इलेक्शन स्पेशल...डिब्रुगढ़ में चाय जनगोष्ठी के मतदाता होंगे निर्णायक, कांग्रेस व भाजपा में कड़ा मुकाबला

2014 के पहले चाय जनगोष्ठी के मतदाता कांग्रेस के वोटबैंक थे लेकिन 2014 में यह स्थिति बदली...

By: Prateek

Updated: 10 Apr 2019, 08:48 PM IST

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): असम की प्रतिष्ठित लोकसभा सीट डिब्रुगढ़ में देश की आजादी के बाद हुए 14 लोकसभा चुनाव में 12 बार कांग्रेस विजयी हुई है। इस सीट पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होगा। डिब्रुगढ़ संसदीय सीट काफी आर्थिक संसाधनों वाली सीट है। इस सीट के तहत आने वाले इलाकों में चाय,खनिज तेल,गैस,उर्वरक और कोयला पाया जाता है। पर इन इलाकों में समस्याएं भी अनेक हैं। ब्रह्मपुत्र की बाढ़ व कटाव की समस्या सबसे बड़ी है। इस बार इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा ने निवर्तमान सांसद रामेश्वर तैली को फिर से मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने पूर्व में पांच बार सांसद रहे पवन सिंह घटोवार को टिकट दिया है। दोनों चाय जनगोष्ठी से आते हैं। इसलिए इस बार चाय जनगोष्ठी के मतदाता जिसके पक्ष में होंगे, वही चुनाव जीतेगा।

 

वर्ष 2004 में घटोवार को हराकर अगप के सर्वानंद सोनोवाल इस सीट से विजयी हुए थे। अब सोनोवाल भाजपा में हैं तथा असम के मुख्यमंत्री हैं। 2014 में पहली बार इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार रामेश्वर तैली विजयी हुए थे।

 

डिब्रुगढ़ संसदीय सीट में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। ये हैं-

मोरान, डिब्रुगढ़, लाहोवाल, दुलीयाजान, टिंगखांग, नहारकटिया, तिनसुकिया, डिग्बोई और मार्घेरिटा। इसमें से आठ पर भाजपा का कब्जा है। एक सीट पर भाजपा की सहयोगी अगप का कब्जा है। डिग्बोई विधानसभा सीट पर अगप का विधायक है। इस पर कुल मतदाताओं की संख्या 12,97,671 है। सीट पर असमिया मतदाताओं की संख्या छह लाख, चाय जनगोष्ठी के मतदाता 3.4 लाख, बंग्ला भाषी मतदाता 1.2 लाख, मुस्लिम मतदाता 1.1 लाख, नेपाली मतदाता 60 हजार, हरिजन 40 हजार और अन्य मतदाता 18-20 हजार है। चाय जनगोष्ठी के 30 प्रतिशत मतदाता निर्णायक होंगे। ये किसी एक को ही चुनते हैं। वहीं 46 प्रतिशत असमिया मतदाता के मत विभाजित हो जाते हैं।

 

2014 के पहले चाय जनगोष्ठी के मतदाता कांग्रेस के वोटबैंक थे लेकिन 2014 में यह स्थिति बदली। उस दौरान मोदी हवा के चलते इस सीट पर भी भाजपा ने जीत दर्ज की। वर्ष 1977 से कांग्रेस ने इस सीट से चाय जनगोष्ठी के नेता को टिकट दिया तो वे जीतते आए। पर 2004 में अगप ने जीत पाई। क्योंकि सर्वानंद सोनोवाल सुप्रीम कोर्ट में आईएमडीटी एक्ट के खिलाफ किया गया मुकदमा जीत गए। उन्हें जातीय नायक का खिताब मिला। आसू ने भी उनकी जीत में मदद की। वे आसू से आते थे और आईएमडीटी को खारिज कराना आसू का उद्देश्य था पर भाजपा ने कांग्रेस की नीति को ही अपनाकर 2014 में चाय जनगोष्ठी के रामेश्वर तैली को मैदान में उतारा और जीत पाई। 2014 में तैली ने घटोवार को 1,85,347 मतों से पराजित किया।

 

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