मोदी कैबिनेट ने दी 'कैब' को मंजूरी, असम में हो सकता है तेज आंदोलन

पिछली बार (Central Government Decision) जब (Citizenship Amendment Bill) कैब (Cab) लाने की कोशिश हुई तो असम सरकार में भाजपा (Modi Cabinet Decision) की सहयोगी (Modi Government Decision) असम (Assam News) गण परिषद (अगप) के तीन मंत्रियों ने विरोध स्वरूप इस्तीफा दे दिया था। लेकिन इस बार...

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): केंद्रीय कैबिनेट द्धारा बुधवार को प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी देने के साथ ही असम के विभिन्न संगठनों ने तेज आंदोलन करने की घोषणा कर दी है।

 

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार तड़के नई दिल्ली में अखिल असम छात्र संघ(आसू) और असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद(अजायुछाप) से इस मसले पर हल के लिए बातचीत की थी। लेकिन बातचीत विफल हो गई है। इसके बाद आसू और अजायुछाप ने कहा कि वे इसे नहीं स्वीकारेंगे और आंदोलन करेंगे।

 

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पिछली बार जब कैब लाने की कोशिश हुई तो असम सरकार में भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद (अगप) के तीन मंत्रियों ने विरोध स्वरूप इस्तीफा दे दिया था। लेकिन इस बार अगप अध्यक्ष तथा राज्य के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने कैब का समर्थन कर दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों की शिनाख्त हो भी गई तो वे कहां जाएंगे। कैब के जरिए हम कुछ और बांग्लादेशियों को ले भी लेंगे तो क्या बिगड़ जाएगा जबकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत कैब का शुरु से विरोध कर रहे हैं। वे असम समझौते के खिलाफ जाने वाले किसी भी कदम का विरोध करेंगे। इसलिए पार्टी में दरार पड़ गई है।

 

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आसू के सलाहकार डा.समुज्जवल भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा बांग्लादेशी हिंदुओं का वोट पाने के लिए कैब पारित करेगी इसे हम मान नहीं सकते। असम में छह साल का आंदोलन चला था और असम समझौते में 24 मार्च 1971 का कट ऑफ ईयर तय हुआ था। इस समय तक हम धर्म को आधार बनाए बिना सभी बांग्लादेशियों को लेने के लिए सहमत हो गए पर इसके बाद एक भी बांग्लादेशी को ले नहीं सकते। इस आंदोलन के लिए हमारे 855 शहीद हुए। माताओं-बहनों से बलात्कार हुआ। कितनी पीड़ा हमने सही है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई ने भी कैब के विरोध में जोरदार आंदोलन करने की हुंकार भरी है।राज्य के तीन विश्वविद्यालयों के छात्र संगठनों ने भाजपा के नेता और मंत्रियों का विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है।

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