अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से मरे सुअरों को पूर्वोत्तर की नदियों में फेंका जा रहा है

( Assam News ) चीन ( China ) द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी ( Bhramputra river ) में बहाए गए मृत सुअरों से जीवित सुअरों में फैला अफ्रीकन स्वाइन फ्लू संक्रामक ( Africian swine flu ) रोग से असम के बाद पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी गंभीर खतरा ( Swine flu danger in North-East ) मंडरा रहा है। यह खतरा शूकर पालकों के मृत सुअरों को नदियों में फेंके ( dead pigs contaminated the River ) जाने से यह खतरा बढ़ गया है।

By: Yogendra Yogi

Published: 05 May 2020, 07:50 PM IST

गुवाहाटी(असम)राजीव कुमार: ( Assam News ) चीन ( China ) द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी ( Bhramputra river ) में बहाए गए मृत सुअरों से जीवित सुअरों में फैला अफ्रीकन स्वाइन फ्लू संक्रामक ( Africian swine flu ) रोग से असम के बाद पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी गंभीर खतरा ( Swine flu danger in North-East ) मंडरा रहा है। यह खतरा शूकर पालकों के मृत सुअरों को नदियों में फेंके ( dead pigs contaminated the River ) जाने से यह खतरा बढ़ गया है। इससे नदियों के जल मे में संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। अरुणाचल प्रदेश से सटे ऊपरी असम के कई जिलों की नदियों में सूअरों के शव देखे गए हैं। इन शूकरों की मृत्यु अफ्रीकन स्वाइन फीवर के चलते हुई हैं। गौरतलब है कि इस बीमारी से करीब ढाई हजार से अधिक सुअरों की ( 2500 pigs died ) मौत हो चुकी है।

रंगानदी और सुबनसिरी में शव मिले
रंगानदी और सुबनसिरी नदी इन शवों को तैरते देखे सकते हैं। नदी की हायसिंथ (गुलाबी तुरसावा) में सूअरों के कई शव फंसे दिखाई दिए। स्थानीय गांववासियों का कहना है कि सूअरों के मरने के बाद इन्हें नदी में फेंक दिया गया है। लखीमपुर जिले के ढकुवाखाना के चारिकोदिया और डांगधोरा नदी में भी मरे सूअरों के शव तैरत देखे गए हैं। लखीमपुर जिले की नदियां अरुणाचल प्रदेश से होकर आती है। लखीमपुर जिले की अरुणाचल प्रदेश से 108 किमी सीमा लगती है। इससे असम के सूअर पालक के समक्ष चुनौती आ गयी है।

सीएम ने दिए परियोजना के निर्देश
इस चुनौती के बीच मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने रानी स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ लाइवस्टॉक एंटरप्रेनियरशिप एंड मैनेजमेंट का दौरा कर वहां के कामकाज का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के पशु चिकित्सा और पशुपालन विभाग तथा वन विभाग के रानी स्थित इंडियन कॉउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के सहयोग से राज्य के सूअरों को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए एक विस्तृत परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के इन दो विभागों को आईसीएआर के नेशनल पिग रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर इस समस्या के हल के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।

इसका कोई टीका नहीं
मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सकों के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों से राज्य के सूअर पालन वाले इलाकों में साफ-सफाई और विषाणुमुक्त करने का कदम उठाने का निर्देश दिया। अफ्रीकन स्वाइन फीवर का अब तक कोई टीका नहीं निकला है, इसलिए साफ-सफाई और संक्रमित न होने वाले सूअरों को अलग से रखकर जो प्रोटोकॉल हैं उन्हें अच्छी तरह मानने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रोग के सामने आने के बाद ही राज्य में पशु विशेषज्ञों को लेकर एक गु्रप का गठन किया गया है। गौरतलब है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर अफ्रीका महादेश में फैला सूअरों का एक विशेष रोग है। 1921 में कीनिया और इथोपिया में इस बीमारी की शुरुआत हुई थी।

 

वन्यजीवों की जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य में सूअरों को जो बीमारी हुई है उसको लेकर केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने सोमवार को सूअर पालकों से इस बारे में विस्तार से चर्चा की है और एक रोडमेप तैयार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के वन्य जीवों को लेकर भी जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। वन और पशुपालन विभाग को राज्य के चिडिय़ाघर और राष्ट्रीय उद्यानों के वन्य जीवों का स्वास्थ्य परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। सूअर की तरह अन्य पशु-पक्षियों में यह रोग न फैले इसके लिए सतर्क रहने को कहा गया है।

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