scriptArt lovers did not like the disappearance of Tansen ornaments | कला रसिकों को रास नहीं आया तानसेन अलंकरण गायब करना | Patrika News

कला रसिकों को रास नहीं आया तानसेन अलंकरण गायब करना

- सबकी एक राय, सुर सम्राट के समारोह के दौरान ही दिया जाना चाहिए तानसेन अलंकरण

ग्वालियर

Published: December 24, 2021 10:47:17 am

ग्वालियर. भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन अखिल भारतीय तानसेन संगीत एवं अलंकरण समारोह में तानसेन सम्मान 2021 नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही राजा मानसिंह अलंकर भी नहीं देंगे। जबकि 8 कलाकारों को कालिदास सम्मान से नवाजा जाएगा। शहर के कला रसिकों का कहना है कि तानसेन समारोह में तानसेन अलंकरण का अपना अलग ही महत्व है। यदि इसे बाद में दिया जाता है तो इसका महत्व खत्म हो जाएगा। यदि कालिदास सम्मान को इसमें नहीं दिया जाता तब तो कोई बात नहीं थी लेकिन तानसेन अलंकरण मायने रखता है क्योंकि सभी इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।
कला रसिकों को रास नहीं आया तानसेन अलंकरण गायब करना
कला रसिकों को रास नहीं आया तानसेन अलंकरण गायब करना
बैठक में भी उठा मुद्दा
तानसेन समारोह के दौरान तानसेन अलंकरण का मुद्दा गुरुवार को संभागायुक्त आशीष सक्सेना की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान भी उठाया गया। आयोजन समिति की इस बैठक में भी आमजन का कहना था कि तानसेन समारोह में ही तानसेन अलंकरण दिया जाना चाहिए।
शादी हो रही है, दूल्हा नहीं है
आठ साल के कालिदास सम्मान को चार साल का कर दिया जाना था, बाकी तानसेन समारोह में तानसेन अलंकरण जरूरी से देना था। पता नहीं ऐसा क्यों हो रहा है, ये मंशा हमें समझ नहीं आई। इसके साथ राजा मानसिंह सम्मान भी देना था। ये आयोजन तो तानसेन अलंकरण के लिए ही है। ऐसा लगता है कि शादी तो हो रही है लेकिन दूल्हा नहीं है।
- डॉ.वीणा जोशी, प्रभारी प्रिंसिपल, माधव संगीत महाविद्यालय
उदासीनता और मंशा समझ नहीं आ रही
तानसेन अलंकरण हर वर्ष तानसेन समारोह में ही होना चाहिए। जूरी के लिए तीन महीने पहले से तैयारी होती है। मार्च के बाद अप्रैल से इसके लिए सोच लेना चाहिए था। इतने बड़े सम्मान के प्रति उदासीनता समझ नहीं आ रही है और इसके पीछे की मंशा भी समझ नहीं आ रही है।
- डॉ.रंजना टोणपे, विभागाध्यक्ष, गायन राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय
संगीत प्रेमियों के मन में खटक रही बात
ये बात सही है कि तानसेन समारोह के समय ही अलंकरण दिया जाता तो ज्यादा अच्छा लगता। संगीत प्रेमियों के मन में भी ये बात शायद कहीं खटक रही है। ऐसा लगता है कि शायद कालिदास सम्मान के कारण इस वर्ष ऐसा संभव नहीं हो पाया होगा।
- पं.उमेश कंपूवाले, वरिष्ठ शास्त्रीय गायक

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