ठंडे पकवानों का भोग लगाकर मां शीतला से निरोगी होने के साथ-साथ मांगी सुख समृद्धि

- शीतला सप्तमी दो दिन, कहीं शनिवार को मनाई गई तो कहीं मनेगी आज, सुबह से ही शीतला माता के मंदिरों पर लगी रही महिलाओं की भीड़

By: Narendra Kuiya

Published: 03 Apr 2021, 11:35 PM IST

ग्वालियर. तिथियों की घटबढ़ के चलते इस बार शीतला सप्तमी का पूजन कहीं शनिवार को किया गया तो कहीं रविवार यानी आज होगा। पंचमी और षष्ठी तिथि शनिवार को रहने के कारण अधिकांश घरों में शनिवार को ही सप्तमी मानते हुए माता का पूजन किया गया। शीतला सप्तमी की पूजा के लिए महिलाएं अल सुबह ही स्नान-ध्यान से निवृत होकर मां शीतलों के मंदिरों में पहुंच गई थीं। शहर के सभी प्रमुख शीतला माता के मंदिरों पर महिलाओं की लंबी कतारें भी देखी गईं। महिलाओं ने मां शीतला की पूजा-अर्चना कर उनसे निरोगी होने के साथ-साथ परिवार के लिए सुख-समृद्धि मांगी।
जिन परिवारों में मां शीतला का पूजन किया गया वहां चूल्हे पर कोई चीज नहीं बनाई गई। यहां तक कि चाय की जगह भी लोगों ने लस्सी और ठंडे दूध से काम चलाया। माता शीतला को शीतल ठंडे व्यंजन और जल पसंद है। शनिवार को बासोड़ा के चलते महिलाओं ने एक दिन पहले शुक्रवार को ही पुआ-पकौड़ी, पूरी, सब्जी, राबड़ी, बेसन की चक्की आदि पकवान बनाकर रख लिए थे। इन सभी पकवानों का मां शीतला को भोग लगाया गया। महिलाओं ने शीतला माता पर जल भी अर्पित किया। पूजा-अर्चना के बाद सभी परिजनों ने साथ बैठकर इन्हीं ठंडे पकवानों का भोजन किया।

चेचक जैसे संक्रमण से मिलती है मुक्ति
लोक मान्यता के अनुसार मां शीतला की पूजा से शरीर निरोगी होता है और चेचक जैसे संक्रमण रोग से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन ठंडा भोजन खाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक तथ्य है। माता शीतला को शीतल ठंडे व्यंजन और जल पसंद है। इससे मां शीतला प्रसन्न होती है और श्रद्धालुओं को निरोग होने का वरदान देती है। शीतला सप्तमी से गर्मी का दौर शुरू हो जाता है। शीतला अष्टमी के दिन विशेष खगोलीय स्थिति में ठंडे व्यंजन खाने से पूरे मौसम में गर्मी जनित बीमारियां नहीं होती।

Narendra Kuiya Reporting
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