भाजपा नेता ने ही की मोदी व सोनोवाल की खिलाफत

भाजपा नेता ने ही की मोदी व सोनोवाल की खिलाफत
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| Publish: Jul, 02 2018 02:44:46 PM (IST) Guwahati, Assam, India

भाजपा के सत्तासीन नेता ने ही अपने अधिकारी-कर्मचारियों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की बैठक में जाने पर रोक लगा दी है

(राजीव कुमार की रिपोर्ट )
गुवाहाटी। भाजपा के सत्तासीन नेता ने ही अपने अधिकारी-कर्मचारियों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की बैठक में जाने पर रोक लगा दी है। कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलीराम रंग्हांग ने अपने कर्मचारियों एवं अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केन्द्र और राज्य सरकार को किसी भी कार्य में सहयोग देने के लिए उनकी अनुमति ली जाए।

 

 

अधिकारी और कर्मचारियों को नोटिस जारी

 

 

रंग्हांग के एक निर्देश के अनुसार यदि किसी ने सभा में हिस्सा लिया और सहयोग किया तो वह निर्देश को नहीं मानने का दोषी होगा। फिलहाल कार्बी आंग्लांग स्वशासी परिषद पर भाजपा का कब्जा है। गत 27 जून को रंग्हांग के केएएसीईएम 2015-16 के निर्देशानुसार स्वशासी परिषद के प्रधान सचिव ने कार्बी आंग्लांग और पश्चिम कार्बी आंग्लांग जिले के अधिकारी और कर्मचारियों के लिए यह नोटिस जारी किया है। संविधान के छठे अनुच्छेद के अनुसार राज्य में तीन स्वशासी परिषद डिमा हसाओ, कार्बी आंग्लांग और बीटीएडी हैं। डिमा हसाओ और कार्बी आंग्लांग में भाजपा शासित परिषद है जबकि बीटीएडी में बीपीएफ शासित परिषद है। डिमा हसाओ और बीटीएडी परिषद भाजपा नेतृत्ववाली केंद्र व राज्य सरकार को सहयोग कर रही है वहीं भाजपा के नेतृत्ववाली कार्बी आंग्लांग स्वशाषी परिषद ने मोदी-सोनोवाल सरकार को सहयोग नहीं करने का फैसला किया है।

 

 

तुलीराम हैं असंतुष्ट

 

 

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने 26 अप्रेल को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इसमें उन्होंने डिफू के विधायक तथा परिषद के पूर्व मुख्य कार्यकारी सदस्य सुमो रंग्हांग को मंत्री बनाया। सोनोवाल ने सुमो रंग्हांग को पहाड़ी विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी। कहा जाता है कि इसी से तुलीराम रंग्हांग नाराज हैं। वे चाहते थे कि पहाड़ी तीन जिलों से किसी को मंत्री नहीं बनाया जाए। इसके बजाए अपने करीबी राज्य के वित्त व स्वास्थ्य मंत्री डा. हिमंत विश्व शर्मा के नजदीकी राज्य मंत्री पीयूष हजारिका को ही यह प्रभार दिया जाए। इससे एक तरह उस विभाग पर तुलीराम रंग्हांग का ही कब्जा होता। लेकिन ऐसा नहीं होने के चलते वे असंतुष्ट हैं और सहयोग करना नहीं चाहते। अब देखना है कि भाजपा इस पर क्या रुख करती है।

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