इलेक्शन स्पेशल...लखीमपुर में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर

इलेक्शन स्पेशल...लखीमपुर में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर

Prateek Saini | Publish: Apr, 09 2019 04:08:30 PM (IST) Guwahati, Kamrup Metropolitan, Assam, India

लखीमपुर संसदीय सीट पर काफी समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा था...

(गुवाहाटी,राजीव कुमार): असम की उत्तर लखीमपुर संसदीय सीट पर इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगा। भाजपा ने इस सीट से निवर्तमान सांसद प्रदान बरुवा(53) को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने ठेकेदार अनिल बरगोहाईं (51) को टिकट दिया है।

 

लखीमपुर संसदीय सीट पर काफी समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा था। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी हवा का असर इस संसदीय सीट पर भी पड़ा और तब इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल विजयी हुए। 2014 के चुनाव में सोनोवाल ने लगातार तीन बार की सांसद रानी नराह को हराया। सोनोवाल ने नराह को 2,92,138 मतों से हराया।

 

रानी नराह ने ही 1999 के लोकसभा चुनाव में अगप के उम्मीदवार रहे सर्वानंद सोनोवाल को पराजित किया था। 2014 में मोदी हवा ऐसी थी कि अगप को भी इस सीट से हार का सामना करना पड़ा था। 2014 में अगप का भाजपा से गठबंधन नहीं था। पर इस बार के चुनाव में अगप-भाजपा का गठबंधन है।

 

लोकसभा संसदीय सीट में नौ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से सात पर ही गठबंधन की पार्टियों के विधायक हैं। एक सीट पर कांग्रेस और एक सीट पर एआईयूडीएफ का कब्जा है। दुमदुमा सीट पर कांग्रेस और नावबैचा सीट पर एआईयूडीएफ का विधायक है। वहीं पांच सीट पर भाजपा, एक पर अगप और एक पर भाजपा की सहयोगी गण शक्ति का कब्जा है। भाजपा के माजुली, ढकुवाखाना, धेमाजी, चबुवा और सदिया में विधायक हैं। उधर लखीमपुर में अगप और जोनाई में गण शक्ति का विधायक है।

 

मजे की बात है कि 1996 से 2009 तक के लोकसभा चुनाव में इस सीट से अगप या फिर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी होते आए हैं। वर्ष 1996 में अगप के उम्मीदवार डा.अरुण शर्मा इस सीट से विजयी हुए थे जबकि 1998 और 1999 में कांग्रेस की रानी नराह जीती थी। वहीं 2004 में डा.शर्मा अगप की ओर से जीते। 1967 से 1991 तक लगभग इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। सिर्फ 1985 के लोकसभा चुनाव में गोकुल सैकिया निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए थे।

 

इस लोकसभा सीट से भाजपा और कांग्रेस के अलावा नौ अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें एनसीपी, माकपा, एसयूसीआई(यू), असम जन मोर्चा, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल और निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। जब सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया। 2016 में हुए उपचुनाव में भाजपा के प्रदान बरुवा इस सीट से जीते। 2011 के विधानसभा चुनाव में बरुवा कांग्रेस की टिकट पर जोनाई सीट से विजयी हुए थे। पर 2015 में वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बार इस संसदीय सीट पर बरुवा और बरगोहाईं के बीच कड़ा मुकाबला होगा।इस सीट के अधिकांश हिस्से में मानसून के दौरान बाढ़ भयावह रुप लेती है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 17,04,447 है। कहना मुश्किल है कि भाजपा का उम्मीदवार जीतेगा या कांग्रेस का, क्योंकि दोनों में टक्कर कांटे की है।

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