भोजन दान ही श्रेष्ठ धर्म

- ब्राह्मण समाज ने जरूरतमंदों को वितरित किया राशन

By: Narendra Kuiya

Published: 18 Oct 2020, 06:21 PM IST

ग्वालियर. जरूरतमंदों की सेवा में ही सच्चा सुख है। भूखों को भोजन कराना सबसे बड़ा धर्म एवं सेवा है। क्योंकि भोजन दान ही श्रेष्ठ धर्म है। इस सेवारूपी धर्म का निर्वहन करना ब्राह्मण का कर्तव्य है। समाज सेवी एमडी पाराशर ने यह बात कही। वे रविवार को फूलबाग स्थित थियोसॉफिकल लॉज के सभागार में ब्रह्म के स्वर सामाजिक अनुसंधान पत्रिका एवं थियोसॉफिकल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अन्नदान शिविर में बतौर मुख्य अतिथि की आसन्दी से बोल रहे थे। अध्यक्षता थियोसोफिकल सोसायटी के अध्यक्ष एवं ब्रह्म के स्वर पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ.केशव पांडेय ने की जबकि राजेन्द्र मुद्गल, सोसायटी के सचिव डॉ. दिव्यार्थ दुबे एवं अरविंद जैमिनी विशिष्ट अतिथि थे। मुख्य अतिथि पाराशर ने कहा कि आहार, निद्रा और भय तो इंसान और पशु में समान हैं। इंसान में विशेष केवल धर्म है, अर्थात बिना धर्म के लोग पशुतुल्य है। इस दौरान अतिथियों ने आधा सैकड़ा जरूरतमंदों को राशन सामग्री वितरित की। जबकि एक सैकड़ा लोगों को भोजन कराया गया। इस मौके पर पुष्पराज शर्मा, विनोद तिवारी, भानुप्रकाश दुबे, विजय पाण्डेय, राहुल शर्मा, नीलेश शर्मा, हनी मिश्रा, नवीन शर्मा, संदीप शर्मा एवं शिवा शर्मा आदि मौजूद थे। संचालन सहायक संपादक जितेंद्र शर्मा ने तथा आभार व्यक्त सचिन पाण्डेय ने किया।

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