28 साल बाद आडवाणी-उमा भारती सहित 32 आरोपी बरी, जयभान सिंह के घर पर सीबीआई ने मारा था छापा

लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज ने सुनाया फैसला

By: monu sahu

Published: 30 Sep 2020, 03:22 PM IST

ग्वालियर। बाबरी का विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में आखिरकार 28 साल बाद फैसला आ ही गया। यूपी के लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज ने 2000 पन्नों का फैसला देते हुए राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती और जयभान सिंह पवैया सहित सभी 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया। यहा बता दें कि इस केस में 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 16 की मौत हो चुकी है। कोर्ट का निर्णय आते ही सभी ने इसे स्वीकार भी किया।

यह लोग बनाए गए थे आरोपी
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास,जयभान सिंह पवैया,डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय,महंत धर्मदास,सतीश प्रधान,पवन कुमार पांडेय,लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे,गांधी यादव, रामजी गुप्ता,ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमरनाथ गोयल,साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर।

28 साल बाद आडवाणी-उमा भारती सहित 32 आरोपी बरी, जयभान सिंह के घर पर सीबीआई ने मारा था छापा

घर पर सीबीआई ने मारा था छापा
12 जून को सीबीआई की विशेष अदालत में बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने भी बयान दर्ज कराए थे। उन्होंने पांच घंटे में 1050 सवालों के जवाब दिए थे। पवैया भाजपा के उन 7 बड़े नेताओं में शामिल हैं जिन्हें ढांचा गिरने के बाद 1993 में 13 दिन के लिए जेल भेजा गया था। इसके बाद फरवरी 1993 में जयभान सिंह के ग्वालियर स्थित घर पर सीबीआई ने छापा मारा था और ढांचे की ईंट तलाशने के लिए तलाशी ली गई थी, लेकिन सीबीआई घर से उसे तलाश नहीं पाई थी।

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