4 साल में नहीं बन पाईं 6 किलोमीटर की सडक़ें

-शहर की दो सडक़ें जिनके लिए विधायक से लेकर आम जन तक उठा चुके हैं आवाज, फिर भी नहीं हो सका निमाज़्ण

ग्वालियर। शहर की आधी आबादी को हाइवे से जोडऩे वाली दो मुख्य सडक़ों को बनाने में प्रशासन, पीडबल्यूडी और नगर निगम चार साल से उदासीनता अपना रहा है। लगातार उपेक्षा, उदासीनता और लापरवाही से हाइवे से जोडऩे वाली हुरावली की दो किलोमीटर सडक़ अब गड्ढों में तब्दील हो गई है। जबकि जड़ेरुआ होकर मुरार को हाइवे से जोडऩे वाली सडक़ को भी बनाने में चार साल से उदासीनता अपनाई जा रही है। इसके साथ ही बांध से गौशाला को जोडऩे वाली सडक़ का निर्माण नहीं हो सका है। जिसकी वजह से गायों को लेकर आने वाले नगर निगम के वाहनों के पलटने का खतरा लगातार बना रहता है। बता दें कि जड़ेरुआ की सडक़ बनाने के लिए लगभग साढ़े तीन साल पहले त्यौहार के समय ही कार्यवाही हुई थी, जिसमें वर्षों से रह रहे तमाम लोगों की ग्रहस्थी उजड़ गई थी। खास बात यह है जिस उद्देश्य से इन अतिक्रमणों को हटाया गया था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है।


इन सडक़ों पर होना है काम

हुरावली
-सचिन तेंदुलकर मार्ग चौराहे से ग्वालियर-झांसी हाइवे तक

शहर को हाइवे से जोडऩे वाले मुख्य मार्ग को सही करने के लिए न नगर निगम ने कोई बेहतर कदम उठाया है और न पीडब्ल्यूडी ने इस सडक़ पर ढंग का काम किया है। बीते पांच साल में यह सडक़ बनी और बनने के बाद उखड़ भी गई। अब स्थिति यह है कि चौराहे से हाइवे तक हर पांच मीटर पर एक बड़ा गड्ढा है। यह गड्ढे भी ऐसे हैं, जिनमें छोटी कारों के चैंबर तक जमीन से टकरा जाते हैं। परिणाम यह है कि शहर से बाहर जाने वाले यातायात के दबाव को कम करने में सक्षम इस सडक़ पर वाहन न के बराबर निकलते हैं। खास बात यह है कि सामान्य वाहन चालकों द्वारा सडक़ की उपेक्षा किए जाने के बाद इसका इस्तेमाल रेत और गिट्टी लेकर शहर में आने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर सबसे ज्यादा कर रहे हैं।


जड़ेरुआ

-6 नंबर चौराहे से जड़ेरुआ तक
-मुरार से मुरैना, भिंड की ओर जाने वाले वाहनों का दबाव गोला का मंदिर या बड़ागांव की सडक़ से कम करने के लिए 6 नंबर चौराहे से जड़ेरुआ होकर सीधे हाइवे को जोडऩे वाली लिंक रोड बनाने की प्लानिंग हुई थी। इस प्लानिंग के बाद चौराहे से लेकर जड़ेरुआ बांध तक सडक़ के एक ओर हुए लगभग 130 स्थाई अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हुई थी। इस कार्यवाही के बाद लगभग 500 मीटर सडक़ पर गिट्टी बिछाई और आगे की सडक़ को जस का तस छोड़ दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध से पहले एक स्कूल, दो रास्तों के बीच हुए अतिक्रमण और एक नेता के मकान के हिस्से को बचाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने कार्रवाई को अटका दिया है।


-यातायात को व्यवस्थित करने का काम हम कर रहे हैं, इन सडक़ों के निर्माण में कहां बाधा है, उसका भी पता लगाएंगे। हुरावली और जड़ेरुआ दोनों ही सडक़ों की फाइलों को मंगवाकर परीक्षण करेंगे।

जयति सिंह, एसडीएम-मुरार

Dharmendra Trivedi
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