संयुक्त राष्ट्रसंघ ने असम में बाढ़ की विभीषिका में मदद के लिए बढ़ाया हाथ

(Assam News ) भयानक बाढ़ की (Flood in Assam ) विपदा से जूझ रहे असम की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ ने पेशकस (UNO proposal for help ) की है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा है कि असम बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है। करीब 40 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक बाढज़नित हादसों में 189 लोगों की मौत हो चुकी है।

By: Yogendra Yogi

Updated: 21 Jul 2020, 06:16 PM IST

गुवाहाटी(असम): (Assam News ) भयानक बाढ़ की (Flood in Assam ) विपदा से जूझ रहे असम की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ ने पेशकस (UNO proposal for help ) की है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने केंद्र सरकार को इस मदद की पहल करते हुए सहयोग करने का प्रस्ताव दिया है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा है कि असम बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है। करीब 40 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक बाढज़नित हादसों में 189 लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ ने यह निर्णय लिया है कि यदि भारत को मदद की जरुरत होगी तो इसके लिए तैयार हैं।

5 एकसींग वाले गेंडों की मौत
असम में भारी बारिश के कारण काफी तबाही हो रही है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ का असर आम लोगों के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी पड़ा है। काजीरंगा नेशनल पार्क भी लगभग 90 प्रतिशत तक बाढ़ की चपेट में आ चुका हैं। एक सींग वाले 5 गेडों की भी मौत हो चुकी है। काजीरंगा नेशनल पार्क में अब तक कुल 113 जानवरों की मौत हो चुकी है और 140 जानवरों को बचाया गया है। एनडीआरएफ की टीमें असम में तैनात हैं। वन्यजीवों आस-पास के गांवों में शरण लिए हुए हैं। पिछले दिनों बाढ़ से बचने के लिए एक बाघ घर की किचन में घुस गया था। इसे वन विभाग ने बेहोश करके निकाला था।

24 जिलों के 24 लाख लोग प्रभावित

असम में बाढ़ की वजह से स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 24 जिलों में 24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, कामरूप महानगर जिले में गुवाहाटी के पास सोनापुर में एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस साल राज्य भर में बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 111 हो गई है, जिनमें से 85 लोग बाढ़ से संबंधित घटनाओं में मारे गए और 26 लोगों की जान भूस्खलन में चली गई।असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने जल संसाधन मंत्री को निर्देश दिए हैं कि कि पाहुमरा नदी का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद क्षेत्र में बाढ़ और कटाव का स्थायी समाधान निकाला जाए। सोनोवाल ने कहा कि राज्य में हर साल बाढ़ और कटाव से तबाही होती है क्योंकि हर साल लगभग 9,000 हेक्टेयर भूमि इससे बर्बाद हो जाती है।

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