90 दिन पहले की बैठक के निर्देशों पर अमल नहीं, अब 23 को फिर बैठेंगे

90 दिन पहले की बैठक के निर्देशों पर अमल नहीं, अब 23 को फिर बैठेंगे
90 दिन पहले की बैठक के निर्देशों पर अमल नहीं, अब 23 को फिर बैठेंगे

Prashant Kumar Sharma | Updated: 21 Sep 2019, 07:16:13 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

न गोवंश का प्रबंधन हुआ, न गंदे पानी की समस्या निपटी

प्रभारी मंत्री ने जून में जिला योजना समिति की बैठक में 30 दिन का दिया था समय, तैयारियों के लिए कलेक्ट्रेट में बैठक

ग्वालियर. 90 दिन पहले हुई जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री उमंग सिंघार द्वारा जो निर्देश दिए गएअधिकारियों द्वारा उनमें से 25 फीसदी पर भी अमल नहीं किया गया है, जबकि 30 दिन में सभी काम पूरे करने को कहा गया था। न तो नगर निगम गोवंश का प्रबंधन कर सका है, न निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री उपयोग करने वाले और कोताही बरतने वाले किसी ठेकेदार पर कार्रवाई हो सकी है, जबकि निर्माण कार्यों में लगातार कमियां सामने आ रही हैं। अब 23 सितंबर को फिर समिति की बैठक होगी, जिसमें पोल शिफ्टिंग और ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे कार्यों के साथ सडक़, स्वास्थ्य, पेयजल, एक हजार बिस्तर के अस्पताल, फसल ऋण माफी, स्मार्ट सिटी, अमृत योजना और सीवेज के कार्यों की समीक्षा होगी। बैठक की तैयारियों के लिए शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों को बताया गया कि 20 जून को हुई बैठक के पालन-प्रतिवेदन की भी चर्चा होगी, इसलिए कोई भी अधूरी तैयारी के साथ न आए।
यह दिए थे निर्देश

ट्रांसफार्मर : निर्देश दिए थे, जिन गांवों में ट्रांसफार्मर खराब हैं, उन्हें बदला जाए। हकीकत यह है कि गांवों में समय से बिजली भी नहीं मिल रही है।
तालाब : मंत्री को बताया गया था, जिले में 444 तालाबों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। 141 का निर्माण शीघ्र पूरा होगा। हकीकत यह है कि जिन तालाबों के निर्माण की बात हुई थी, उनमें से एक भी ठीक से नहीं भर पाया है। नवंबर तक पानी टिकना मुश्किल है।
आवारा पशु : मंत्री ने कहा था, आवारा पशुओं को विस्थापित करने के लिए अभियान चलाया जाए। हकीकत यह है कि शहर की लगभग प्रत्येक सडक़ पर गाय-बैल घूम रहे हैं। इससे यातायात अवरुद्ध होता है, दुर्घटनाएं भी होती हैं।
स्वर्ण रेखा पर रिंग रोड : लश्कर में यातायात का दबाव कम करने पिछली बैठक में स्वर्ण रेखा के दोनों ओर रिंग रोड बनाने पर सहमति बनी थी। एक महीने में काम शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है।
प्रदूषण : प्रदूषण कम करने के लिए इ-रिक्शा को बढ़ावा देने की योजना पर काम तो हुआ, लेकिन काला धुआं उगल रहे टेंपो बंद नहीं हो सके।
गंदा पानी : जून में हुई बैठक में ग्वालियर दक्षिण के विधायक प्रवीण पाठक ने प्रभारी मंत्री सिंघार से कहा था कि जानबूझकर लोगों को पानी के लिए परेशान किया जा रहा है। विधायक के समर्थक गंदा पानी लेकर प्रभारी मंत्री के पास पहुंच गए थे। इसके बाद भी निगम गंदे पानी की समस्या का निदान नहीं कर पाया है।
मिलावट : मंत्री ने मिलावट खोरों पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए थे। इसके बाद अभी तक प्रशासन और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लगभग हर दिन कार्रवाई की है, लेकिन मिलावट पर लगाम लगाने में विफल रहे हैं।

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