सहालग से शहर को मिलना था 300 करोड़ का व्यापार, कोरोना की चढ़ा भेंट

कोरोना संक्रमण की दस्तक के साथ ही शहर का कारोबार बिल्कुल चौपट सा हो गया है। कोरोना संक्रमण ने व्यपारी की कमर तोड़कर रख दी है। गर्मियों के तीन माह में बड़ा सहालग होता...

ग्वालियर. कोरोना संक्रमण की दस्तक के साथ ही शहर का कारोबार बिल्कुल चौपट सा हो गया है। कोरोना संक्रमण ने व्यपारी की कमर तोड़कर रख दी है। गर्मियों के तीन माह में बड़ा सहालग होता है। इन तीन माह में शहर के व्यापारी 300 करोड़ से ज्यादा का कारोबार करते लेकिन संक्रमण के चलते लगे लॉकडाउन ने व्यापारी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस दौरान या तो सीमित लोगों की मौजूदगी में शादियां हुईं या फिर अधिकतर लोगों ने शादियां हीं कैंसिल कर दीं, जिसका खामियाजा शहर के व्यापारियों को उठाना पड़ा। जहां एक और व्यापारी पिछले साल लगे लंबे लॉकडाउन से पीडि़त था वहीं इस साल भी उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस बार भी 15 अप्रेल तक जो कुछ थोड़ा बहुत कारोबार हो सका इसके बाद जब बड़ा सहालग आया कोरोना कफ्र्यू लग गया और शादियों पर भी तमाम पाबंदियां लगने से यह कारोबार फिर से चौपट हो गया।

125 करोड़ का होता सराफा व्यापार
सराफा कारोबारी प्रवीण जैन ने बताया कि गर्मी में बड़ा सहालग होता है कुछ तिथियां तो ऐसी होती है जिसमें शादियों की फरमार रहती है। पिछले सालों की बात करें तो सहालग के महीनों में सराफा कारोबार करीब 100 से 125 करोड़ तक का पहुंच जाता है, लेकिन कोरोना के चलते पिछले साल गर्मियों का सहालग टोटल लॉकडाउन में निकल गया। इस साल भी शहर में ज्यादा शादियां नहीं हुईं जिससे सराफा कारोबार को काफी धक्का लगा था। इस साल अच्छा खासा सहालग था सोचा था कि पिछले साल की कसर पूरी हो जाएगी लेकिन 15 अप्रेल के बाद कारोबार का सही समय था ऐसे समय में कोरोनो की दूसरी लहर के चलते कोरोना कफ्र्यू लग गया और शादियों पर भी तमाम बंदिशें लग गई जिसके चलते कई लोगों ने शादियां कैसिंल कर दी तो बहुत सी शादियां सिमित होकर रह गई। जिससे कारोबार फिर से चौपट हो गया। जैन ने बताया कि शादियों की खरीदारी होली के बाद शुरू ही हुई थी और 15 अप्रेल तक कुल सराफा बाजार का कारोबार 7 से 8 करोड़ ही हो पाया था इसके बाद प्रतिष्ठान बंद हो गए।


100 करोड़ की होती कपड़ों की खरीदारी
कपड़ा कारोबारी आशीष जैन ने बताया कि गर्मियों के सलागग के दौरान कपड़ा कारोबार काफी उठता है। सामान्य स्थितियों में यह कारोबार करीब 100 करोड़ के करीब पहुंच जाता है। दो साल से गर्मियों के सहालग में कपड़ा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पिछले साल गर्मियों का सहालग निल की स्थिति में रहा। दीपावली पर अवश्य करीब 25 करोड़ का कारोबार हुआ था इसके बाद कारोबारियों को उम्मीद इस साल के सहालग पर थी और जब सहालग का समय आया तब हालात पिछले साल से भी ज्यादा बिगड़ गए। जैन ने बताया कि गर्मियों के सहालग के लिए फरवरी महीने से ही ज्यादातर कारोबारियों ने नया स्टॉक मंगा लिया था, लेकिन अब यह माल दुकानों व गोदामों के अंदर तक ही सीमित है।

किराना कारोबार से मिलते 80 करोड़
दाल बाजार के किराना व्यापारी मनीष बांदिल ने बताया कि सहालग के दौरान एक महीने का ही किराने का कारोबार 80 करोड़ के आसपास हो जाता है, लेकिन इस बार शादियों में 50 लोगों की अनुमति के चलते माल नहीं बिक पाया। इसके अलावा शादियां या तो आगे की तिथि में बढ़ा दी या फिर कैंसिल कर दी जिससे किराना कारोबार उठ नहीं पाया। वर्तमान में केवल 8 से 10 करोड़ का किराने का कारोबार हो रहा है वह भी शहर की खेरिज दुकानों से हो रहा है। किराना कारोबारी बांदिल ने बताया कि पिछले साल भी किराना कारोबारियों को सहालग के दौरान घाटा उठाना पड़ा था।


आमदनी हो नहीं रही खर्चा पूरा
कारोबारियों ने बताया कि प्रतिष्ठान बंद चल रहे हैं आमदनी हो नहीं पा रही है लेकिन खर्चें में कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि जिन कारोबारियों की दुकानें स्वयं की है उन्हें तो किराया नहीं देना पड़ता लेकिन जो लोग किराए की दुकानें लिए हुए हैं उन्हें दुकान का किराया, बंद प्रतिष्ठान के बाद भी बिजली का बिल और कर्मचारियों का वेतन घर बैठे होने के बाद भी देना पड़ रहा है। कारोबारियों ने बताया कि कर्मचारियों को वेतन देना मजबूरी है क्योंकि अगर कर्मचारियों ने छोड़ दिया तो अच्छे कर्मचारी फिर नहीं मिलते।

रिज़वान खान Desk
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