षिण मिज़ोरम में म्यांमार का विद्रोही गुट अराकान आर्मी के अड्डों पर म्यांमार और भारतीय सेना ने मिलकर कार्रवाई की थी। अराकान आर्मी म्यांमार सेना के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द हैं क्योंकि इस शस्त्र विद्रोही गुट ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में अपने को काफी मजबूत किया हैं और पिछले साल म्यांमार के सुरक्षा बलों पर इस गुट ने कई छापामार हमलें किये थे।

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