सिलचर में सुष्मिता व राजदीप के बीच है मुकाबला, कांग्रेस से सीट छीनने को बेताब भाजपा, कांग्रेस के सामने जीत दोहराने की चुनौती

सिलचर में सुष्मिता व राजदीप के बीच है मुकाबला, कांग्रेस से सीट छीनने को बेताब भाजपा, कांग्रेस के सामने जीत दोहराने की चुनौती
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Prateek Saini | Publish: Apr, 16 2019 02:34:54 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

1991 में पहली बार भाजपा के कवींद्र पुरकायस्थ यहां से चुनाव जीते थे...

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): असम की सिलचर संसदीय सीट पर इस बार मुकाबला मजेदार है। भाजपा यह सीट कांग्रेस से छीनने के लिए जोरदार प्रयास कर रही है। वहीं कांग्रेस भी इस सीट को बचाने के लिए जी-जान से जुटी है। इस सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को चुनाव होंगे। इस सीट की निवर्तमान सांसद सुष्मिता देब हैं। सुश्री देब अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं। सिर्फ 2004 के लोकसभा चुनाव को छोड़कर इस सीट पर 1991 से अब तक लगभग एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस जीती है। 1991 में पहली बार भाजपा के कवींद्र पुरकायस्थ यहां से चुनाव जीते थे। 1996 में कांग्रेस के संतोष मोहन देब चुनाव जीते। 1998 में फिर पुरकायस्थ तो 1999 में देब चुनाव जीतकर सांसद बने। 2009 में पुरकायस्थ जीते और संतोष मोहन देब ने 2014 के चुनाव में अपनी बेटी सुष्मिता देब के लिए यह सीट छोड़ दी। सुष्मिता ने 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बाद भी सिलचर संसदीय सीट से जीत दर्ज की।


सुष्मिता के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी प्रचार कर चुकी हैं वहीं भाजपा के उम्मीदवार राजदीप राय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार कर चुके हैं। इस सीट से जीतने वाले कांग्रेस व भाजपा के सांसद केंद्र सरकार में मंत्री बनते आए हैं। कांग्रेस के संतोष मोहन देब भी कांग्रेस की सरकार में और कवींद्र पुरकायस्थ अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्ववाली राजग सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं। सिलचर संसदीय सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। ये हैं,सिलचर, सोनारी, धौलाई, उदारबंध, लखीपुर, बरखोला और काटीगोड़ा। इनमें सिर्फ लखीपुर को छोड़कर बाकी में भाजपा के विधायक हैं। लखीपुर में कांग्रेस का विधायक है।संसदीय सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 11,89,667 है। इनमें 6,13,236 पुरुष मतदाता तो 5,76,353 महिला मतदाता हैं।

 

इन 13 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर

चुनावी मैदान में कुल 13 उम्मीदवार हैं। कांग्रेस की सुष्मिता देब, भाजपा के राजदीप राय के अलावा नेशनल पीपुल्स पार्टी की नाजिया यास्मीन, ऑल इंडिया फारवार्ड ब्लॉक के बदरुल इस्लाम बरभुइयां, तृणमूल कांग्रेस के हितब्रत राय, एसयूसीआई (सी) के श्याम देव कुर्मी, निर्दलीय शुवदीप दत्त, आशीताव दत्त, पूर्णलाल ग्वाला, नजमुल हक लश्कर, आशुतोष भट्टाचार्य, महेंद्र चंद्र दास और शबींद्र दास शामिल हैं।


वर्ष 2014 के चुनाव में कवींद्र पुरकायस्थ कांग्रेस उम्मीदवार सुष्मिता देब के हाथों 35 हजार 241 वोटों से हारे थे। उस वक्त इस संसदीय सीट पर एआईयूडीएफ के उम्मीदवार कुतब अहमद मजुमदार थे। मजुमदार को 85,530 वोट मिले थे।इस बार मैदान में एआईयूडीएफ नहीं है। पर नेशनल पीपुल्स पार्टी की नाजिया य़ास्मीन, ऑल इंडिया फारवार्ड ब्लॉक के बदरुल इस्लाम बरभुइंया और निर्दलीय नजमुल हक लश्कर मुसलमानों के वोटों का कितना विभाजन कर पाते हैं उसी पर सुष्मिता देब और राजदीप राय की जीत निर्भर करेगी।

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