बड़ी खबर : प्रदेश का पहला पक्षी पार्क बनेगा ग्वालियर में , 120 प्रजाति के पक्षी और 20 प्रजाति के पेड़ होंगे यहां

बड़ी खबर : प्रदेश का पहला पक्षी पार्क बनेगा ग्वालियर में , 120 प्रजाति के पक्षी और 20 प्रजाति के पेड़ होंगे यहां

Gaurav Sen | Updated: 04 Jun 2019, 10:44:54 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

पर्यटन के लिहाज से तैयार किया जा रहा है प्रदेश का अपनी तरह का पहला पक्षी पार्क

ग्वालियर। शहर के पास ही खुरैरी तालाब को अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय 120 प्रजातियों के पार्क के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए तालाब का सीमांकन कर पूरी तैयारी कर ली गई है। संरक्षण देने के लिए 20 से अधिक प्रजातियों के घने-छायादार और पक्षियों को आकर्षित करने वाले पेड़ों के पौधे यहां लगाए जाएंगे। 1 लाख 45 हजार वर्गफीट में स्थित तालाब के चारों ओर 80 हजार वर्गफीट जमीन पर हरियाली का विकास करने के साथ ही ईको जोन के रूप में भी विकसित किया जाएगा। पार्क को तैयार करने के लिए एसडीएम पुष्पा पुषाम और वन्य प्राणी विशेषज्ञ गौरव परिहार ने कुछ दिन पहले जगह का भ्रमण कर परिस्थितियों को देखा था। निरीक्षण के बाद वन्य प्राणी विशेषज्ञ ने तालाब को पक्षी पार्क के लिए उपयुक्त बताया है। इसके बाद सीमांकन कराया गया और सोमवार को पार्क की तैयारी के लिए बनाया प्रजेंटेशन कलेक्टर अनुराग चौधरी ने देखकर स्वीकृति दे दी है। जलीय और अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए संभवत: नगरीय सीमा में बनने वाला यह प्रदेश का पहला पार्क होगा। पार्क बनाने के लिए तालाब के चारों ओर तार फेंसिंग कराई जाएगी ताकि पक्षियों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व अंदर न आ पाएं।

इन पक्षियों की प्रजाति रहेंगी यहां
लार्ज ईग्रेट, रैड वेटल्ड लेपविंग, ग्रीन बी ईटर, पीड मायना, स्कावेंजर वल्चर, पेरिया काइट, इंडियान रोलर, लिटिल ब्राउन डव, कोर्मोरेंट, आसी क्राउन फिंच लार्क, रोज रिंग पैराकीट, प्लम हैडेड पैरट, इंडियन रोबिन, ब्लैक विंग स्टिल्ट सहित 120 प्रजाति के पक्षियों को यहां आकर्षित किया जाएगा।

यहां बनेगा पार्क

  • सात नंबर चौराहे से 8.3 किलोमीटर दूरी पर सरकारी तालाब का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • यहां पहले से ही कुछ विशेष प्रजातियों के पक्षी आते हैं, लेकिन पेड़ न होने के कारण संख्या कम रहती है।
  • तालाब की लंबाई-चौड़ाई 1 लाख 45 हजार वर्गफीट है। इसकी कुल जमीन के 60 फीसदी क्षेत्र में पानी है।
  • तालाब के बीच में एक टापू बनाया जाएगा, जहां पक्षी सुरक्षित प्रजनन कर सकेंगे।
  • तालाब में मछली और कछुए की कुछ प्रजातियां पहले से ही संरक्षित की जा चुकी हैं।

चारों तरफ होगी हरियाली

  • बर्ड पार्क के लिए तैयार होने वाले तालाब के चारों ओर घने छायादार पेड़ों के पौधे लगाए जाएंगे।
  • घने पेड़ों की वजह से प्रवासी पक्षियों को आकर्षित किया जा सकेगा।
  • पेड़ लगाने के लिए तालाब के चारों ओर 80 हजार वर्गफीट जमीन आरक्षित की जाएगी और प्रत्येक तीन मीटर की दूरी पर एक पौधा लगाया जाएगा।
  • पानी की अधिकता रहने की वजह से यहां बांस की प्रजातियां भी रोपी जा सकेंगीं।

इन प्रजातियों के लगाएंगे पौधे
बबूल, अर्जुन, वेटेंट ग्रास, मोर पंखी, गूलर, बरगद, पीपल, कैंपसस, व्हाइट मॉर्निंग ग्लोरी,चाइनीज हनी सकल, आम, इंडियन बेल, आक, कदम, पारिजात, हायड्रिला,वाटर लेट्यूस, वेलिसनेरिया, बांस, जामुन, अशोक और अलग-अलग प्रकार की घास लगाई जाएगी।

यह है उद्देश्य

  • शहरी क्षेत्र में कोई भी जलीय पक्षी विचरण क्षेत्र नहीं है। प्रवासी पक्षी नदी-तालाबों के किनारे निकल जाते हैं।
  • पक्षी पार्क की स्थापना के साथ बर्ड वॉचिंग गतिविधियों को बढ़ाया जा सकता है।
  • पक्षियों की प्रजातियों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
  • स्कूल-कॉलेज के छात्रों को पक्षी विज्ञान की जानकारी देने के लिए खुली प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • बर्ड पार्क विकसित होने से हरित क्षेत्र में भी वृद्धि हो सकेगी।

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