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राममंदिर आंदोलन आजादी के आंदोलन से भी बड़ा था, लाखों राम भक्तों की भावना लेकर अयोध्या जा रहा हूं: पवैया

locationग्वालियरPublished: Jan 20, 2024 08:46:49 am

Submitted by:

Sanjana Kumar

महाराष्ट्र के सह प्रभारी पवैया अयोध्या रवाना

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'राममंदिर आंदोलन आजादी के आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन था, यह अहिंसक आंदोलन था। यह आंदोलन 1528 से शुरू हो गया था। अक्टूबर 1984 में सरयू जी के तट पर रामभक्तों का विराट समागम हुआ था और देश के सवा तीन लाख गांवों में रामशिला का पूजन हुआ था। हम सबको गर्व है कि हम सबका योगदान भी आंदोलन में रहा। हमारी आंखों के सामने यह शुभ घड़ी आ गई है और प्रभु की कृपा है कि मंदिर बन गया है, रामलला विराजमान हो रहे हैं। हम सब इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी हैं। अयोध्या के भगवान रामलला के मंदिर में जब मैं दंडवत करूंगा तो, आपकी भावनाएं भी रामलला के चरणों में अर्पित करूंगा। मैं अकेला ही अयोध्या नहीं जा रहा हूं, लाखों भावनाओं को साथ लेकर जा रहा हूं।'

ये बात शुक्रवार को अयोध्या रवाना होने से पहले महाराजा बाड़ा पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा महाराष्ट्र के सह-प्रभारी जयभान सिंह पवैया ने कही। उन्होंने कहा, ये रामलला की ही कृपा है कि उनके चरणों में पहुंचने का न्योता मिला है, ये जो उत्सव इस समय दिखाई दे रहा है वैसा तो आजादी मिलने के बाद भी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, ये मंदिर हमें उपहार में नहीं मिला, बल्कि लाखों लोगों के बलिदान के बाद मिला है।

कार सेवकों पर पुष्प वर्षा की
पवैया ने ग्वालियर-चंबल संभाग के कार सेवकों पर पुष्प वर्षा की, उन्हें अंग वस्त्र पहनाकर, प्रणाम किया। बाड़ा स्थित हनुमान मंदिर में पवैया ने सपत्नी पूजा अर्चना की। पवैया ने मंच पर बलिदानी कार सेवक पुत्तू बाबा और दिनेश कुशवाह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

धर्म गुरुओं का सम्मान
मंचासीन धर्मगुरुओं और कार सेवकों को शॉल, श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में मंचासीन अतिथियों ने राम दरबार की झांकी की आरती की। भाजपा जिलाध्यक्ष अभय चौधरी ने पवैया को अंग वस्त्र और गदा भेंटकर सम्मान किया।

22 को राष्ट्रीय उत्सव ही नहीं अंतरराष्ट्रीय उत्सव मनाया जाएगा:गुप्ता
विभाग संचालक विजय गुप्ता ने कहा कि सभी अपने मोहल्लों के मंदिरों में रामधुन का पाठ करें, हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड का पाठ करें और रात में अपने घर में दीये जलाकर दीपावली मनाएं। 22 जनवरी को राष्ट्रीय उत्सव नहीं अंतरराष्ट्रीय उत्सव मनाया जाएगा।

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इनका किया सम्मान
पवैया ने 1990 व 92 में कार सेवा में प्रत्यक्ष भाग लेने वाले कार सेवकों के प्रतिनिधि के रूप में संत पुत्तू बाबा के वंशज प्रताप सिंह गुर्जर, विजय गुप्ता, नरेंद्र पाल सिंह भदौरिया, देवेंद्र श्रीवास्तव, मातादीन गोयल, चिमन सिंह गुर्जर, सुशील जैन, पूरन सिंह भदौरिया, दिलीप श्रीवास्तव का स्वागत अंग वस्त्र, श्रीफल एवं पुष्प माला पहनाकर किया।

चंबल पुल पर फहराई राम ध्वजा
कार्यक्रम के बाद पवैया महाराज बाड़े से सराफा बाजार तक पैदल चले। इस दौरान कार्यकर्ताओं और आमजन ने आतिशबाजी की, शंख एवं तुरही का घोष किया। उन्होंने ग्वालियर से रवाना होने के बाद गोहद चौराहे पर पुत्तू बाबा को श्रद्धांजलि दी। भिंड इटावा चंबल पुल जहां 1990 में कार सेवकों ने गोलियों के बीच संघर्ष किया था, उस जगह श्री राम ध्वजा फहराकर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश किया।

यह रहे मौजूद
इस अवसर पर हिंदू जागरण मंच के प्रांत प्रमुख राजीव दंडौतिया, विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष मुकेश गुप्ता, उर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नारायण सिंह कुशवाह, विश्व हिंदू परिषद के पप्पू वर्मा, वरिष्ठ अभिभाषक अरविन्द दूदावत, रामेश्वर भदौरिया, सुधीर गुप्ता, नवीन चौधरी, अशोक शर्मा, देवेश शर्मा, कमल माखीजानी, उदय अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

22 को जब दीए जलेंगे तब कोप भवन में बैठने वालों को इतिहास माफ नहीं करेगा

आज भावनाओं को शब्दों का आकार नहीं दे पा रहा, ये जीवन सार्थक हो रहा है। कोप भवन में बैठे लोगों कटाक्ष करते हुए पवैया ने कहा, हम 22 जनवरी के पर्व को बहुत सकारात्मक दृष्टि से देख रहे हैं। देश के जीवन में कभी-कभी ऐसे पल आते हैं, जब जातियों और पार्टियों की सीमाएं तोड़कर भी राष्ट्र के सम्मान के लिए सबको उठकर खड़ा होना चाहिए, जिनको निमंत्रण दिया गया, उनको उस सौभाग्य को स्वीकार करना चाहिए था। लेकिन उन लोगों का अभागापन हम कैसे दूर करें, जिन्होंने रामलला के न्योता को ही ठुकरा दिया। इसलिए कभी कभी लगता है कि मंथरा तो मर ही गई है, मगर मंथरा की आत्मा भारत में अभी भी जिंदा है। जब दिया जले 22 जनवरी को तो कोई कोप भवन में बैठकर ना रहें, इतिहास उन्हें क्षमा नहीं करेगा। यह बात जयभान सिंह पवैया ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।

रामभक्तों को 22 जनवरी को दीपक जलाने का आह्वान करने के सवाल पर पवैया ने कहा, इस समय तो सब राम की संतान हैं, कौन कांग्रेस का कौन भाजपा का भूल जाइए। जिसकी भी रगों में राम का रक्त बह रहा है, उसके घर पर 22 जनवरी को अंधेरा नहीं रहेगा। जिसको अपने लहू पर ही भरोसा नहीं हो, उसके घर के अंधेरे का हम क्या कर सकते हैं।

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