maha shivaratri 2019 : पट खुलते ही शुरू हुआ भोले का अभिषेक,दर्शनों के लिए लगी भीड़

maha shivaratri 2019 : पट खुलते ही शुरू हुआ भोले का अभिषेक,दर्शनों के लिए लगी भीड़

ग्वालियर। महाशिवरात्रि पर्व का उत्सव रविवार को मध्य रात्रि से शुरू हो गया। रात 12 बजे शिवालयों के पट खुलते ही हर हर भोले, बम बम भोले, ओम नम: शिवाय की ध्वनि गूंजने लगी। पट खुलने के बाद महादेव का अभिषेक, आरती शुरू हुई। कांवरियों द्वारा गंगाजल चढ़ाया गया। इसके साथ ही दर्शन के लिए श्रद्धालु आने लगे और कतार लगने लगीं। मंदिरों पर आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है, फूलों से मंदिरों को सजाया गया है। पुलिस फोर्स भी रात से ही तैनात हो गया। महिला-पुरुष दर्शनार्थियों के लिए अलग से आने जाने की गई व्यवस्था। कोटेश्वर, अचलेश्वर, गुप्तेश्वर, भूतेश्वर, हजारेश्वर, गिरगांव महादेव पर लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर महादेव के किए दर्शन।
 

कोटेश्वर पर हुई भजन संध्या
महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर कोटेश्वर महादेव मंदिर पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। संजय देवले के गुु्रप द्वारा भजन गाए गए। दाता तेरा मेरा प्यार....भजन कमल किशोर त्यागी ने गाया। इसके बाद निशांत जैन द्वारा देवा महादेव गायन की प्रस्तुति दी गई। मुंबई से आई शनी साधवानी ने शंकर डमरू बाजें का गायन किया। बल्लरी मोगे ने ओम नम: शिवाय: का गायन किया। इसी तरह राजेश मीणा ने चले भोले बाबा लिए संग बाराती की प्रस्तुति देकर माहौल को श्रद्धाभाव से भर दिया। इस मंदिर पर रात बारह बजे से श्रृंगार कर अभिषेक किया गया। सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचेंगे।

रास्ते से नहीं हटा था शिवलिंग
अचलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना है। ऐसी किवदंती है कि सिंधिया स्टेट के समय जब सडक़ निर्माण किया जा रहा था तो शिवपिंडी को रास्ते से हटाना चाहा, लेकिन शिवलिंग नहीं हटा सके, तब से ही अचलनाथ की महिमा दूर-दूर त विख्यात हुई।

औरंगजेब के हमले के बाद स्थापित हुए कोटेश्वर
कोटेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास चार सौ से पांच सौ साल पुराना है। पंडित कमल किशोर शर्मा ने बताया कि मुगल शासक औरंगजेब जब ग्वालियर के मठ मंदिरों को तोड़ते हुए किले पर पहुंचा तो उसके सिपाहियों ने किले के परकोट से बाहर शिवलिंग को फेंका।
 

यह शिवलिंग झाडिय़ों में गिरा, यहां रहने वाले संत देवराज महाराज को महादेव ने दर्शन दिए और झाडिय़ों में होने की बात बताई। इसके बाद शिवलिंग की प्रतिष्ठा कराई गई। पुजारी शर्मा का कहना है कि यहां दर्शन करने के बाद गोपाल मंदिर फूलबाग के दर्शन करने पर सभी मनोकामना पूरी होती हैं।
 

ग्वालों ने की थी गुप्तेश्वर महादेव की खोज
मंदिर के पुजारी पंडित सोनू के अनुसार गुप्तेश्वर महादेव की खोज करीब पांच सौ साल पहले हुई थी। अमरावत पहाड़ पर आसपास के गांव के ग्वाले गाय चराने आते थे। यहां हर रोज किसी न किसी गाय का दूध निकल जाता था। इस बात से चकित होकर बरागांव के ग्वालों ने खोज की तो उन्हें एक पिंडी नजर आई, ये शिवलिंग छिपी हुई थी। इसी जानकारी तत्कालीन सिंधिया शासकों को दी गई। इसके बाद गुप्तेश्वर महादेव नाम प्रचलित हुआ।
 

अचलेश्वर पर 16 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
मंदिर को 40 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। लाल, पीले और केसरिया रंग से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया है। सनातन धर्म मंदिर के पास बेरिकेड्स लगाकर श्रद्धालुओं को ललितपुर कॉलोनी होकर एमएलबी गेट के सामने से प्रवेश कराया जाएगा। 16 सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। सफाई रहे इसके लिए डस्टबिन हर स्टॉल पर रखे जाएंगे। शाम को गुप्तेश्वर से आने वाली शिव बारात का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस दौरान रात में अभिषेक होगा।
 

 

गुप्तेश्वर मंदिर से निकलेगी शिव बारात
गुप्तेश्वर महादेव मंदिर को बारह बजे से खोला गया। यहां पूजा-अर्चना के साथ ही रात्रि तीन बजे से ब्रह्म मुहूर्त में मंगल आरती हुई, सोमवार दोपहर 12 बजे से शिवजी की बारात निकाली जाएगी। गुप्तेश्वर महादेव महाराज को लक्ष्मीगंज, हनुमान चौराहा, नई सडक़, गश्त का ताजिया होते हुए अचलेश्वर ले जाया जाएगा। यहां शिव बारात का समापन किया जाएगा। इसके बाद शाम छह बजे मंदिर पर गुप्तनाथ की आरती होगी। रात के चारों पहर पंडितों द्वारा रूद्राभिषेक किया जाएगा।
 

एक बेलपत्र एक हजार शिवलिंग पर चढ़ता
गेंड़ेवाली सडक़ स्थित रामकुई पर हजारेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र है। इस शिवलिंग पर एक हजार शिवलिंग की आकृतियां हैं। पंडितों द्वारा कहा जाता है कि हजारेश्वर महादेव के दर्शन करने पर एक हजार शिवलिंग के दर्शन होते हैं। एक बेलपत्र, एक लौटा गंगाजल से एक हजार बार की पूजा का फल मिलता है। इसके अलावा भूतेश्वर, मार्कण्डेश्वर, नलकेश्वर महादेव पर भी मेला लगेगा। वही शहर के नजदीक स्थित गिरगांव स्थित प्राचीन महादेव मंदिर पर भी हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने जाएंगे।
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