चीन से आए वायरस से मरने वाले सुअरों की संख्या 16 हजार पहुंची

(Assam Newsa) असम में विपदाओं का दौर जारी है। कोरोना, लॉक डाउन, बाढ़ के हालात और स्वाइन फीवर ( Swine fever deaths )से राज्य के लोग और सरकार त्रस्त है। असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) से अब तक 16 हजार से अधिक सुअरों ( 16 thousand pigs died ) की मौत हो चुकी है। राज्य के तैंतीस में से दस जिलों में स्वाइन फीवर के प्रकोप इनकी मौत हुई है।

By: Yogendra Yogi

Published: 27 May 2020, 07:52 PM IST

गुवाहाटी(असम)राजीव कुमार: (Assam Newsa) असम में विपदाओं का दौर जारी है। कोरोना, लॉक डाउन, बाढ़ के हालात और स्वाइन फीवर ( Swine fever deaths )से राज्य के लोग और सरकार त्रस्त है। असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) से अब तक 16 हजार से अधिक सुअरों ( 16 thousand pigs died ) की मौत हो चुकी है। राज्य के तैंतीस में से दस जिलों में स्वाइन फीवर के प्रकोप इनकी मौत हुई है।

चीन से आया था वायरस

गौरतलब है कि चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी में मरे हुए सुअरों को बहाया था। जिससे असम के सुअरों में यह संक्रामक बीमारी फैल गई। असम सरकार ने एएसएफ प्रभावित जिलों को छोड़कर सुअरों और उसके मांस की बिक्री पर लगा प्रतिबंध कुछ शर्तों के साथ हटा लिया है। सुअरों की बीमारी से मौत के बाद राज्य के पशुपालन विभाग ने 25 अप्रैल को मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।

विशेषज्ञों की सलाह से लिया निर्णय

राज्य के पशुपालन मंत्री अतुल बोरा का कहना है कि हमने पशुपालन विशेषज्ञ और विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद इनकी बिक्री पर कुछ ढिलाई देने का फैसला किया। हमें पूरी आशा है कि इससे शूकर पालकों को काफी राहत मिलेगी। सिर्फ प्रभावित जिलों के एएसएफ के अभिकेंद्रों में अंतर जिला और अंतरराज्यीय बिक्री को के लिए नहीं खोला गया है। राज्य सरकार ने राज्य के सात जिलों को एएसएफ का अभिकेंद्र घोषित किया है। ये हैं-विश्वनाथ, धेमाजी, शिवसागर, जोरहाट और कामरुप(मेट्रो)। इन अभिकेंद्रों से एक किमी के दायरे को संक्रमित जोन और दस किमी के जोन को सर्विलेंस जोन माना गया है।

एसोसिएशन ने किया स्वागत

नार्थ ईस्ट पिग फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार बसुमतारी का कहना है कि हम सरकार के कदम का स्वागत करते हैं। लेकिन प्रभावित जिलों में बिक्री पर कड़ाई से निगरानी रखी जानी चाहिए। प्रभावित जिलों के शूकर पालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही नमूने अधिक से अधिक जांच के लिए भेजे जाने चाहिए ताकि संक्रमण ज्यादा न फैले। वर्ष 2019 की जनगणना के अनुसार राज्य में सुअरों की संख्या 21 लाख से अधिक है।

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