लॉक डाउन में गुपचुप में संरक्षित वन क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति, जंगल काट डाला

(Assam News )देश में लॉक डाउन (Lock down) से जहां पर्यावरण में सुधार के संकेत मिले हैं, वहीं असम में रिजर्व वन क्षेत्र ( Assam reserve forest ) में कोयला खनन की अनुमति ( Permission of coal mining in forest reserve ) देकर जंगल का सफाया कर दिया गया। असम का दिहिंग पाटकाई अभ्यारण्य में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) ने 98.59 हेक्टेयर जमीन में कोयला खनन की अनुमति प्रदान की है।

By: Yogendra Yogi

Published: 25 May 2020, 05:00 PM IST

गुवाहाटी(असम)राजीव कुमार: (Assam News )देश में कोरोना (Corona ) वायरस के कारण लागू हुए लॉक डाउन (Lock down) से जहां पर्यावरण में सुधार के संकेत मिले हैं, वहीं असम में रिजर्व वन क्षेत्र ( Assam reserve forest ) में कोयला खनन की अनुमति ( Permission of coal mining in forest reserve ) देकर जंगल का सफाया कर दिया गया। असम का दिहिंग पाटकाई अभ्यारण्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय चर्चा में फिलहाल आ गया है।

एनबीडब्ल्यूएल ने अनुमति प्रदान की

कोरोना महामारी के लिए चल रहे लॉकडाउन के बीच ही नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) ने इस अभ्यारण्य की 98.59 हेक्टेयर जमीन में कोयला खनन की अनुमति प्रदान की है। कोल इंडिया लिमिटेड की इकाई नार्थ ईस्टर्न कोल फील्ड को यह जमीन सालेकी के प्रस्तावित रिजर्व वन क्षेत्र से दी गई है। गुपचुप में मिली खनन की स्वीकृति का खुलासा एक आरटीआई से हुआ। इसके बाद शुरु हुए विरोध के मद्देनजर राज्य सरकार की नींद खुली है।

आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा

जहां एनबीडब्ल्यूएल ने इलाके को अखंड बताया है वहीं सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह सामने आया है कि ग्रीन एरिया में भी खनन किया गया है। इसके बाद पर्यावरण से जुड़े संगठनों के समूह ने इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि हाथी रिजर्व को बहुत नुकसान पहुंचा है। इसलिए इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना चाहिए। गैर सरकारी संगठनों द्वारा ड्रोन से फिल्माए गए वीडियो से पता चलता है कि हाथी रिजर्व में ही स्थित नाफाई रिजर्व वन क्षेत्र के जंगल भारी तादाद में नष्ट हो गए हैं।

जंगल का सफाया
असम के पर्यावरणविद् रोहित चौधरी के आरटीआई आवेदन में सूचना सामने आई है कि एनबीडब्ल्यूएल ने सालेकी की वस्तुस्थिति को छिपाया है। उसने इसकी 98.59 हेक्टेयर भूमि को टिकोक ओपेन कास्ट कोयला माइनिंग परियोजना के लिए मोडऩे का प्रस्ताव किया है। चौधरी को जो तथ्य उपलब्ध कराए गए हैं उसके अनुसार इस बीच अखंड बताई गई वन भूमि में 16 हेक्टेयर में खनन कर भी लिया गया है। पेड़ों की सफाई भी कर दी गई है। वैसे टिकोक परियोजना जैव संवेदनशील इलाके में है।

एमेजॉन ऑफ ईस्ट

सालेकी दिहिंग पाटकाई एलीफेंट रिजर्व का हिस्सा है। यह अभ्यारण्य राज्य के डिबू्रगढ़, तिनसुकिया और चराईदेउ जिले में आता है। वर्ष 2004 में इसे अभ्यारण्य घोषित किया गया था। इस अभ्यारण्य को एमेजॉन ऑफ ईस्ट भी कहा जाता है। जैव विविधता में यह अभ्यारण्य समृद्ध है। एनबीडब्ल्यूएल ने जैसे ही खनन की अनुमति प्रदान की तो असम ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध शुरु हुआ है।

अब जागी सरकार
विरोध को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल ने कहा कि सरकार राज्य के पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विकास के नाम पर अपने रुख के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। सरकार ने हमेशा अपनी पारिस्थितिकी के साथ विकास को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने राज्य के वन व पर्यावरण मंत्री परिमल शुक्ल वैद्य को अभ्यारण्य का दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर रिपोर्ट देने को कहा ताकि सरकार इसके बाद आगे का कदम उठा सके।

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Yogendra Yogi Desk
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