प्रदेश के इन एक दर्जन से अधिक गांवों को है अब भी बिजली का इंतजार, लोग पलायन को मजबूर

shyamendra parihar

Publish: Dec, 08 2017 02:03:50 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
प्रदेश के इन एक दर्जन से अधिक गांवों को है अब भी बिजली का इंतजार, लोग पलायन को मजबूर

करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी गोरमी सर्किल के एक दर्जन से अधिक गांवों को सालों से बिजली का इंतजार है।

ग्वालियर/भिंड। 24 घंटे बिजली सप्लाई की योजना को जमीन पर उतारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी गोरमी सर्किल के एक दर्जन से अधिक गांवों को सालों से बिजली का इंतजार है। बुनियादी सुविधा के आभाव में 40 फीसदी से अधिक आवादी कस्बों तथा शहरों की ओर पलायन कर गई है।

 

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क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गंावों में पिछले 15 सालों से बिजली नहीं है। पूर्व में लगाए गए पोल तथा लाइन गायब हो चुकी है। बिल बकाया होने के कारण कंपनी ने ट्रांसफार्मर बदले नहीं और ग्रामीणों ने भी सप्लाई न मिलने के बाद जारी किए जा रहे बिलों को अदा करने से हाथ खड़े कर दिए। डीइलेक्ट्रीफाइड लालपुरा, कूपे का पुरा, अरेले का पुरा, आरौली, बहेरा गढी, हज्जू का पुरा, कदमन का पुरा, सुकांड, परोसा, विजयगढ, चपरा आदि गंाव में राजीव गंाधी ्रग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत पोल गाढे गए थे और लाइन भी खींची गई थी।

 

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लेकिन कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से काम इतना घटिया हुआ कि तेज अंधड़ में ही ९० फीसदी से अधिक पोल धराशाईहो गए। कंपनी ने भी पोलों का खड़ा करने की कोशिश नहीं की।कंपनी की ओर से अनइलेक्ट्रीफाइड एक भी गांव जिले में न होने का दावा किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र के खेरा और राऊपुरा में आजादी के बाद से ही विद्युत नहीं हैं।अकलोनी, प्रतापपुरा, मेहदौली में जर्जर तार होने के कारण ८ से १० घंटे भी सप्लाई नहीं मिल पा रही। जैसे ही लोड आता है वैसे ही लाइन टूटकर जमीन पर आ जाते हैं।

 

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डीजल पंप चलाने से बढ़ रही है फसल की लागत
बिजली के आभाव में किसानों द्वारा फसल की सिंचाई करने के लिए नलकूपों को डीजल इंजन से चलाना पड़ रहा है।जिन किसानों के पास नलकूप नहीं हैं उनकों 150 से 200 रुपये प्रतिघंटा के हिसाब से पानी मिल पा रहा है। एक बीघा की सिंचाई में चार से पांच घंटे का समय लगता है। एक बार की सिंचाई एक हजार में पड़ती है, गेंहू में चार और सरसों में तीन बार सिंचाईकी आवश्यकता होती है। यदि नलकूपों को विद्युत से चलाया जाए तो एक बार की सिंचाई 750 रुपए में ही पूरी हो सकती है।

 

 

जिले में अब तक विद्युत कंपनी की ओर से किया गया खर्च
योजना राशि
फीडर सेपरेशन 82.83 करोड़
राजीव गंाधी ग्रामीण योजना (11 वीं) 48.83 करोड
राजीव गांधी योजना (12वीं)- 18.89 करोड़
नवीन फीडरसेपरेशन 64.18 करोड़


"डीइलेक्ट्रीफाइड गांवों को एमबीटी कंपनी की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद इस्टीमेट बनेगा।डेढ़ साल तक विद्युत पहुंचने की संभावना है।"
-गोपालधर दुबे उपप्रबंधक मप्र मध्यक्षेत्रविद्युत वितरण कंपनी

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