BJP की सहयोगी पार्टी में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर रार, दिग्गज नेता ने खोला मोर्चा

विधेयक (Citizenship Amendment Bill) के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले नेता का कहना है कि (Assam Gana Parishad) अगप की लाइन कैब का विरोध करने वाली थी। लेकिन अब अगप का नेतृत्व सत्ता का भूखा हो गया है...

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को लेकर असम गण परिषद (अगप) में सिर फुटौव्वल शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री तथा अगप के संस्थापक अध्यक्ष रहे प्रफुल्ल कुमार महंत खुद अपनी पार्टी के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगप की लाइन कैब का विरोध करने वाली थी। लेकिन अब अगप का नेतृत्व सत्ता का भूखा हो गया है।

 

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मालूम हो कि राज्य के सत्तारुढ़ भाजपा गठबंधन में अगप भी शामिल है। उसके तीन मंत्री हैं।जब पिछली बार केंद्र की भाजपानीत सरकार राज्यसभा में कैब लाने वाली थी तब अगप के तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से कैब कानून में तब्दील नहीं हो पाया। बाद में अगप के मंत्री फिर काम पर लौट आए। लेकिन इस बार संसद के सत्र में कैब आने की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। अगप के मंत्री पद पर बने हुए हैं। वे कैब के बारे में खामोश हैं। इन मंत्रियों में खुद अगप अध्यक्ष अतुल बोरा, कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंत और फणिभूषण चौधरी है।

 

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प्रफुल्ल कुमार महंत ने खोला मोर्चा...

 

BJP की सहयोगी पार्टी में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर रार, दिग्गज नेता ने खोला मोर्चा

प्रफुल्ल कुमार महंत ने कहा कि अगप का नेतृत्व भले ही इसका विरोध न करे पर अगप इस विधेयक का विरोध करते रहेगी। असम समझौते के खिलाफ जाने वाले कैब का अगप नेतृत्व विरोध करेगा या नहीं, यह मैं नहीं कह सकता। पर मेरे लिए जनता का हित और असम का हित पहले है। अगप ने कैब का विरोध करने का सामूहिक फैसला ले रखा है। अगप के मंत्री इस पर क्यों नहीं बोल रहे हैं, इसके बारे में मैं अवगत नहीं हूं। वे सत्तारुढ़ पार्टी से मिलकर सरकार में अपनी सीट सुरक्षित रखना चाहते हैं और जनता के हितों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। पर उन्हें मंत्रिमंडल के सदस्य के तौर पर इसका विरोध करना चाहिए था।

 

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हाल ही में अगप ने अपनी छात्र ईकाई का गठन किया है। इसमें भी प्रफुल्ल महंत को आमंत्रित नहीं किया गया था। महंत ने कहा कि कैब को जो विरोध कर रहे हैं पार्टी उन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा रही है। उन्होंने कहा कि बुलाने से भी मैं इसमें नहीं जाता। नए छात्र संगठन के बजाए अखिल असम छात्र संघ(आसू) को शक्तिशाली किया जाना चाहिए था। जब मैं मुख्यमंत्री था तो आसू ने मुझे काले झंडे दिखाए थे फिर भी छात्र इकाई का गठन नहीं किया था। उल्लेखनीय है कि आसू ने छह साल असम आंदोलन किया और उसके बाद 1985 में असम समझौता हुआ। इस समझौते के बाद ही अगप का जन्म हुआ।

 

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Prateek Desk
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