Mp Crises : सडक़ पर दौड़ रहीं खटारा ‘108’, बार-बार बीच राह तोड़ देती हैं दम

Mp Crises : सडक़ पर दौड़ रहीं खटारा ‘108’, बार-बार बीच राह तोड़ देती हैं दम

 

By: Gaurav Sen

Published: 18 Dec 2018, 12:53 PM IST

ग्वालियर। जिले में दौड़ रहीं 108 एंबुलेंस चाहे जहां पसर जाती हैं, जिससे मरीजों को परेशानी से गुजरना पड़ता है। जिले में 14 एंबुलेंस दौड़ रही हैं, जिनमें आधी से अधिक खटारा हैं। पिछोर की एंबुलेंस इतनी पुरानी हो गई है कि चलने से पहले ही दम तोड़ जाती है। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन के सिलेण्डर नहीं हैं, अन्य उपकरण भी खराब हैं। स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट के दौरान भी कई उपकरण बंद मिले हैं। कई एंबुलेंस में दवाओं तक का अभाव है।

स्वास्थ्य विभाग और जिगित्सा कंपनी के बीच 108 एंबुलेंस के संचालन के लिए अनुबंध है, उसके तहत 14 एंबुलेंस जिले में आईं। इनकी हालत देखकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यहां तक टिप्पणी कर दी थी कि यह एडवांस लाइफ सपोर्टर न होकर केवल यात्री वाहन बनकर रह गई हैं।

जिले में दौड़ रही 14 एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में 14 एंबुलेंस अलग-अलग मार्गों के लिए निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा 11 जननी एक्सप्रेस और 4 दीनदयाल चलित अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन्हें दवाइयां और डीजल विभाग की ओर से दिया जाता है, जबकि एंबुलेंस के रखरखाव और चालक आदि का इंतजाम, इनका संचालन करने वाली जिगित्सा कंपनी पर है। कई बार ऑडिट के दौरान आने वाली समस्याओं और कमियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिगित्सा कंपनी के स्थानीय अधिकारियों से कहा गया, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई, जिससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

जिले में दौड़ रही 14 एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में 14 एंबुलेंस अलग-अलग मार्गों के लिए निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा 11 जननी एक्सप्रेस और 4 दीनदयाल चलित अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन्हें दवाइयां और डीजल विभाग की ओर से दिया जाता है, जबकि एंबुलेंस के रखरखाव और चालक आदि का इंतजाम, इनका संचालन करने वाली जिगित्सा कंपनी पर है। कई बार ऑडिट के दौरान आने वाली समस्याओं और कमियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिगित्सा कंपनी के स्थानीय अधिकारियों से कहा गया, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई, जिससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

कई बार हुए विवाद
एंबुलेंस रास्ते में चाहे जहां खराब हो जाने पर विवाद की स्थिति बनती है। कई बार मरीजों के परिजन को धक्का देकर एंबुलेंस को चालू कराना पड़ता है। एसी तथा अन्य उपकरण बंद होने पर मरीज के परिजन और एंबुलेंस के स्टाफ में विवाद होना आम बात हो गई है। कुछ एंबुलेंस चालक पैसों के लालच में मरीज को शासकीय अस्पताल ले जाने की बजाय, निजी अस्पताल ले जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग को यह मिली थीं खामियां
ठ्ठ किसी एंबुलेंस में स्टेपनी नहीं मिली थी, किसी की बैटरी खराब थी।
ठ्ठ न ड्रेसिंग का सामान मिला था, न ही दवाएं।
ठ्ठ पिछोर तहसील की 108 जननी राइट ऑफ होने से मरीज परेशान हो रहे थे।
ठ्ठ डीआरपी लाइन का 108 वाहन कण्डम स्थिति में है।
ठ्ठ कर्मचारी कभी भी चले जाते हैं हड़ताल पर।
जिगित्सा कंपनी एंबुलेंसों का सही तरीके से रखरखाव नहीं कर पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंसों के चालक व सह स्टाफ को समय पर वेतन भी नहीं दे रही है, जिसको लेकर चाहेे जब एंबुलेंस का स्टाफ हड़ताल पर चला जाता है।

यह होना चाहिए

  • एंबुलेंस में एसी, पंखा, पल्स ऑक्सीमीटर, वीपी मशीन होना जरूरी है। वाहन खराब होने पर स्टेपनी का भी इंतजाम हो।
  • प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था हो। सहायक के रूप में कर्मचारी मौजूद रहे, जो मेडिकल के बारे में जानता हो।

यह है नियम

  • स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए वही एंबुलेंस मान्य होगी, जो पांच साल से अधिक पुरानी न हो, या पांच लाख किलोमीटर से अधिक न चली हो।
  • एंबुलेंस का चालक किसी भी तरह के लालच में न आकर मरीज को प्राइवेट अस्पताल न ले जाकर सरकारी अस्पताल ले जाए।

पूर्व की अपेक्षा एंबुलेंसों में सुधार हुआ है। समय-समय पर जिगित्सा कंपनी को पत्राचार आदि से मेंटेनेंस और दवा व उपकरण चालू रखने के लिए कहते रहे हैं, कार्रवाई भी करते रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल में मरीज को यदि कोई एंबुलेंस चालक ले जाता है, तो उसकी शिकायत करें तत्काल कार्रवाई होगी।
इन्द्रपाल निवारिया, नोडल अधिकारी एंबुलेंस, स्वास्थ्य विभाग

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