पूर्णिमा पर भगवान कार्तिकेय स्वामी के खुलेंगे पट, साल में एक ही दिन खुलता है मंदिर

पूर्णिमा पर भगवान कार्तिकेय स्वामी के खुलेंगे पट, साल में एक ही दिन खुलता है मंदिर

Gaurav Sen | Publish: Nov, 11 2018 07:30:00 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

पूर्णिमा पर भगवान कार्तिकेय स्वामी के खुलेंगे पट, साल में एक ही दिन खुलता है मंदिर

ग्वालियर. जीवाजीगंज स्थित भगवान कार्तिकेय स्वामी मंदिर के पट 23 नवंबर को खुलेंगे। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर भगवान कार्तिकेय का जन्मोत्सव मनाते हुए एक दिन पट खुलने की परंपरा है। ये मंदिर प्रदेश का एकमात्र मंदिर है, जहां दर्शन करने के लिए अन्य प्रांतों से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर के पुजारी जमुना प्रसाद शर्मा का कहना है कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान कार्तिकेय स्वामी का जन्मोत्सव मनाते हुए इस दिन सुबह 4 बजे उनका अभिषेक होगा। इसके बाद भगवान को भोग लगाया जाएगा। इसके बाद कार्तिकेय स्वामी के पट दर्शनों के लिए खुले रहेंगें।

महाआरती के बाद पट होंगे बंद
ये पट 24 नवंबर की सुबह 4 बजे तक खुले रहेंगे। 24 घंटे दर्शनार्थियों की भीड़ रहेगी। मंदिर परिसर में जन्मोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करेंगे। इसके बाद भगवान कार्तिकेय को पट बंद करने से पहले अन्नकूट का भोग लगाकर 365 बत्तियों के दीपक से आरती की जाती है। इसके बाद पट बंद किए जाते हैं।

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साल में एक दिन पट खुलने की कहानी
भगवान कार्तिकेय स्वामी के साल में एक दिन पट खुलने के पीछे किवदंती है। मंदिर के पुजारी के अनुसार भगवान कार्तिकेय और श्रीगणेश में पृथ्वी की परिक्रमा को लेकर प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता में श्रीगणेश ने माता-पिता की परिक्रमा पूरी कर ली और उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। उधर कार्तिकेय अपने वाहन पर सवार होकर ब्रह्माण्ड की परिक्रमा पर निकले। प्रतियोगिता में सफल होने की सूचना नारद मुनि ने कार्तिकेय को दी। वे नाराज हो गए और वापस नहीं आए। इसके बाद पार्वती और शंकर जी ने कार्तिकेय का आव्हान किया। इसके बाद उन्होंने क्रोध बस श्राप दिया कि जो स्त्री मेरे दर्शन करेगी, वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी। वहीं जो पुरुष दर्शन करेगा, वह सात जन्मों के पश्चात नर्क को जाएगा। इसके बाद पार्वती जी की समझाइश पर भगवान कार्तिकेय स्वामी ने कहा कि मेरे जन्म दिन पर दर्शन किए जाने से कोई श्रापित नहीं होगा।

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