बजट2017, शहरवासियों को यह हैं अपेक्षाएं

बजट2017, शहरवासियों को यह हैं अपेक्षाएं

93 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब रेल बजट अलग पेश नहीं होगा। वहीं पहली बार आम बजट 1 फरवरी को पेश होगा। 

ग्वालियर। वर्ष 2017 का आम बजट बुधवार को वित्तमंत्री पेश करेंगे। वहीं इस बार बजट को लेकर कुछ अहम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। 
दरअसल 93 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब रेल बजट अलग पेश नहीं होगा। यही नहीं इस बार पहली बार आम बजट फरवरी की आखिरी तारीखों की बजाय 1 फरवरी को पेश होगा। वहीं इस बार भी आम लोगों को सरकार से टैक्स में कुछ छूट की उम्मीद है। यही नहीं आशा है इस बार वित्तमंत्री 50 हजार रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजेक्शन पर टैक्स का ऐलान भी कर सकते हैं।

 ये है शहर की जनता को बजट से आस:
'इस बार बजट के समय में बदलाव करने से हम वर्षों से चली आ रही अंग्रेजों की परंपराओं से अलग हो रहे हैं, आशा है सरकार टैक्स दरों के स्लैब में बढोतरी कर जनता को राहत देगी।'
-  अजय सक्सैना, निजी व्यवसायी

'यह तो पूरी तरह से राजनैतिक बजट होगा, इसी कारण चुनाव से ठीक पहले लाया जा रहा है, खैर कुछ भी हो इससे जनता को फायदा ही हौगा, आशा है टैक्स रिबेट सहित कई लुभावनी घोषणाएं होंगी।'
- विशाल श्रीवास्तव, मैनेजर निजी कंपनी

'रेलवे का बजट भी इसी में शामिल कर दिया है, ऐसे में लाभ हानि को देखते हुए कुछ अच्छे तोहफे मिल सकते हैं। इटावा रूट पर ट्रेनो की संख्या में इजाफा होना चाहिए।'
- जितेंद्र सारस्वत, व्यवसायी

'कीमतों पर कंट्रोल सबसे जरूरी है, साथ ही टैक्स की सीमा भी बढाई जानी चाहिए। ताकि ग्रहणियां आसानी से घर चला सके।'
- जानकी वर्मा, ग्रहणी

'पिछले दो बार से टैक्स की सीमा में कोई अंतर नहीं किया गया है, अब तो नोटबंदी का राम भी हो चुका है, तो अब कम से कम टैक्स सीमा तो ढाई लाख की जगह चार लाख कर देनी चाहिए।'
- आकाश तिवारी, सरकारी कर्मचारी

'टैक्स सीमा बढाएं, महंगाई पर रोक लगे और रेल व्यवस्था के तहत ग्वालियर को और ट्रेन दी जाएं, यही हमारी अपेक्षा है।'
- अजय जैन, व्यवसायी

' यह राजनैतिक बजट है, किसी से ज्यादा अपेक्षा नहीं है, हां कम से कम हम बुजुर्गों के लिए तो कुछ आकर्षक घोषणाएं होनी ही चाहिए। वैसे भी हमें ज्यादा मिलने की आस तो है नहीं, पर संभवत: चुनावी माहौल के चलते हमारे लिए ही नहीं सबके लिए कुछ खास घोषणाएं हो सकती हैं। कम से कम टैक्स लिमिट बढने के आसार तो हैं ही। पर सरकार को हम बुजुर्गों के बारे में भी कुछ खास तो सोचना ही चाहिए।'
- एसके भार्गव, रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी

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