तीन साल से चल रहे 85 करोड़ के प्रोजेक्ट, एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं

महाराज बाड़े की खूबसूरती को निखारने में कछुआ गति, कई की डेडलाइन निकली
-डिजिटल लाइब्रेरी, प्लेनोटोरियम जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पूरे होने पर मिलेगी शहर को नई पहचान

ग्वालियर। शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़े को स्मार्ट बनाने के लिए चल रहे 85 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स की गति बहुत धीमी है। स्मार्ट सिटी द्वारा करीब तीन साल पहले शुरू किए गए इन प्रोजेक्ट्स में यातायात सुधार, बाजार व्यवस्था, सुरक्षा एवं पुरातात्विक महत्व की इमारतों को संरक्षित करने का प्लान था, लेकिन धीमी गति के कारण एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है, जबकि कुछ की डेडलाइन भी निकल चुकी है। जनप्रतिनिधि, व्यवसाई और प्रशासन की आपसी सहमति न बनने के कारण न तो यातायात व्यवस्थित हुआ, न बाजारों को नए कलेवर में लाया जा सका है।

बाजार : सहमति बनाने के प्रयास
-33 करोड़ रुपए की लागत से बाड़े के सबसे व्यस्त बाजार सुभाष मार्केट, नजरबाग व गांधी मार्केट में काम कराया जाना है। गांधी मार्केट के लिए टेंडर प्रक्रिया फाइनल दौर में है, जबकि सुभाष मार्केट और नजरबाग मार्केट के लिए अभी तक सहमति बनाने के लिए जनप्रतिनिधि और व्यवसाइयों से चर्चा चल रही है।

फायदा
-बाजार व्यवस्थित होने से व्यवसाई और खरीदार दोनों को आसानी होगी। अस्त व्यस्त स्थिति पर नियंत्रण हो सकेगा।

यातायात सुधार: 20 से अधिक बैठकें, नतीजा कुछ नहीं
-4.6 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट यातायात को व्यवस्थित करने के लिए बना है। इसके अंतर्गत बाड़े को जाम से मुक्ति दिलाने का प्लान है। इस पर अभी तक 20 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि, व्यवसाई और प्रशासन में सहमति नहीं बनी है।

फायदा
-देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की नजर में शहर की छवि बेहतर होगी। पर्यटकों को बाड़े पर मौजूद ऐतिहासिक और पुरातत्वात्विक महत्व की धरोहरों को समझने का मौका मिलेगा।

हैरिटेज होटल : जमीन की मंजूरी आना है
-25 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं से युक्त हैरिटेज होटल शुरू करने की योजना बनी थी। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले इस होटल के लिए अभी राज्य सरकार से जमीन की मंजूरी आना बाकी है।
फायदा
-विदेशी सैलानियों को ऐतिहासिक विरासत का अनुभव कराने के लिए हैरिटेज होटल सहायक सिद्ध हो सकता है। अभी ज्यादातर सैलानियों को गांधी रोड और सिटी सेंटर रोड पर बने होटलों में जाना पड़ता है। हैरिटेज होटल विदेशी मुद्रा के साथ रोजगार सृजन का माध्यम भी बन सकता है।

टाउन हॉल : काम पूरा, लोकार्पण की तैयारी
-2 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट टाउन हॉल के लिए बना था, इसका काम लगभग पूरा है। काम पूरा होने के बाद अब मेंटेनेंस के लिए एजेंसी की तलाश है। इसका लोकार्पण इस महीने हो सकता है।

फायदा
-महाराज बाड़ा क्षेत्र में रंगमंच से जुड़े कलाकारों को बेहतर सुविधाओं वाला प्लेटफॉर्म मिल सकेगा। इससे कला के क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों को बढ़ावा मिलेगा।

प्लेनोटोरियम : अक्टूबर में निकली डेडलाइन, काम अधूरा
-6.78 करोड़ रुपए की लागत से स्काउट गाइड बिल्डिंग में प्लेनेटोरियम का काम जारी है। इसकी डेडलाइन अक्टूबर थी, लेकिन अभी तक 50 फीसदी काम पूरा हो पाया है।
फायदा
-बच्चों, छात्रों को अंतरिक्ष, ग्रह-नक्षत्र मंडल, आकाश गंगा सहित अन्य जानकारियां हासिल हो सकेंगी।

इमारत संरक्षण : कुछ इमारतों का काम हुआ
-4 करोड़ रुपए की लागत से हैरिटेज महत्व की 60 इमारतों का रखरखाव किया जाना है। इनमें अभी तक सिर्फ गोरखी गेट, पोस्ट ऑफिस, मोतीमहल गेट का काम ही हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि एसबीआइ का काम भी शुरू हो गया है।

फायदा
-पुरातात्विक स्वरूप में आने के बाद ऐतिहासिक इमारतों का आकर्षण बढ़ेगा, इससे देशी विदेशी पर्यटकों को इनके संबंध में जानने की उत्सुकता बढ़ेगी। शहरी पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद रहेगी।

डिजिटल लाइब्रेरी : 30 फीसदी ही काम, डेडलाइन गुजरी
-11.14 करोड़ रुपए की लागत से डिजिटल लाइब्रेरी तैयार होना है। इसमें देश-विदेश की अमूल्य किताबों को संरक्षित किया जाएगा। इसका काम सितंबर में पूरा होना था, लेकिन 30 फीसदी ही हो पाया है। काम में देरी की वजह भवन का देर से मिलना बताया जा रहा है।

फायदा
-अंचल के छात्रों को साहित्य, विज्ञान, इतिहास, सामान्य ज्ञान, शिल्प, पुरातत्व आदि की जानकारी हासिल करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों व स्नातक और परास्नातक के छात्रों को भी बेहतर पठन सामग्री मिल सकेगी।

-टाउन हॉल का काम लगभग पूरा हो गया है, इसे रन करने के लिए एजेंसी तलाश रहे हैं। प्लेनेटोरियम का काम भी 50 फीसदी हो चुका है। ऐतिहासिक इमारतों में गोरखी गेट, पोस्ट ऑफिस और मोतीमहल के गेट का काम कर चुके हैं। एसबीआई बिल्डिंग में काम शुरू होने वाला है। बाकी के कामों में सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं।
महीप तेजस्वी, सीइओ-स्मार्ट सिटी

prashant sharma
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