पंजीयन न करने पर स्टेट बार काउंसिल पर 5 हजार रुपए जुर्माना

पंजीयन न करने पर स्टेट बार काउंसिल पर 5 हजार रुपए जुर्माना

Rahul rai | Publish: Sep, 16 2018 07:08:09 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 07:08:10 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

न्यायालय ने बार काउंसिल को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता का एक माह में पंजीयन कर सनद प्रदान की जाए।

ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने स्टेट बार काउंसिल पर बीएम महाजन का पंजीयन नहीं किए जाने पर पांच हजार रुपए का जुर्माना किया है। साथ ही जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने बार काउंसिल को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता का एक माह में पंजीयन कर सनद प्रदान की जाए।

 

न्यायमूर्ति शील नागू ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद याचिकाकर्ता के नियमों के तहत एक माह के अंदर नामांकन करे। वहीं याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह बार काउंसिल द्वारा उनका आवेदन लटकाए रखने के कारण जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति के लिए निचली अदालत में अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है।

 

महाजन द्वारा एलएलबी करने के बाद बार काउंसिल के समक्ष पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। उनके खिलाफ थाना ग्वालियर में धारा 452,352,323, 294, के तहत दर्ज आपराधिक प्रकरण वर्ष 2006 से अदालत में लंबित है। इस मामले में न तो उन्हें बरी किया गया है, न ही सजा सुनाई गई है। इस प्रकरण के कारण बार काउंसिल ने महाजन का पंजीयन नहीं किया और उन्हें सनद देने से इंकार कर दिया।

 

पंजीयन न करना नियमों के विरुद्ध
इसके खिलाफ महाजन ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि बार काउंसिल ने उनका पंजीयन नहीं किया है, जो नियमों के विरुद्ध है। एडवोकेट एक्ट के अनुसार यदि किसी को आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है तब उसका पंजीयन नहीं किया जा सकता है, जबकि उनके मामले में फैसला ही नहीं आया है। प्रकरण के लंबित रहने के दौरान उनके द्वारा एलएलबी की डिग्री प्राप्त की गई है, इसलिए उनका पंजीयन कर उन्हें सनद प्रदान की जाए।

 

पांच लाख क्षति पूर्ति दिलाने का निवेदन
याचिकाकर्ता महाजन द्वारा प्रस्तुत याचिका में उन्हें बार काउंसिल से पांच लाख रुपए क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के आदेश दिए जाने का निवेदन भी किया गया था। याचिका में कहा गया कि पंजीयन न कर उनके अधिकारों का हनन किया गया है।

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