बॉक्सरों का सपना होगा पूरा, मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण

खेल विभाग द्वारा शहर के खिलाडिय़ों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेल परिसर स्थित बॉक्सिंग फीडर सेंटर में यह व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही खिलाडिय़ों को किट एवं भत्ता भी मिलेगा।

By: राजेश श्रीवास्तव

Published: 19 Jan 2019, 07:42 PM IST

ग्वालियर. मैरीकॉम बनने का सपना देखने वाले खिलाडिय़ों के लिए अच्छी खबर है। खेल विभाग द्वारा शहर के खिलाडिय़ों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेल परिसर स्थित बॉक्सिंग फीडर सेंटर में यह व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही खिलाडिय़ों को किट एवं भत्ता भी मिलेगा। फीडर सेंटर पर खिलाडिय़ों को अभी तक यह सुविधा नहीं मिल रही थी, जिसके कारण जब कोई खिलाड़ी शहर से बाहर किसी प्रतियोगिता में पार्टिसिपेट करने के लिए जाता था तो उसे खुद ही याता भत्ता वहन करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। खेल विभाग ने बॉक्सिंग को बढ़ावा देने के लिए यह इनिशिएटिव किया है।

शहर में बॉक्सिंग के प्रति बच्चों का लगाव बहुत पहले से ही है, इसका ही नतीजा है कि एक ही स्कूल की बॉक्सिंग खिलाडिय़ों को लगातार चार साल तक एकलव्य अवार्ड से नवाजा गया। खेल विभाग द्वारा भी बॉक्सिंग को बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए कंपू स्थित खेल परिसर में बॉक्सिंग का फीडर सेंटर शुरू किया गया था, लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति का ही सेंटर था, यहां न बच्चों को किट मिल रही थी, न ही यात्रा भत्ता, लेकिन अब इसकी शुरुआत हो गई है। सेंटर में अब बच्चों को प्रशिक्षण के साथ ही किट भी मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा शहर से बाहर प्रतियोगिता में शामिल होने पर यात्रा भत्ता भी दिया जाएगा। शहर में बॉक्सिंग में बालिकाएं भी पीछे नहीं है। कई बालिका खिलाड़ी हैं, जिन्होंने नेशनल, राज्य प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन किया। लगातार चार साल तक एकलव्य अवार्ड प्राप्त करने वाली भी चार गल्र्स ही थीं। कोच के अनुसार खेल विभाग द्वारा 18 साल से कम आयु की बालिका और बालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इसके लिए कोई भी खेल विभाग में संपर्क कर सकता है।

गर्ल्स को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएंगे

गर्ल्स को बॉक्सिंग के साथ आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएंगे। इसके अलावा महिलाओं को वजन कम करने के लिए एरोबिक जुंबा डांस भी सिखाया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों को खेल में अवसर के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। खिलाडिय़ों को मिलने वाली स्कॉलरशिप और नौकरी के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक मदद भी मिल सकेगी। खेल विभाग सहित कई विभागों द्वारा कई स्कॉलरशिप खिलाडिय़ों के लिए दी जाती हैं, लेकिन अक्सर इसकी खिलाडिय़ों को जानकारी नहीं होती है, जिससे उन्हें इसका फायदा नहीं मिल पाता है। एक्सपर्ट द्वारा खिलाडिय़ों को मोटिवेट भी किया जाएगा। सेंटर पर नेशनल प्रतियोगिता के लिए खिलाडिय़ों को तैयार किया जाएगा, इसके लिए उन्हें जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

शहर में है सिर्फ एक रिंग

शहर में कई बॉक्सिंग प्रशिक्षक हैं लेकिन बच्चों को प्रोफेशनल तरीके से सीखने के लिए रिंग नहीं है। शहर में एलएनआइपीई को छोड़ दें तो एकमात्र रिंग खेल परिसर स्थित बॉक्सिंग फीडर सेंटर में है। बॉक्सिंग को लेकर खेल विभाग अभी तक उदासीन ही रहा है। दरअसल, बॉक्सिंग रिंग पहले खेल परिसर के बीच में ही स्थित थी, लेकिन इसे वहां से हटा दिया गया और लगभग एक साल तक फीडर सेंटर के बच्चों ने बिना रिंग के ही प्रैक्टिस की। हालांकि अब रिंग बनकर तैयार है और यहां रोजाना सुबह और शाम बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। फीडर सेंटर के बच्चों ने प्रतियोगिताओं में मेडल भी प्राप्त किए हैं।

विभाग द्वारा बॉक्सिंग किट मुहैया कराई जाएगी

- फीडर सेंटर पर 18 साल से कम उम्र के कोई भी बालक और बालिका प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण के साथ ही खेल विभाग द्वारा बॉक्सिंग किट मुहैया कराई जाएगी, इसके अलावा शहर से बाहर फीडर सेंटर की टीम किसी प्रतियोगिता में शामिल होने जाती है तो उसे भत्ता भी दिया जाएगा।
पंकज प्रवीण, कोच, बॉक्सिंग फीडर सेंटर

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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