कमर में लगी गोली, खून निकलता देख घबराया नहीं, सामना किया और मार गिराए आतंकी

देश की सीमा पर गोलियां झेलने वाले योद्धा सम्मानितÓ


ग्वालियर.

श्रीनगर के कुपवाड़ा जिले में पोस्टिंग के दौरान 18 जून 1994 को सूचना मिली कि तंगहार और चौकीवाला के बीच गांव में पांच आतंकवादी हैं। उसी समय सेना ने 20-20 सैनिकों की दो टोली बनाई, जिसमे एक टोली गाड़ी से और दूसरी पैदल जाने के लिए 1 घंटे का समय दिया। पैदल टोली में मैं भी था। रात 8 बजे पैदल मार्च करते हुए सुबह 4 बजे गंतव्य पर पहुंचे। आहट सुन आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। आतंकी पेड़ का सहारा लेकर फायर कर रहे थे। मैंने लेटते हुए पलटी मारी और फ ायर किया। एक गोली आतंकवादी के हाथ और दूसरी गले में लगी। वह गिर गया और उसी समय मेरे पास गोलियां खत्म हो गईं। मैंने पेट में लगी मैग्जीन निकालनी चाही। इतने में ही एक गोली मेरे कमर में लगी। खून निकलने लगा लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और फायरिंग कर आतंकवादियों को मार गिराया। मुझे जब होश आया तो हॉस्पिटल में था। देशभक्ति से जुड़ा यह संस्मरण हवलदार गिरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया, जिन्हें 'योद्धा सम्मानÓ से विभूषित किया गया।

शहर के 15 जांबाजों का सम्मान
देश की सरहद पर जान की बाजी लगाकर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने वाले जांबाजों को संस्कार मंजरी संस्था द्वारा ग्वालियर व्यापार मेला रंगमंच पर शुक्रवार को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों व नृत्य समूहों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिसे खूब सराहा गया। कार्यक्रम में संस्था की संस्थापक नीलम जगदीश गुप्ता, संयोजक आशा सिंह, अध्यक्ष संध्या राम मोहन त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।

पहले देशसेवा अब समाजसेवा
ये वीर जवान भले ही अब रिटायर्ड हो गए हों, लेकिन देशभक्ति का जज्बा अभी भी कायम है। ये देश की सरहद पर भले ही न हों, लेकिन अब समाज के अंदर की गंदगी को साफ करने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज स्कूल्स में युवाओं को शहीदों को बलिदान से परिचित कराना चाहिए और उन्हें मोटिवेट करना चाहिए कि वे देशसेवा के लिए आगे आएं।

Mahesh Gupta
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