दावा किया जाता है कि घर पर पेंशन मुहैया कराई जाएगी, लेकिन हकीकत कुछ और

किसी महीने कोई यात्री वाहन मिल जाता है तो राहत मिल जाती है.....

By: Ashtha Awasthi

Updated: 15 Jun 2021, 06:03 PM IST

खीनोर (ग्वालियर)। चीनोर तहसील के शेखपुर गांव से दृष्टिहीन दंपती 1200 रुपए की पेंशन के लिए 12 किमी का सफर पैदल ही तय करता है। एक-दूसरे का सहारा बनकर दंपती बैंक जाते हैं। दरअसल, इस मार्ग पर कम वाहन चलते हैं। दंपती की कोई संतान नहीं है। किसी महीने कोई यात्री वाहन मिल जाता है तो राहत मिल जाती है। शेखपुर में कियोस्क नहीं होने से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।

सोमवार को दृष्टिहीन शिबू आदिवासी और उनकी पत्नी सोमवती चीनोर स्थित सेंट्रल बैंक में पेंशन लेने आए थे। दोनों जन्म से दृष्टिहीन है। सामाजिक न्याय विभाग से दोनों को हर महीने 600-600 रुपए पेंशन मिलती है। दंपती ने बताया कि इससे गुजारा करना मुश्किल है।

इसके अलावा हर महीने पैदल ही पेंशन लेने के लिए जाना पड़ता है। मालूम हो कि बुजुर्गों को पेंशन के लिए परेशान नहीं होना पड़े इसके लिए अक्सर दावा किया जाता है कि जाकर पेंशन मुहैया कराई पर हकीकत में ऐसा नहीं है कियोस्क नहीं होने से दपती पैदल ही बैंक तक जाना पड़ता है।

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